लोकसभा चुनाव 2019: अंतर्कलह बन सकती है भाजपा के लिए परेशानी
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लोकसभा चुनाव में मेरठ सीट पर भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद चुनावी चौसर पर मोहरे चलने शुरू हो गए हैं। एक दूसरे की कमजोरी और मजबूती पर सभी दलों के रणनीतिकार मंथन में जुट गए हैं। लगातार तीसरी बार मैदान में उतरे राजेंद्र अग्रवाल के सामने इस बार पिछले चुनावों से बड़ी चुनौती सामने होगी। अंतर्कलह के बीच कांग्रेस प्रत्याशी से पार पाते हुए गठबंधन प्रत्याशी को हराना आसान नहीं होगा।
पिछले चुनावों पर नजर
इस बार 2014 जैसी लहर नहीं है। 2009 में भाजपा प्रत्याशी को 232137, बसपा प्रत्याशी को 184991, सपा प्रत्याशी को 183527 और कांग्रेस प्रत्याशी को 61003 वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा का गठबंधन रालोद से था। अबकी बार रालोद अलग है।
ऐसे में सपा और बसपा प्रत्याशी को मिले वोटों को जोड़ें तो भाजपा 1,36,381 वोट से पिछड़ी हुई नजर आती है। 2014 में भाजपा को 532981, सपा को 211759, बसपा को 300655 और कांग्रेस को 42911 वोट मिले थे। सपा और बसपा को मिले वोटों की तुलना में भाजपा इस चुनाव में 20,567 वोट के अंतर से बढ़त में नजर आती है।
प्रत्याशियों की मजबूती
सपा, बसपा और रालोद गठबंधन से हाजी याकूब कुरैशी बसपा से चुनाव चिन्ह पर मैदान में है। इस सीट पर करीब 5.50 लाख मुस्लिम मतदाताओं के साथ दो लाख एससी मतदाताओं के दम पर गठबंधन प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं। जनपद में 18 लाख से ज्यादा वोट हैं, लेकिन गठबंधन की मजबूती इस बात में है कि उसके पास इन दो बिरादरी का एकजुट वोट बैंक है।
राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में उतारे गए हैं। यहां पर भाजपा का परंपरागत वोट बैंक सभी पर भारी पड़ रहा है। भाजपा यदि इस वोट बैंक को सहेजकर बूथ तक ले जाने में कामयाब हुई तो भाजपा यहां से हैट्रिक लगा सकती है। कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल की वैश्य बिरादरी में पकड़ है और कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक भी उनके साथ है।
प्रत्याशियों की कमजोरियां
गठबंधन प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी के सामने मुस्लिम नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई से पार पाना बड़ी चुनौती है। क्योंकि कहीं न कहीं इन मुस्लिम नेताओं की नाराजगी साफ नजर आ रही है। इस कारण वोट यदि दूसरी तरफ परिवर्तित भी नहीं होता है तो इस विरोध में मुस्लिम मतदाताओं की उदासीनता याकूब कुरैशी को भारी पड़ सकती है।
कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल के सामने वैश्य मतों को लेना ही सबसे बड़ी समस्या है। हालांकि वह वैश्य बिरादरी का जाना पहचाना नाम हैं, लेकिन इस पहचान को वोट बैंक में तब्दील कर पाना आसान नहीं है। मेरठ में वैश्य बिरादरी भाजपा का परंपरागत वोट बैंक है। इसकी संख्या भी करीब 2.50 लाख के आसपास है।
वहीं पहले घोषित किए गए प्रत्याशी ओपी शर्मा एडवोकेट का टिकट कटने से ब्राह्मण बिरादरी भी कहीं न कहीं नाराज नजर आ रही है। भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल को सबसे बड़ा खतरा अपनों से ही है। उन्हें लेकर जो अंतर्कलह सामने आ रही है। वह यदि मतदान से पहले सुलझकर जोश में तब्दील नहीं हुई तो भाजपा के लिए मुकाबला फंस सकता है।