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मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी जागरूकता जरूरी : अंजनी अनुज
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सीसीएसयू में एक दिवसीय मानवाधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मानवाधिकारों की रक्षा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज में संवैधानिक मूल्यों, कानूनी अधिकारों और मानवीय गरिमा के प्रति जागरूकता जरूरी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएं इन अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली के प्रेजेंटिंग ऑफिसर अंजनी अनुज ने वह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के सेमिनार हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सहयोग से हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अंजनी अनुज, विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. बीरपाल सिंह, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के कोऑर्डिनेटर डॉ. विवेक कुमार और कार्यक्रम संयोजक आशीष कौशिक मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि अंजनी अनुज ने नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों तथा सामूहिक अधिकारों की जानकारी दी। प्रो. बीरपाल सिंह ने मानवाधिकार और शोध के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का शोध समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी होना चाहिए। संसद टीवी के श्री रामवीर श्रेष्ठ ने मानवाधिकारों के संवैधानिक आधार की जानकारी दी। डॉ. विवेक कुमार ने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा को केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। डॉ. अपेक्षा चौधरी, डॉ. सुदेशना और डॉ. विकास कुमार ने विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया। कार्यक्रम में डॉ. कुसुमा वती, डॉ. धनपाल, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. सुशील कुमार शर्मा, डॉ. मीनाक्षी समेत शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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मेरठ। मानवाधिकारों की रक्षा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज में संवैधानिक मूल्यों, कानूनी अधिकारों और मानवीय गरिमा के प्रति जागरूकता जरूरी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएं इन अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली के प्रेजेंटिंग ऑफिसर अंजनी अनुज ने वह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के सेमिनार हॉल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सहयोग से हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अंजनी अनुज, विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. बीरपाल सिंह, इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के कोऑर्डिनेटर डॉ. विवेक कुमार और कार्यक्रम संयोजक आशीष कौशिक मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि अंजनी अनुज ने नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों तथा सामूहिक अधिकारों की जानकारी दी। प्रो. बीरपाल सिंह ने मानवाधिकार और शोध के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का शोध समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी होना चाहिए। संसद टीवी के श्री रामवीर श्रेष्ठ ने मानवाधिकारों के संवैधानिक आधार की जानकारी दी। डॉ. विवेक कुमार ने कहा कि मानवाधिकार शिक्षा को केवल पुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। डॉ. अपेक्षा चौधरी, डॉ. सुदेशना और डॉ. विकास कुमार ने विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया। कार्यक्रम में डॉ. कुसुमा वती, डॉ. धनपाल, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. सुशील कुमार शर्मा, डॉ. मीनाक्षी समेत शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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