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Meerut News: बाढ़ के बाद मुश्किल में खादर के किसान
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बाढ़ के लतीफपुर के जंगल में मौजूद खतों में भरा पानी स्रोत संवाद
खेत में नमी के कारण नहीं कर पा रहे गेहूं की बुवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में बाढ़ के बाद निचले इलाकों में मौजूद किसानों के खेतों में गेहूं की बुवाई नहीं हो पा रही है। इससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ खादर क्षेत्र के लोगों के लिए तबाही का पैगाम लेकर आती है। बरसात में उनकी तैयार फसल नष्ट हो जाती है तो वहीं दूसरी ओर वह समय पर अपनी फसलों की बुवाई नहीं कर पाते हैं। इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
किशनपुर निवासी किसान जगतार सिंह व तारा सिंह ने बताया कि अगस्त-सितंबर माह में आई बाढ़ के कारण उनके खेतों में खड़ी धान की लाखों रुपये की फसल नष्ट हो गई। वहीं गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है। बाढ़ समाप्त होने के बाद वह एक महीने से खेतों को गेहूं की फसल बोने के लिए तैयार कर रहे हैं परंतु खेतों में जुताई के समय पानी निकल रहा है। ऐसे में अभी 15 दिन तक गेहूं की फसल बोना संभव नहीं है। उसके बाद गेहूं की फसल लेट हो जाएगी।
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उन्होंने बताया कि खादर क्षेत्र के सैकड़ों ऐसे किसान हैं जिनके सामने यह स्थिति बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आज तक बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण खादर क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित होती जा रही है। खादर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अभी उन्हें बाढ़ में नष्ट हुई फसलों का मुआवजा भी नहीं मिला है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में बाढ़ के बाद निचले इलाकों में मौजूद किसानों के खेतों में गेहूं की बुवाई नहीं हो पा रही है। इससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ खादर क्षेत्र के लोगों के लिए तबाही का पैगाम लेकर आती है। बरसात में उनकी तैयार फसल नष्ट हो जाती है तो वहीं दूसरी ओर वह समय पर अपनी फसलों की बुवाई नहीं कर पाते हैं। इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
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किशनपुर निवासी किसान जगतार सिंह व तारा सिंह ने बताया कि अगस्त-सितंबर माह में आई बाढ़ के कारण उनके खेतों में खड़ी धान की लाखों रुपये की फसल नष्ट हो गई। वहीं गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है। बाढ़ समाप्त होने के बाद वह एक महीने से खेतों को गेहूं की फसल बोने के लिए तैयार कर रहे हैं परंतु खेतों में जुताई के समय पानी निकल रहा है। ऐसे में अभी 15 दिन तक गेहूं की फसल बोना संभव नहीं है। उसके बाद गेहूं की फसल लेट हो जाएगी।
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उन्होंने बताया कि खादर क्षेत्र के सैकड़ों ऐसे किसान हैं जिनके सामने यह स्थिति बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आज तक बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण खादर क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार प्रभावित होती जा रही है। खादर क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अभी उन्हें बाढ़ में नष्ट हुई फसलों का मुआवजा भी नहीं मिला है।