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Meerut News: कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट का अभी तक नहीं मिला लाइसेंस
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बिजनौर जिला अस्पताल का ब्लड बैक।
- पांच सालों से चल रही है यूनिट शुरू करने की प्रक्रिया
- एक साल पहले ब्लड बैंक में आए यूनिट शुरू करने के संसाधन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। लोगों को अभी भी प्लेटलेट्स और जंबो पैक के लिए निजी रक्तकोष के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पिछले करीब पांच सालों से जिला अस्पताल स्थित रक्तकोष में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू करने की प्रक्रिया चल रही हैं। मगर अभी यूनिट शुरू करने का लाइसेंस नहीं मिल है। जिसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल को एक अप्रैल 2023 से महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज में संबद्ध कर दिया गया है। जिसके बाद से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की टीम के लिए कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट प्राथमिकता में है। मगर अभी तक यह यूनिट शुरू नहीं हो पाई है। यूनिट शुरू करने के लिए पहले तो क्षेत्र पर्याप्त नहीं मिल रहा था। इसके बाद संसाधन नहीं मिले थे। वहीं अब पिछले एक साल में यूनिट से सभी संसाधन मिल गए हैं। मगर यूनिट शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिला है। जिसकी वजह से कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू नहीं हो पाई। अभी अधिकारी निरीक्षण करने में ही लगे हुए हैं। यूनिट शुरू नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- निजी रक्तकोष प्लेटलेट्स और जंबो पैक के ले रहे मनमाने पैसे
जुलाई से लेकर से अक्तूबर तक बुखार का अधिक प्रकोप रहता है। जिसकी वजह से लोगों की प्लेटलेट्स कम होने की समस्या आती है। निजी रक्तकोष मरीजों से मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। प्लेटलेट्स के एक हजार रुपये तक, जबकि जंबो पैक के 15 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। जिससे मरीजों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकारी अस्पताल में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट बनने से मरीजों पैसे बहुत कम खर्च होगा।
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- हर साल हजारों लोगों की पड़ती है प्लेटलेट्स की जरूरत
जिले में हर साल हजाराें मरीजों को प्लेटलेट्स और जंबो पैक की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं होने पर तीमारदार निजी रक्तकोष से अधिक दामों पर प्लेटलेट्स और जंबो पैक लेते हैं। यूनिट शुरू होने पर थोड़ा समय लगेगा।
- वर्जन :
कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस के लिए फाइनल निरीक्षण नौ दिसंबर को हो गया है। जल्द ही लाइसेंस मिलने की उम्मीद की जा रही है। जिला अस्पताल में यूनिट शुरू होने से मरीजों को काफी फायदा होगा। - डॉ. संजय शंकर, ब्लड बैंक अधिकारी, जिला अस्पताल, बिजनौर
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- एक साल पहले ब्लड बैंक में आए यूनिट शुरू करने के संसाधन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। लोगों को अभी भी प्लेटलेट्स और जंबो पैक के लिए निजी रक्तकोष के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पिछले करीब पांच सालों से जिला अस्पताल स्थित रक्तकोष में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू करने की प्रक्रिया चल रही हैं। मगर अभी यूनिट शुरू करने का लाइसेंस नहीं मिल है। जिसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल को एक अप्रैल 2023 से महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज में संबद्ध कर दिया गया है। जिसके बाद से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की टीम के लिए कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट प्राथमिकता में है। मगर अभी तक यह यूनिट शुरू नहीं हो पाई है। यूनिट शुरू करने के लिए पहले तो क्षेत्र पर्याप्त नहीं मिल रहा था। इसके बाद संसाधन नहीं मिले थे। वहीं अब पिछले एक साल में यूनिट से सभी संसाधन मिल गए हैं। मगर यूनिट शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिला है। जिसकी वजह से कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट शुरू नहीं हो पाई। अभी अधिकारी निरीक्षण करने में ही लगे हुए हैं। यूनिट शुरू नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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- निजी रक्तकोष प्लेटलेट्स और जंबो पैक के ले रहे मनमाने पैसे
जुलाई से लेकर से अक्तूबर तक बुखार का अधिक प्रकोप रहता है। जिसकी वजह से लोगों की प्लेटलेट्स कम होने की समस्या आती है। निजी रक्तकोष मरीजों से मनमाने पैसे वसूल रहे हैं। प्लेटलेट्स के एक हजार रुपये तक, जबकि जंबो पैक के 15 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। जिससे मरीजों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकारी अस्पताल में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट बनने से मरीजों पैसे बहुत कम खर्च होगा।
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- हर साल हजारों लोगों की पड़ती है प्लेटलेट्स की जरूरत
जिले में हर साल हजाराें मरीजों को प्लेटलेट्स और जंबो पैक की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं होने पर तीमारदार निजी रक्तकोष से अधिक दामों पर प्लेटलेट्स और जंबो पैक लेते हैं। यूनिट शुरू होने पर थोड़ा समय लगेगा।
- वर्जन :
कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस के लिए फाइनल निरीक्षण नौ दिसंबर को हो गया है। जल्द ही लाइसेंस मिलने की उम्मीद की जा रही है। जिला अस्पताल में यूनिट शुरू होने से मरीजों को काफी फायदा होगा। - डॉ. संजय शंकर, ब्लड बैंक अधिकारी, जिला अस्पताल, बिजनौर