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आ रहा है टिड्डी दल किसान हो जाएं सतर्क

Wed, 27 May 2020 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2020 11:45 PM IST
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locaster group are coming, farmers alart.
हस्तिनापुर। अगले दस दिन टिड्डी दल से फसलों को बचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। बहुत बड़ा टिड्डी दल क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र ने बताया कि बड़े आकार दल सूबे में प्रवेश कर चुका है। इस टिड्डी दल की लोकेशन पर कृषि वैज्ञानिकों की विशेष नजर है।
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स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक व पादप सुरक्षा का कहना है कि अगले 10 से 12 दिन तक निरंतर कार्य करने से टिड्डी दल के आक्रमण के फसलों को सुरक्षित बचाया जा सकता है। वहीं किसान गन्ना, ज्वार, मक्का तथा औद्यौनिक फसलें लगा रखी हैं। वह संस्तुत सिस्टमिक रासायनों का छिड़काव कर दें। जिससे आने वाले एक सप्ताह तक टिड्डी तथा अन्य कीड़ों से बचाव हो सके।
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बचाव के कुछ आसान उपाय
1. टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उनको उतरने से रोकने के लिए गोबर के उपले सुलगाकर उसमें नीम की पत्ती एवं लाल मिर्च पाउडर मिलाकर धुआं करें। जिससे टिड्डी दल आपके खेत में न बैठकर आगे निकल जाए।
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2. टिड्डी दल दिखाई देते ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर उनको अपने खेत पर बैठने न दें। अपने खेतों में पटाखे फोड़कर, थाली बजाकर, ढोल-नगाड़े बजाकर आवाज करें। ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज ध्वनि कर सकते हैं। कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर के टिड्डी को तथा उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता है। इनको उस क्षेत्र से हटाने या भगाने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से भोर का समय उपयुक्त होता है। प्रकाश प्रपंच लगाकर एकत्रित करके नष्ट कर सकते हैं। तेज आवाज से डरकर आपकी फसल व पेड़ पौधों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
रासायनिक नियंत्रण
टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8 -9 बजे के करीब उड़ान भरता है। अत: इसी अवधि में इनके ऊपर ट्रैक्टर चलित स्प्रेयर की मदद से कीटनाशक का छिड़काव कर इन्हें मारा जा सकता है। रसायन के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात्रि 11:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक होता होता है
1. टिड्डी के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 ईसी या बेंडियोकार्ब 80 त्न 125 ग्राम 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50 ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 त्न डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 5 ईसी 400 मिलीग्राम प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।
2. मैलाथियान 5 त्न धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से डस्टर द्वारा बुरकाव करें। इसके लिए प्रात:काल का समय अधिक उपयुक्त होता है। इस समय पत्तियों पर ओस पड़ी रहती है। जिस कारण धूल पत्तियों पर चिपक जाती है। बुरकाव को खेत के बाहरी हिस्से से प्रारंभ करते हुए अंदर की तरफ करना चाहिए।

3.टिड्डी दल से प्रभावित स्थल पर वृहद रूप में किसानों तथा विभिन्न विभागों द्वारा सामूहिक प्रयास करके ट्रैक्टर माउंटेड पावर स्प्रेयर एवं अन्य उपयुक्त पावर स्पेयर का उपयोग करके रासायनिक कीटनाशी का छिड़काव करें। छिड़काव कर्मी को पीपीई किट, दस्ताना, मास्क आदि का प्रयोग करना जरूरी है। वहीं, किसान कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण ले सकते हैं।
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