यूपी: कुकर्म के बाद बालक की हत्या के मामले में अभियुक्त को उम्रकैद, लगाया ढाई लाख रुपये का जुर्माना
- एडीजे पंचम कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला
- बिनौली थाना क्षेत्र के जौहड़ी गांव में छह साल पहले अंजाम दी गई थी वारदात
विस्तार
उत्तर प्रदेश के बागपत के बिनौली थाना क्षेत्र में छह साल पहले अनुसूचित जाति के बालक की कुकर्म के बाद गला रेतकर हत्या के मामले में अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मंगलवार को एडीजे पंचम कृष्ण कुमार सिंह ने फैसला सुनाया।
डीजीसी सुनील पंवार, एडीजीसी राजीव तोमर, एडीजीसी अनुज ढाका और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता प्रवेश कुमार ने बताया कि नौ मार्च 2014 को जौहड़ी गांव से करीब 11-12 साल का बालक संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। दस मार्च को उसका गला-कटा शव बरामद हुआ था। ग्रामीणों ने खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन किया था।
मृतक के चाचा ने गांव के पास के ईंट भट्टे के चौकीदार खेड़ा हटाना गांव निवासी कर्मवीर और उसके दो साथियों के खिलाफ हत्या, एससीएसटी और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने जांच कर कर्मवीर और कुलदीप के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
कुलदीप को साक्ष्य के अभाव में 30 सितंबर को दोषमुक्त कर दिया गया था। सोमवार को प्रकरण की सुनवाई एडीजे पंचम कृष्ण कुमार सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने अभियुक्त कर्मवीर को उम्रकैद और ढाई लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार भी अदालत में मौजूद रहा।
लालच देकर बुलाया और बेरहमी से की हत्या
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता प्रवेश कुमार ने बताया कि अभियुक्त ने बहाने से बालक को घर बुलाया। उसे दस रुपये देने और चाऊमीन खिलाने का लालच दिया गया था। कुकर्म के बाद दरांती से गर्दन और कंधे पर सात वार कर हत्या कर दी गई थी।
फांसी पर लटकता दरिंदा तो मिल जाता चैन
अदालत में सुनवाई के दौरान मृतक के परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। पिता ने कहा कि दरिंदा अगर फांसी पर लटकाया जाता तो उन्हें चैन मिल जाता। हैवान ने उनके घर को उजाड़ दिया।
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