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मिशन 2019: 45 साल का इतिहास और हुकुम परिवार की सियासत पर लगा विराम, भाजपा ने खेला बड़ा दांव

Sun, 24 Mar 2019 03:40 AM IST
देव कश्यप रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 24 Mar 2019 03:40 AM IST
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Lok Sabha Elections 2019 BJP cut the ticket of Hukum Singh's daughter Mriganka

कैराना में हुकुम सिंह परिवार की सियासत पर विराम लग गया है। इस सीट पर सियासत हुकुम सिंह और हसन परिवार के इर्द गिर्द घूमती रही है। हुकुम सिंह का परिवार 1974 से यहां लगातार चुनाव लड़ता आ रहा है और वह सात बार विधायक और एक बार सांसद बनें। उनके निधन के बाद उनकी बेटी मृगांका ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली, लेकिन दो बार चुनाव हारने के बाद पार्टी का भरोसा उनसे उठ गया और अब यहां गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया है। 

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सेना की नौकरी छोड़ राजनीति में आए हुकुम सिंह भाजपा के बड़े कद के नेताओं में शुमार होते थे। राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हुकुम सिंह की अध्यक्षता में पिछड़ों और अनुसूचित जाति के आरक्षण का सभी जातियों में हिस्सेदारी के आधार पर बंटवारा करने के लिए सामाजिक न्याय समिति गठित  की थी, जिसके भी वह अध्यक्ष थे। इसी आधार पर सरकार ने इस बार पिछड़ों में आरक्षण का बंटवारा करने की रिपोर्ट तैयार कराई है। हालांकि इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका है।  
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मुजफ्फरनगर दंगे में प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक मुखर रहे हुकुम सिंह ने कैराना से हिंदुओं के पलायन को बड़ा मुद्दा बनाया था। हुकुम सिंह 1974 में लोकदल के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस और भाजपा के टिकट पर 13 बार यहां से विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ा। सात बार विधायक और एक बार सांसद बनें। 2009 के चुनाव में वह बसपा की तबस्सुम हसन से हार गए थे। 2014 में हुकुम सिंह ने तबस्सुम हसन के पुत्र सपा प्रत्याशी नाहिद को सवा दो लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था।

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2017 के विधान सभा चुनाव में उनकी बेटी मृगांका सिंह को विधानसभा का टिकट दिया लेकिन वह नाहिद हसन से चुनाव हार गईं। मृगांका को टिकट दिलाए जाने से नाराज हुकुम सिंह के पोते अनिल चौहान रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े थे, जिसका नुकसान मृगांका को उठाना पड़ा। हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई लोकसभा सीट पर 2018 में हुए उप चुनाव में भाजपा ने मृगांका को टिकट दिया।

इस चुनाव में खुद मुख्यमंत्री और सत्ता के कई दिग्गज मंत्री तक यहां डेरा डाले रहे, लेकिन इसके बाद भी मृगांका नहीं जीत सकी। इसका पार्टी में काफी गलत मैसेज गया। पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे और कमजोर टीम को टिकट कटने की वजह माना जा रहा है। कैराना लोकसभा सीट पर टिकट के लिए कई दावेदार थे। इनमें मृगांका के अलावा, गंगोह विधायक प्रदीप कुमार का भी मजबूत दावा था। 

इसके अलावा सपा नेता एमएलसी गुर्जर नेता विरेंद्र सिंह का नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में था। पार्टी भी कई दिन तक असमंजस में थी। प्रदीप चौधरी ने यही तर्क पार्टी हाईकमान को दिया। बताया गया कि यदि उन्हें टिकट दिया जाए तो गंगोह में वह मजबूत हो जाएंगे और नुक्कड़ में भी असर पड़ेगा।


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