अमर उजाला की खास रिपोर्ट: कैराना से पलायन कर गए लोगों की ‘वापसी’ पर सियासी संग्राम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री मोदी से लेकर योगी आदित्यनाथ ने दंगों का जिक्र किया। कैराना में पलायन कर गए लोगों की वापसी को मुद्दा बनाया और कहा कि भाजपा के शासन में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, इसीलिए पलायन कर गए लोग अब वापस आ रहे हैं। रंगदारी समेत अन्य अपराध खत्म हुए हैं। मुजफ्फरनगर दंगों के मुकदमों की वापसी भी एक मुद्दा है। राष्ट्रीय लोकदल भी दंगों की तपिश में झुलसे भाईचारे को फिर से कायम करने को मुद्दा बना रही है। जनता के बीच यह कितना बड़ा मुद्दा है, प्रस्तुत है इस पर अमर उजाला की रिपोर्ट...
कैराना में कानून-व्यवस्था में हुआ है सुधार
कैराना में अगस्त 2014 में एक सप्ताह के अंदर तीन व्यापारियों की रंगदारी नहीं देने पर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कस्बे के व्यापारियों में दहशत फैली और कई परिवार पलायन कर गए। 2016 में कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने 346 परिवारों की पलायन सूची जारी कर राजनीति में हलचल मचा दी थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा गर्माया। सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को हथियार बनाया, लेकिन ये काम नहीं आया। इस बार भी लोग मानते हैं कि कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन चुनाव में यह कितना असर डालेगा, यह परिणाम ही बताएगा। कैराना से पलायन कर दूसरे शहरों में गए लोग घर वापसी करने लगे। गऊशाला के पास कोल्ड ड्रिंक्स एजेंसी के मालिक ईश्वर चंद उर्फ बिल्लू, जितेंद्र मित्तल ने सूरत से आकर दुकान चालू की। मोहल्ला शंकर सौदियान निवासी नवीन का परिवार लौट आया है। कैराना व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिल गुप्ता कहते हैं कि कस्बे में रंगदारी और गुंडागर्दी पर अंकुश लगा है। अब यहां का व्यापारी सुकून महसूस कर रहा है। लोग भी वापस आने की हिम्मत जुटा रहे हैं। उपाध्यक्ष शौकीन अंसारी कहते हैं कि वर्तमान सरकार में हम अपनी दुकानों पर सुकून से बैठे हैं। कोई डर यहां नहीं है।
दंगों के मुकदमों की वापसी पर लोग पूछ रहे सवाल
मेरठ के सिवाया में हुई भाजपा की विजय संकल्प रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने जनता से सीधे पूछा कि मुजफ्फरनगर दंगा और कैराना की गुंडागर्दी याद है ना?, सीएम योगी आदित्यनाथ की जनसभा हो या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैलियां, सबमें इसका जिक्र किया गया। दंगा प्रभावित क्षेत्रों में दंगों के दौरान दर्ज हुए मुकदमों की वापसी भी एक मुद्दा है। कैराना उप चुनाव में यह जमकर गूंजा था। भाजपा ने मुकदमों की वापसी कराने की बात कही थी, तो रालोद ने आपसी समझौते से मुकदमे वापस कराने का वादा किया था। प्रदेश सरकार चुनाव से पहले दंगे के 95 मुकदमों में से 38 के वापस लेने की संस्तुति कर चुकी है। अभी भी सियासी आरोप-प्रत्यारोपों के बीच लोग दंगों में बेगुनाह लोगों की नामजदगी पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि रालोद मुखिया एवं गठबंधन प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह हों या भाजपा उम्मीदवार डॉ. संजीव बालियान, जनसंपर्क और सभाओं में इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
सहारनपुर में नहीं इसका असर
भाजपा की तरफ से कैराना पलायन और वापसी को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है। लोग यह तो मान रहे हैं कि सरकार बदलने के बाद बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई हुई और हालात सुधरे हैं। लेकिन चुनाव में इसका असर होगा, यह मानने को तैयार नहीं हैं। नुमाइश कैंप निवासी मुकेश का कहना है कि कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है, इस चुनाव में कैराना पलायन मुद्दा बनता नहीं दिख रहा है। वहीं शिवाजीनगर निवासी राजकुमार बोले कि अपराध कम हुए हैं, चुनाव में विकास मुद्दा रहेगा। सहजवा गांव निवासी बिट्टू ने भी पलायन मुद्दे को अब केवल कैराना तक ही सीमित बताया।
मुख्य बिंदु
- 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद गैर भाजपा दलों के सारे समीकरण ध्वस्त हो गए थे। 2014 में भाजपा यूपी में बड़ी ताकत बनकर उभरी थी।
- 2016 में भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने पहले 250 परिवारों, बाद में 346 और कांधला के 60 परिवारों की सूची जारी कर पलायन का मुद्दा उठाया।
- 2018 में हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उप चुनाव में भी यह मुद्दा उठा, लेकिन इस बार यह मुद्दा उसके काम नहीं आया।
- 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर मुद्दे को गर्मा रही है। इस बार कैराना पलायन कर गए लोगों की वापसी को मुद्दा बनाया जा रहा है।
दंगे और पलायन का जिक्र जरूर, पर मुद्दा नहीं
लूंब गांव के अरविंद कुमार का कहना है कि छपरौली विधानसभा क्षेत्र कैराना के नजदीक है, लेकिन बागपत में पलायन का मुद्दा नहीं है। बड़ौत निवासी धर्मेंद्र तोमर का कहना है कि मुजफ्फरनगर दंगे के जिक्र से वोट बैंक का ध्रुवीकरण नहीं होगा। बागपत में भी दंगे के दौरान कई वारदातें हुई थीं, लेकिन इस बार मुद्दा दंगा या पलायन नहीं है। अग्रवाल मंडी टटीरी निवासी सतीश कहते हैं कि कैराना और मुजफ्फरनगर दंगे का इस बार यहां असर नहीं दिख रहा है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/