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वाई-फाई से तेज चलेगा लाई-फाई, बुलेट ट्रेन से तेज दौड़ेगी हाइपरलून ट्रेन

Fri, 20 Dec 2019 01:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 20 Dec 2019 01:21 AM IST
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lifi will faster than wifi
वाईफाई से तेज चलेगा लाईफाई... बुलेट ट्रेन से तेज दौड़ेगी हाइपरलूप ट्रेन
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मेरठ। कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। जब आवश्यकता बढ़ जाती है और संसाधन न हों तो ऐसे में जुनून कुछ ऐसा करा देता है जो नई राहें खोल देता है। कुछ ऐसा ही भविष्य का खाका एसडी इंटर कॉलेज में चल रही 47वीं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में भावी वैज्ञानिक मॉडल्स के जरिये खींच रहे हैं।
गोरखपुर के महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के 12वीं के छात्र सूरज विश्वकर्मा ने लाई-फाई (लाइट फिडेलिटी) का मॉडल बनाया है। उसका दावा है कि यह वाई-फाई से भी तेज चलता है। यह तकनीक आने वाले दिनों में इंटरनेट की तस्वीर को बदल देगी। इसकेइस्तेमाल के लिए एक एलईडी बल्ब की जरूरत है। वाईफाई में रेडियो वेव्स से डाटा ट्र्रांसमिशन करता है, तो लाईफाई एलईडी की रोशनी से कार्य करती है। इसे विजेबल लाइट कम्यूनिकेशन कहते हैं। डाटा ट्रांसफर होने केदौरान इसकी स्पीड 224 जीबीपीएस है जो वाईफाई से करीब एक हजार गुना ज्यादा है।
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फैजाबाद के कनौसा गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा श्रुति ने हाइपरलूप टनल ट्रेन का मॉडल्स तैयार किया है। उसने बताया कि सोलर पैनल से एनर्जी लेकर चलनी वाली यह ट्रेन बुलेट ट्रेन से भी तेज चलेगी। इलेक्ट्रो मैग्नेट के जरिए सोलर पैनल से एनर्जी लेकर यह रफ्तार पकड़ेगी। इसकी गति हवा के दबाव या अन्य किसी वजह धीमी नहीं होगी। वहीं, फैजाबाद के देवा इंटर कॉलेज की 12वीं की छात्रा पुष्पम पांडे ने भविष्य में बेहतर ट्रांसपोर्ट का मॉडल तैयार किया है। इंटरनेट और एलईडी लाइट को कनेक्ट किया गया है। अगर सड़क दुर्घटना होती है तो पीछे वालों वाहनों को एलईडी लाइट के जरिए आगे वाले वाहन की दुर्घटना का पता चल जाएगा।
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20 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं के मॉडल्स कृषि पद्धति, स्वच्छता, स्वास्थ्य, संसाधन प्रबंधन, औद्योगिक विकास, भावी परिवहन और संचार, शैक्षिक खेल और गणितीय प्रतियोगिता पर आधारित हैं। इसमें 231 बाल वैज्ञानिक और 52 शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं।
स्मार्ट फोन प्रोजेक्टर से चलाएं डिजिटल क्लास
मुरादाबाद के पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजपुर के कक्षा 8 के छात्र आयुष कुमार ने स्मार्ट फोन प्रोजेक्टर बनाया है। महज 250 रुपये में तैयार इस प्रोजेक्टर के जरिए डिजिटल क्लास चलाई जा सकती है। खासतौर पर देहात के विद्यालयों में डिजिटल क्लास का अभाव है, लेकिन इस तकनीक के जरिए वहां ऐसी क्लास चलाई जा सकती हैं। इसमें न तो बिजली का झंझट हैं और न ही किसी बैटरी की जरूरत है। लैंस के जरिए तैयार किए गए प्रोजेक्टर पर मोबाइल फोन रखते ही 32 इंच की स्क्रीन आपके सामने होगी।
आज होगा प्रदर्शनी का समापन, विजेता होंगे पुरस्कृत
इस चार दिवसीय प्रदर्शनी का शुक्रवार को समापन हो जाएगा। प्रदर्शनी का विषय सतत विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी है। 18 विशेषज्ञ मूल्यांकन कर रहे हैं। विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इसमें चुने गए प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली विज्ञान प्रदर्शनी में प्रदेश का नेतृत्व करेंगे।

अब होगी ‘कौन बनेगा नन्हा कलाम’ प्रतियोगिता
प्रदर्शनी में आए काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी लखनऊ के इनोवेशन ऑफिसर संदीप द्विवेदी ने बताया कि अगले साल विभाग ‘कौन बनेगा नन्हा कलाम’ प्रतियोगिता कराने जा रहा है। इसमें लखनऊ, उन्नाव, महाराजगंज, गोरखपुर और जौलान जिले शामिल हैं। मेरठ से भी प्रस्ताव मांगा है। प्रस्ताव मिलने पर इसे भी शामिल किया जाएगा। यह प्रतियोगिता अगले साल होगी। बच्चे चार स्तरीय परीक्षा देंगे। विजेताओं को 21-21 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसमें कक्षा छह से 10वीं तक के विद्यार्थी शामिल होंगे।
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