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एआई से सीखे संगीत और गजल में नहीं होती रूह : हुसैन बंधु

Tue, 31 Mar 2026 03:07 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 03:07 AM IST
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Learn music from AI and ghazals have no soul: Hussain brothers
सुभारती विश्वविद्यालय पहुंचे विश्व प्रसिद्ध गजल गायक और पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन एवं मोहम्मद हुसैन ने संगीत, संस्कृति और तकनीक के समन्वय पर बेबाक राय रखी। संवाद न्यूज एजेंसी से विशेष बातचीत में हुसैन बंधुओं ने दो टूक कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से आप सुर तो मिला सकते हैं लेकिन उसमें वह फील और रूह पैदा नहीं की जा सकती जो एक कलाकार के भीतर होती है।
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हुसैन बंधुओं ने आधुनिक पीढ़ी (जेन-जी) के सीखने के तरीकों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को घर पर पैसे देकर संगीत सिखाने से वे निपुण नहीं हो रहे हैं। संगीत और रियाज के लिए एक निश्चित स्थान, एकेडमी और परंपराओं से जुड़ना अनिवार्य है। उन्होंने कहा गुरु से सीखना सिर्फ इल्म हासिल करना नहीं है बल्कि उनका दिल जीतना पड़ता है।
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एआई और रैप-रीमिक्स पर तीखे प्रहार

आज के दौर में बढ़ रहे एआई के इस्तेमाल और रैप/रीमिक्स संस्कृति पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, जैसे हर भाषा की ग्रामर होती है वैसे ही संगीत की भी एक ग्रामर है। बिना शिक्षा और अभ्यास के एआई से गाने बनाना वैसा ही है जैसे आपने सिर्फ आउटलाइन खींच ली और उसे प्रोडक्ट कह दिया। असली स्केच सीखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चाहे रैप हो या कोई एप अगर उसमें खूबी और गहराई नहीं है तो वह कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। सोशल मीडिया और एआई कभी भी गुरु का स्थान नहीं ले सकते।
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भाईचारे और रिश्तों की मिसाल

दशकों से एक साथ गा रहे दोनों भाइयों ने अपनी अटूट बॉन्डिंग का श्रेय अपने खानदान के संस्कारों और माता-पिता की ट्रेनिंग को दिया। उन्होंने कहा, हमारे पिताजी ने सिखाया था कि अगर किसी एक की भी तारीफ हो तो वह हम दोनों की तारीफ है। जीवन में संतुष्टि और आपसी समझ ही हमें करीब रखे हुए है।

नफरत फैलाने वालों को शायरी से जवाब

देश के मौजूदा हालातों और सांप्रदायिक सद्भाव पर पूछे गए सवाल का हुसैन बंधुओं ने बेहद दार्शनिक और शायराना अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सबके रास्ते अलग हैं लेकिन ठिकाना तो एक ही है। मंजिल हर एक शख्स को पाना तो एक है।
उन्होंने समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे ऐसी चीजें पेश करें जिससे आने वाली पीढ़ी पर खतरा न हो। उन्होंने संदेश दिया कि अंत में सबको या तो दफनाया जाना है या जलाया जाना है इसलिए नफरत की जगह प्यार की लहरें बांटना ज्यादा बेहतर है।

युवाओं और अभिभावकों को संदेश

हुसैन बंधुओं ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे भारत में रहते हैं, जहां भाईचारा और साथ निभाने की परंपरा आज भी जिंदा है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति पर गर्व करने और उसे बिना किसी शर्म के अपनाने का आह्वान किया। साथ ही, माता-पिता से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को अपनी जड़ों और महान संस्कृति के प्रति प्रेरित करें।
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