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ततीना ट्रिपल मर्डर में पांच को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Wed, 16 Nov 2016 02:18 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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ततीना में दंपति और बच्ची की हत्या करने वाले पांच हत्यारों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा से दंडित किया। न्यायालय अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एंटी करप्शन ने इन्हें शुक्रवार को दोषी करार दिया था।
तीन अगस्त 2008 को मवाना के ततीना गांव निवासी यासमीन और उसके पति फैजुल हसन और बेटी गजाला का मर्डर हुआ था। तीनों दुर्वेशपुर गांव में एक शादी में शामिल होने जा रहे थे। ततीना गांव के नाले वाले पुल पर 6-7 अज्ञात लोगों ने तीनों को मार दिया था। यासमीन के चाचा जुल्फिकार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया कि सुनीत उर्फ टीटू पुत्र सत्यप्रकाश, अमरपाल व राजू पुत्रगण खड़क सिंह, सोनू पुत्र आशाराम निवासी ततीना, देवेंद्र पुत्र बसीराम गुर्जर, अजय पुत्र बीर सिंह गुर्जर, अमित पुत्र हेम सिंह निवासी गांव गावड़ी परीक्षितगढ़ ने तीनों हत्याएं की थीं।
पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। इस दौरान पुलिस ने कुल 14 गवाहों को न्यायालय में पेश किया। इस केस की सुनवाई के दौरान अमरपाल की जेल में ही मौत हो गई थी। इस मामले में कई बार मुकदमे में नाम काटने और जोड़ने को लेकर हंगामा भी हुआ। कई अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ। जबकि सभी आरोपी जेल में बंद रहे। न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से देवकीनंद शर्मा एडीजीसी और अधिवक्ता असलम ने पक्ष रखा। शुक्रवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और पांचों आरोपियों को दोषी माना। जबकि अजय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मंगलवार को कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सजा सुना दी। कोर्ट ने सभी पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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तीन अगस्त 2008 को मवाना के ततीना गांव निवासी यासमीन और उसके पति फैजुल हसन और बेटी गजाला का मर्डर हुआ था। तीनों दुर्वेशपुर गांव में एक शादी में शामिल होने जा रहे थे। ततीना गांव के नाले वाले पुल पर 6-7 अज्ञात लोगों ने तीनों को मार दिया था। यासमीन के चाचा जुल्फिकार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया कि सुनीत उर्फ टीटू पुत्र सत्यप्रकाश, अमरपाल व राजू पुत्रगण खड़क सिंह, सोनू पुत्र आशाराम निवासी ततीना, देवेंद्र पुत्र बसीराम गुर्जर, अजय पुत्र बीर सिंह गुर्जर, अमित पुत्र हेम सिंह निवासी गांव गावड़ी परीक्षितगढ़ ने तीनों हत्याएं की थीं।
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पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। इस दौरान पुलिस ने कुल 14 गवाहों को न्यायालय में पेश किया। इस केस की सुनवाई के दौरान अमरपाल की जेल में ही मौत हो गई थी। इस मामले में कई बार मुकदमे में नाम काटने और जोड़ने को लेकर हंगामा भी हुआ। कई अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ। जबकि सभी आरोपी जेल में बंद रहे। न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से देवकीनंद शर्मा एडीजीसी और अधिवक्ता असलम ने पक्ष रखा। शुक्रवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और पांचों आरोपियों को दोषी माना। जबकि अजय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मंगलवार को कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सजा सुना दी। कोर्ट ने सभी पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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