अरे! उनके तो केवल एक लड़की है... देखना वंश कैसे चलेगा। लड़की का क्या, वो तो अपने घर चली जाएगी फिर मां-बाप का क्या होगा, एक लड़का तो होना ही चाहिए... क्या सिर्फ एक बच्चा? कुछ दूसरा ही किस्सा होगा तभी तो और बच्चा नहीं है ... पता नहीं क्या है, भगवान भरोसे है इनका तो... ऐसी तमाम बातें इन लोगों को सुनने को मिली। रिश्तेदारों और दोस्तों ने मन भर ताने दिए, आक्षेप लगाए और उलाहना दी। यहां तक कि कोई खराबी होगी तभी तो बच्चे... कहकर स्वास्थ्य अक्षमता का टैग भी लगा दिया। लेकिन इन लोगों ने समाज की बातों और तानों को अनसुना कर नियम का पालन किया। हम दो हमारे दो, हम दो हमारे एक का व्रत धारण कर उसका पालन किया।
विश्व जनसंख्या दिवस: ये हैं जनसंख्या रोकथाम के असली हीरो, ताने सुने, बातें हुईं... लेकिन निभाई जिम्मेदारी
शहर में कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने स्तर से जनसंख्या के खिलाफ मुहिम छेड़े हैं। इन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को कोई भूख हड़ताल नहीं की, न अभियान चलाया। बस अपने स्तर से जनसंख्या नियंत्रण में अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाई।
दो पीढ़ी से निभा रहे हम दो हमारे दो की परंपरा
शास्त्री नगर निवासी प्रेमल रस्तोगी का परिवार दो पीढ़ियों से हम दो हमारे दो के नियम को निभा रहा है। प्रेमल रस्तोगी स्वयं दो भाई हैं और दोनों भाइयों के भी केवल दो बच्चे हैं। प्रेमल बताते हैं कि उनके माता-पिता की दो संतानें प्रेमल रस्तोगी और बड़े भाई विपुल रस्तोगी हैं। बड़े भाई विपुल रस्तोगी की पत्नी प्रियंका रस्तोगी और एक बेटी माही रस्तोगी है। एक बेटी के बाद विपुल, प्रियंका ने दूसरे बच्चे के लिए कभी प्रयास नहीं किया। प्रेमल रस्तोगी की पत्नी संजना रस्तोगी और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा कुशाग्र रस्तोगी और छोटा बेटा एकाग्र है। इस तरह छोटा परिवार सुखी परिवार के नियम को यह परिवार पूरी तरह पालन कर रहा है। प्रेमल कहते हैं कि जिस तरह देश की जनसंख्या बढ़ रही है उसे देखते हुए हर व्यक्ति को इस नियम का पालन करना चाहिए।
बेटी के साथ अपनाया हम दो हमारे एक का नियम
सीए विजित जैन और डॉ. कशिका जैन का परिवार भी छोटा परिवार सुखी परिवार के नियम का पूरी तरह पालन कर रहा है। दो पीढ़ियों से परिवार में इसी नियम का पालन किया जा रहा है। मनोवैज्ञानी डॉ. कशिका और विजित दोनों के एक बेटी युविका है। एक बेटी के बाद दोनों ने ही दूसरे बच्चे के लिए प्रयास नहीं किया। विजित व कशिका कहते हैं कि एक बेटी से ही हमें वह खुशियां मिल गई। बेटी को अच्छी परवरिश दे सकें। उसके सपनों को पूरा कर सकें इसलिए हम ने दूसरे बच्चे के लिए ट्राई नहीं किया। वहीं विजित के मम्मी-पापा नीरा और विनय जैन भी बेटे के इस निर्णय से बहुत खुश हैं। कभी उन्होंने बेटे बहू पर दूसरे बच्चे का या लड़का न होने का दबाव नहीं बनाया। विजित स्वयं एक भाई और बहन हैं। कशिका कहती हैं जब हमारे पेरेंट्स ने छोटे परिवार के नियम को उस जमाने मे अपनाया तो आज हम सब शिक्षित हैं इसलिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए हमें सोचना चाहिए। विजित की बहन विभा और विनी के भी एक ही बच्चा है।
बेटी ने दी हर खुशी, बने फैमिली प्लानर
शास्त्री नगर निवासी विजेता शाह और अरविंद शाह हम दो हमारे एक के नियम को बेहतरी से अपना रहे हैं। विजेता, अरविंद के एक बेटी आरना शाह है। विजेता कहती हैं कि बेटी ने हर वो खुशी दी जो एक माता पिता की चाहत होती है। बस कभी कभी बेटी के अकेलेपन से दुख होता है। लेकिन खुश हैं कि भगवान ने हमें इतनी प्यारी संतान दी। अपने देश के बारे में सोचते हुए हर व्यक्ति को जनसंख्या नियंत्रण की ओर ध्यान देना चाहिए और परिवार नियोजन को अपनाना चाहिए। अपने देश के विकास में योगदान दें, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या तमाम मुश्किलों का मूल कारण है।
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