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केमिकलों से मिलेगा छुटकारा, छत पर उगेगी सेहत की सब्जी
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 12 Apr 2016 02:20 AM IST
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अब आपको केमिकल युक्त सब्जी खाने से छुटकारा मिल जाएगा। शुद्ध और ताजी सब्जी का स्वाद ले सकेंगे। शहरवासी खुद अपनी छतों पर सब्जी उगा सकेंगे। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (आईएफएसआर) के सहयोग से यह संभव होगा। लोगों की सेहत और घटती कृषि योग्य भूमि को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है। बीज से लेकर छत को फसल उगाने लायक बनाने तक की जिम्मेदारी विभाग की होगी। इसके लिए विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है। अगले तीन से चार माह में योजना शुरू कर दी जाएगी।
विभाग के अनुसार कम से कम 400 वर्ग फीट की छत पर मॉडल के रूप में किचन गार्डन तैयार किया जाएगा। इस गार्डन में मौसम के अनुसार सब्जियों को उगाया जाएगा। इसके लिए संस्थान के वैज्ञानिक लोगों को प्रशिक्षण देंगे। मॉडल के रूप में इन्हें विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने काम शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है जब लोग अपने घर में सब्जी उगाएंगे तो उस पर केमिकल का प्रयोग नहीं होगा। जिस कारण सब्जी की गुणवत्ता अच्छी होगी और वह सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
गोबर की खाद का होगा प्रयोग
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार घर पर जो गार्डन तैयार किया जाएगा उसमें किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इस गार्डन में जैविक और गोबर की खाद का प्रयोग किया जाएगा। शुरू में गार्डन में सबकुछ वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार होगा। बीज भी संस्थान के वैज्ञानिक ही उपलब्ध कराएंगे।
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ये होगा लाभ
सब्जी में किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं होगा।
लोगों को महंगी सब्जी खरीदने से छुटकारा मिलेगा।
अपनी पसंद की ताजा सब्जी लोग खा सकेंगे।
घर में पैदा हुई सब्जी अधिक गुणकारी होगी।
कृषि योग्य जमीन का प्रयोग अन्य फसलों में हो सकेगा।
खास तकनीक से तैयार होगा गार्डन
छत पर गार्डन बनाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए छत पर प्लास्टिक की एक खास पॉलिथीन बिछायी जाएगी। उसके ऊपर मिट्टी डाली जाएगी। इस मिट्टी में ही गोबर और जैविक खाद मिलाए जाएंगे। पॉलिथीन के कारण छत में नमी नहीं होगी। सब्जी के अलावा फूलों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
हम कोशिश कर रहे हैं कि लोग खुद की सब्जी उगा सकें। खासतौर पर शहरी क्षेत्र में इस प्रोग्राम को फैलाने की कोशिश की जा रही है। इससे सब्जी की कीमतें में भी कंट्रोल होंगी और सेहत भी ठीक रहेगी। वर्तमान में आ रही सब्जियों में केमिकल का अधिक प्रयोग किया जा रहा है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। शुरुआत में 100 लोगों के घर खेती कराई जाएगी। - डॉ. एएस पंवार, आईएफएसआर निदेशक
ऐसे करें संपर्क
विभाग ने योजना के नोडल अधिकारी डॉ. दुष्यंत को बनाया है। इच्छुक लोग भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं।
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विभाग के अनुसार कम से कम 400 वर्ग फीट की छत पर मॉडल के रूप में किचन गार्डन तैयार किया जाएगा। इस गार्डन में मौसम के अनुसार सब्जियों को उगाया जाएगा। इसके लिए संस्थान के वैज्ञानिक लोगों को प्रशिक्षण देंगे। मॉडल के रूप में इन्हें विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने काम शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है जब लोग अपने घर में सब्जी उगाएंगे तो उस पर केमिकल का प्रयोग नहीं होगा। जिस कारण सब्जी की गुणवत्ता अच्छी होगी और वह सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।
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गोबर की खाद का होगा प्रयोग
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार घर पर जो गार्डन तैयार किया जाएगा उसमें किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इस गार्डन में जैविक और गोबर की खाद का प्रयोग किया जाएगा। शुरू में गार्डन में सबकुछ वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार होगा। बीज भी संस्थान के वैज्ञानिक ही उपलब्ध कराएंगे।
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ये होगा लाभ
सब्जी में किसी तरह के केमिकल का प्रयोग नहीं होगा।
लोगों को महंगी सब्जी खरीदने से छुटकारा मिलेगा।
अपनी पसंद की ताजा सब्जी लोग खा सकेंगे।
घर में पैदा हुई सब्जी अधिक गुणकारी होगी।
कृषि योग्य जमीन का प्रयोग अन्य फसलों में हो सकेगा।
खास तकनीक से तैयार होगा गार्डन
छत पर गार्डन बनाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए छत पर प्लास्टिक की एक खास पॉलिथीन बिछायी जाएगी। उसके ऊपर मिट्टी डाली जाएगी। इस मिट्टी में ही गोबर और जैविक खाद मिलाए जाएंगे। पॉलिथीन के कारण छत में नमी नहीं होगी। सब्जी के अलावा फूलों के पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
हम कोशिश कर रहे हैं कि लोग खुद की सब्जी उगा सकें। खासतौर पर शहरी क्षेत्र में इस प्रोग्राम को फैलाने की कोशिश की जा रही है। इससे सब्जी की कीमतें में भी कंट्रोल होंगी और सेहत भी ठीक रहेगी। वर्तमान में आ रही सब्जियों में केमिकल का अधिक प्रयोग किया जा रहा है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। शुरुआत में 100 लोगों के घर खेती कराई जाएगी। - डॉ. एएस पंवार, आईएफएसआर निदेशक
ऐसे करें संपर्क
विभाग ने योजना के नोडल अधिकारी डॉ. दुष्यंत को बनाया है। इच्छुक लोग भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं।