लोकसभा चुनाव में उठेंगे ये तीन बड़े मुद्दे, व्यापारियों ने बयां किया अपना दर्द
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लोकसभा चुनाव में इस बार जीएसटी यानि वस्तु एवं सेवा कर और नोटबंदी भी मुद्दा होगा। दुकानदार से लेकर उद्यमियों की राय है कि जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए। टैक्स चुकाने में व्यापारी को परेशानी नहीं है, लेकिन जिस तरह जीएसटी में हिसाब रखना पड़ रहा है, वह परेशान कर देने वाला है। बड़ौत के टाइल्स व्यापारी आकाश चौधरी कहते हैं कि नोटबंदी से फायदा कम और नुकसान अधिक हो गया है। मजदूर और किसानों को काम छोड़कर बैंकों की लाइन में खड़े रहना पड़ा, यह फैसला एक तरीके से देश पर थोपा गया। आर्थिक स्थिति सुधार या काला धन पकड़ने का जो दावा किया था, वह तो धरातल पर नहीं दिखा। यह स्थिति यूपी के बागपत जनपद की है।
बड़ौत निवासी हरि भजन कश्यप कहते हैं कि वोट पाने के लिए गरीबों को सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन गरीबों के खातों में कभी रुपये नहीं पहुंचे। 15 लाख रुपये तो दूर गरीबों को 15 रुपये नहीं दिए गए। गरीबों को तो केवल वोट बैंक माना जाता है, वोट लेने के बाद नेता सारे वायदे भूल जाते हैं।
बड़ौत के उद्यमी राजेश जैन का कहना है कि जीएसटी से व्यापारियों को फायदा हुआ है। अब व्यापारी भी अपने व्यापार के साथ पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं। जुगमेंद्र जैन का कहना है कि नोटबंदी से कालेधन पर रोक लगी है। नए काम की शुरुआत में परेशानी जरूर होती है, लेकिन बाद में वह कितना फायदेमंद होता है, इसका अहसास लोगों को बाद में होता है।
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