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पश्चिमी यूपी में अक्तूबर तक फसलों को नुकसान पहुंचाएगा टिड्डी दल, पढ़िए ये रिपोर्ट

Mon, 01 Jun 2020 05:53 PM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 01 Jun 2020 05:53 PM IST
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Locust team will damage crops by October in western UP of Uttar Pradesh
टिड्डी दल (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण टिड्डी दल समय से पहले भारत पहुंच गया। वर्षा अधिक होने से टिड्डियों का प्रजनन भी अधिक हुआ है। यह दल अक्तूबर तक फसलों को नुकसान पहुंचाएगा। इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्षा ऋतु से पहले ही टिड्डी दल पहुंच गया। इससे किसानों को अनुमान से अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

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जुलाई से अक्तूबर तक रहता है प्रकोप
रेगिस्तानी टिड्डी का वैज्ञानिक नाम सिस्टोसेरा ग्रिगेरिया है। इसका दल मानसून के साथ आमतौर पर जुलाई में आता है और अक्तूबर तक रहता है। यह दल फसलों को भारी नुकसान पहुंचाता है। इनके दल में चार करोड़ तक टिड्डियां होती हैं। इस बार यह दल समय से पहले ही दस्तक दे चुका है। 
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वर्षा ऋतु में और बढ़ेगी तादाद
टिड्डियां वर्षा के समय में प्रजनन करती हैं। इस बार सर्द मौसम में अधिक वर्षा हुई और अप्रैल एवं मई तक रही। जिससे टिड्डियों का प्रजनन अधिक हुआ। इसलिए इसने यहां समय से पहले दस्तक दी। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो वर्षा ऋतु नजदीक आ रही है। वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से पश्चिमी यूपी में बारिश जारी है। यह दल रात में रुकता है और प्रजनन करता है। वर्षा ऋतु में टिड्डी के बच्चे जल्द निकलते हैं और झुंड में शामिल होकर फसलों पर आक्रमण करते हैं। इस बार तादाद दोगुनी होने की आशंका है। टिड्डी जहां रात में रुकती हैं वहां मादा टिड्डी अपने उदर भाग को जमीन में लगभग 10-15 सेमी तक गहराई में गाड़कर नमी मिलने पर अंडे देती हैं। एक बार में टिड्डी 60 से 80 अंडे देती है। कुल 3-4 बार में एक वयस्क मादा 250-300 अंडे देती है। अंडे चावल के आकर में नारंगी पीले रंग के होते हैं। जिस जगह मादा अंडे देती है वहां सुराग दिखाई देते हैं। जिसके मुंह पर सफेद झाग से नजर आते हैं।
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यह भी पढ़ें: अलर्ट: 40 साल में पहली बार सहारनपुर पर टिड्डी दल के अटैक का खतरा, पढ़िए- ये जरूरी सुझाव

वैज्ञानिकों की टीम का गठन
टिड्डी दल से भारत में पहुंचने के कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि ने वैज्ञानिकों की टीम का गठन किया है। दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, बागपत, सहारनपुर, मेरठ आदि जिलों में भी इस दल के प्रकोप की आशंका है। गठित टीम किसानों को जागरूक करेगी ताकि वे इस दल से होने वाले नुकसान से बच सकें। 

मैलाथियान 50 ईसी                                  1850 मिली
मैलाथियान 25 डब्लूपी                                3700 ग्राम
क्लोरपाइरीफास 50 ईसी                               500 मिली
क्लोरपाइरीफास  20 ईसी                             1200 मिली
नोट-500-600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से किसी एक का करना है छिड़काव।

टिड्डी दल इस बार समय से पहले भारत में प्रवेश कर गया है। इसके पीछे वजह जलवायु के परिवर्तन का होना है। वर्षा अधिक होने से इनकी संख्या बढ़ती है। समय से पहले इनका प्रवेश करना गंभीर विषय है। भारत में इस बार मई में प्रवेश करने से किसानों को अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों की टीम गठित की गई है। जिससे पश्चिमी यूपी के किसानों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। - डॉ. आरके मित्तल, कुलपति सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि मोदीपुरम

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