ये है इंडिया: खतरे में जान डालकर खेती करते हैं किसान, हर बार होती है पुल बनवाने की मांग
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आजादी के 72 साल बाद भी देहात के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां विकास नहीं हुआ है। ऐसा ही एक गांव है बिहारगढ़। ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर खेती करने को मजबूर हैं। गंगा के खादर के खेतों से आने-जाने में उन्हें हर रोज सोलानी नदी पार करनी होती है। शुकतीर्थ क्षेत्र के गांव बिहारगढ़ में करीब दो हजार की आबादी है। यह इलाहाबास ग्राम पंचायत का मजरा है, जिसमें 1200 मतदाता भी हैं। बिहारगढ़ से तीन किलोमीटर दूर गंगा के खादर में ग्रामीण प्रतिदिन सोलानी नदी पार कर खेती करने के लिए जाते हैं। महिला सोमवती, रोशनी, बीरमति, सुमन, ललिता, बाला, रज्जो, कलावती और कमला का कहना है कि गन्ने की फसल, पशुओं का चारा लाने को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। यह स्थिति यूपी में मुजफ्फरनगर जनपद के बिहारगढ़ गांव की है।
चुनाव में हर बार करते हैं पुल बनवाने की मांग
गांव के लोग बताते हैं कि भैंसा बुग्गियों के नीचे ट्यूबें लगाकर नदी पार करते हैं। किसान सुरेश, नत्थू चौहान, पप्पन, श्यामा, पप्पू और बाबू के 12 से अधिक पशु नदी में डूबकर मर चुके हैं। प्रधान बुधराम चौहान बताते हैं कि सांसद और विधायक से सोलानी नदी पर पुल बनवाने की कई बार मांग कर चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव के शिवकुमार, पप्पू सिंह, पूर्व प्रधान चंद्रभान, विजय सिंह, मास्टर ओमपाल, वीरेंद्र ने कहा कि वोट मांगने प्रत्याशी आएंगे तो सोलानी नदी पर पुल बनवाने की मांग फिर से उठाई जाएगी।
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