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महापंचायत: तमिलनाडु के किसान भी होंगे शामिल, नंजूदास्वामी बोले-आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ रहे किसान
Sat, 04 Sep 2021 01:18 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 04 Sep 2021 01:18 PM IST
सार
कर्नाटक राज्य रैयत संघ कोर कमेटी सदस्य चुक्की नंजूदास्वामी ने कहा कि किसान आंदोलन अब जनांदोलन बन चुका है, जिसकी अगुवाई किसान कर रहे हैं। ये आजादी की दूसरी लड़ाई है, जिसे किसान हर हाल में जीतेगा।
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कर्नाटक और तमिलनाडू के किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ जातीं नंजूदास्वामी। (लाल सूट में)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुजफ्फरनगर में कल होने वाली किसान महापंचायत में कर्नाटक तक के किसान शामिल होंगे। शुक्रवार को महापंचायत के लिए निकले कर्नाटक राज्य रैयत संघ कोर कमेटी सदस्य चुक्की नंजूदास्वामी ने कहा कि किसान आंदोलन अब जनांदोलन बन चुका है, जिसकी अगुवाई किसान कर रहे हैं। ये आजादी की दूसरी लड़ाई है, जिसे किसान हर हाल में जीतेगा।
नंजूदास्वामी शुक्रवार को कर्नाटक और तमिलनाडू के किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुजफ्फरनगर महापंचायत में शामिल होने के लिए जा रही थीं। मोदीपुरम स्थित बीकानेरवाला रेस्टोरेंट पर उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान बताया कि अब किसान आंदोलन तीन कृषि कानूनों का नहीं रहा, बल्कि इससे कहीं आगे निकल गया है।
कहा कि अब यह आंदोलन सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों से लेकर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का आंदोलन बन गया है। जिस तरह से किसानों ने स्वतंत्रता आंदोलन की अगुवाई की थी, उसी तरह अब किसान एक बार फिर से आर्थिक और सामाजिक आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। नंजूदास्वामी ने कहा कि सरकार तानाशाह की तरह व्यवहार कर रही है। सरकार कंपनियों, पूंजीपतियों की नीतियों पर अमल करने के लिए किसानों पर बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हट रही है। ब्यूरो
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अभी लंबा चलेगा किसान आंदोलन
चुक्की नंजूदास्वामी ने कहा कि आंदोलन अभी लंबा चलेगा। जब तक किसान जीतेंगे नहीं तब तक पीछे नहीं हटेंगे। कर्नाटक के किसानों की हालत के बारे में पूछने पर कहा कि वहां का भी गन्ना और धान का किसान बदहाल है। राज्य की चीनी मिलों पर निजी और राजनैतिक घरानों का वर्चस्व है। पिछले दो साल से किसानों को बकाया भुगतान तक नहीं हुआ है। एमएसपी को गारंटी कानून बनाने पर आंदोलन वापस होने के सवाल पर कहा कि हमें वर्तमान में दी जा रही एमएसपी नहीं स्वामीनाथन आयोग वाली सी-2 प्लस फार्मूले वाली एमएसपी मंजूर है, जिसमें किसान और उसके परिवार की लेबर भी जुड़ी होती है। जब तक किसानों को इज्जत नहीं मिलेेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
चुनावी अवस्था में न आएं दल
संयुक्त किसान मोर्चा ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अभी चुनावी अवस्था में न आएं। आमतौर पर प्रचार-प्रसार चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू होता है, लेकिन कुछ दल बिना किसी कारण के ही चुनाव अवस्था में आ रहे हैं। इससे केवल यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह एक किसान विरोधी साजिश है, जो किसानों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए रची जा रही है। किसान महापंचायत की तैयारियां अंतिम चरण में है। यहां से ही संयुक्त किसान मोर्चा के मिशन उत्तर प्रदेश की शुरुआत होगी।
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नंजूदास्वामी शुक्रवार को कर्नाटक और तमिलनाडू के किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुजफ्फरनगर महापंचायत में शामिल होने के लिए जा रही थीं। मोदीपुरम स्थित बीकानेरवाला रेस्टोरेंट पर उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान बताया कि अब किसान आंदोलन तीन कृषि कानूनों का नहीं रहा, बल्कि इससे कहीं आगे निकल गया है।
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कहा कि अब यह आंदोलन सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों से लेकर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का आंदोलन बन गया है। जिस तरह से किसानों ने स्वतंत्रता आंदोलन की अगुवाई की थी, उसी तरह अब किसान एक बार फिर से आर्थिक और सामाजिक आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। नंजूदास्वामी ने कहा कि सरकार तानाशाह की तरह व्यवहार कर रही है। सरकार कंपनियों, पूंजीपतियों की नीतियों पर अमल करने के लिए किसानों पर बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हट रही है। ब्यूरो
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अभी लंबा चलेगा किसान आंदोलन
चुक्की नंजूदास्वामी ने कहा कि आंदोलन अभी लंबा चलेगा। जब तक किसान जीतेंगे नहीं तब तक पीछे नहीं हटेंगे। कर्नाटक के किसानों की हालत के बारे में पूछने पर कहा कि वहां का भी गन्ना और धान का किसान बदहाल है। राज्य की चीनी मिलों पर निजी और राजनैतिक घरानों का वर्चस्व है। पिछले दो साल से किसानों को बकाया भुगतान तक नहीं हुआ है। एमएसपी को गारंटी कानून बनाने पर आंदोलन वापस होने के सवाल पर कहा कि हमें वर्तमान में दी जा रही एमएसपी नहीं स्वामीनाथन आयोग वाली सी-2 प्लस फार्मूले वाली एमएसपी मंजूर है, जिसमें किसान और उसके परिवार की लेबर भी जुड़ी होती है। जब तक किसानों को इज्जत नहीं मिलेेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
चुनावी अवस्था में न आएं दल
संयुक्त किसान मोर्चा ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अभी चुनावी अवस्था में न आएं। आमतौर पर प्रचार-प्रसार चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू होता है, लेकिन कुछ दल बिना किसी कारण के ही चुनाव अवस्था में आ रहे हैं। इससे केवल यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह एक किसान विरोधी साजिश है, जो किसानों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए रची जा रही है। किसान महापंचायत की तैयारियां अंतिम चरण में है। यहां से ही संयुक्त किसान मोर्चा के मिशन उत्तर प्रदेश की शुरुआत होगी।