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ज्ञान का सही प्रयोग करना सीखो : भावभूषण महाराज
Thu, 26 Mar 2026 02:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:47 AM IST
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति व समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 46वें दिन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ किया।
इस दौरान स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अरुण जैन व सुबोध जैन और शांति धारा करने का सौभाग्य प्रदीप जैन, शिवम व सचिन जैन को मिला। दीप प्रज्ज्वलन राकेश जैन, सुनीता जैन और सीमा जैन ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने विश्व के सभी जीवों के सुखी रहने की मंगल भावना के साथ शांति धारा का वाचन किया।
इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजन व आदिनाथ भगवान की आराधना की गई। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित करने के बाद भक्तामर विधान शुरू हुआ। इसमें 131 परिवारों की ओर से 48 अर्घ्य अर्पित कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
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इस दौरान गुरुवर 108 भावभूषण महाराज ने कहा कि ज्ञान सभी के पास होता है, लेकिन उसका सही प्रयोग करना हर किसी को नहीं आता। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह सीखना चाहिए कि कब, कहां और कितना बोलना है। मधुर वाणी जहां गीत का रूप ले लेती है। वहीं, कर्कश वाणी विवाद का कारण बनती है। कार्यक्रम के अंत में विधान का विसर्जन काजल जैन व संजय जैन ने किया। पंच परमेष्ठी, आदिनाथ भगवान एवं चौबीसों तीर्थंकरों की आरती विभिन्न श्रद्धालुओं द्वारा संपन्न हुई। प्रश्नमंच के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्रीय पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
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इस दौरान स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य अरुण जैन व सुबोध जैन और शांति धारा करने का सौभाग्य प्रदीप जैन, शिवम व सचिन जैन को मिला। दीप प्रज्ज्वलन राकेश जैन, सुनीता जैन और सीमा जैन ने किया। ब्रह्मचारिणी सुनीता दीदी ने विश्व के सभी जीवों के सुखी रहने की मंगल भावना के साथ शांति धारा का वाचन किया।
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इसके बाद देव-शास्त्र-गुरु पूजन व आदिनाथ भगवान की आराधना की गई। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य समर्पित करने के बाद भक्तामर विधान शुरू हुआ। इसमें 131 परिवारों की ओर से 48 अर्घ्य अर्पित कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
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इस दौरान गुरुवर 108 भावभूषण महाराज ने कहा कि ज्ञान सभी के पास होता है, लेकिन उसका सही प्रयोग करना हर किसी को नहीं आता। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह सीखना चाहिए कि कब, कहां और कितना बोलना है। मधुर वाणी जहां गीत का रूप ले लेती है। वहीं, कर्कश वाणी विवाद का कारण बनती है। कार्यक्रम के अंत में विधान का विसर्जन काजल जैन व संजय जैन ने किया। पंच परमेष्ठी, आदिनाथ भगवान एवं चौबीसों तीर्थंकरों की आरती विभिन्न श्रद्धालुओं द्वारा संपन्न हुई। प्रश्नमंच के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्रीय पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।