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स्वाभिमान और संस्कृति को जिंदा रखना ही कर्तव्य : गोवर्धन भाई झडपिया

Fri, 04 Apr 2025 10:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 10:51 PM IST
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Keeping self-respect and culture alive is our duty: Govardhan Bhai Jhadpiya
- क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल की जन्मस्थली गांव पांचली खुर्द में हुआ राष्ट्रीय प्रबुद्ध बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल की जन्मस्थली गांव पांचली खुर्द में तस्वीर सिंह चपराना के आवास पर शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रबुद्ध बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि गुजरात सरकार के पूर्व गृहमंत्री गोवर्धन भाई झडपिया ने कहा कि देश सही इतिहास लिखा जाना चाहिए। यदि सही इतिहास लिखा गया तो क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल जैसे अनेक क्रांतिकारियों को इतिहास में वह स्थान मिलेगा, जिसके वह हकदार हैं।
उन्होंने कहा है कि दुनिया में भारत के सिवाय ऐसा कोई देश नहीं है, जो अपनी भूमि को माता कहता है। भारत का स्वाभिमान और संस्कृति को जिंदा रखना ही हमारा कर्तव्य है। भारत धनसिंह कोतवाल जैसे वीरों के कारण आजाद हुआ है। यह स्वाभिमान का विषय है कि भारत के वीरों ने कभी पीठ नहीं दिखाई। हमें यदि विद्यालयों में शिक्षा सीखनी है तो अंग्रेजी शिक्षा सीखें, लेकिन अंग्रेजीयत में न आएं। सरकार से मांग की जाएगी कि धनसिंह कोतवाल के नाम पर किसी सड़क का नामकरण हो ताकि उस क्रांतिकारी को नमन करने के लिए एक यादगार रहे।
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अति विशिष्ट अतिथि सतीश भाई पटेल ने कहा कि सामाजिक समरसता और आर्थिक उत्थान के लिए एक नए आर्थिक मॉडल पर काम करना होगा। यह नया आर्थिक मॉडल ही युवाओं को रोजगार देने का कार्य करेगा। युवाओं को रोजगार से जोड़ना सच्ची सामाजिकता है और सच्ची देशभक्ति है। कार्यक्रम के अध्यक्ष अंतराम तंवर ने कहा कि सामाजिक समरसता भारतीयता की पहचान है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति में दिल्ली के गांव भी धन सिंह कोतवाल के साथ मिलकर लड़े थे। 1857 की क्रांति में धन सिंह कोतवाल के आह्वान पर तिगरी गांव के क्रांतिवीरों ने भी प्राणों की आहुति दी थी।
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संगोष्ठी के संयोजक धनसिंह कोतवाल के प्रपोत्र तस्वीर सिंह चपराना ने बताया कि बाबा धनसिंह कोतवाल ने 1857 की क्रांति में किस तरह से भारतीय सिपाहियों, जनता और पुलिस को एकजुट कर अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने का काम किया। दो जेलों को तोड़ा, जिसमें 836 कैदी बंद थे। धनसिंह कोतवाल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब सरकार किसी विश्वविद्यालय का नाम धन सिंह कोतवाल के नाम पर रखे। संगोष्ठी में डॉ. कलम सिंह, रामपाल सिंह पूर्व प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय महामंत्री सपा नीरज पाल, प्रधानाचार्य देशपाल, प्रधानाचार्य संजीव नागर, बले सिंह, कैप्टन सुभाष चंद्र ने भी विचार रखे। संगोष्ठी में जिला कमांडेंट वेदपाल, वेद प्रकाश, राजबल सिंह, जगत दोसा, सचिन अंबावता, लव कुमार कुंडा, रॉबिन गुर्जर, इंजीनियर सुरेंद्र सिंह, अध्यक्ष चमन सिंह, सुभाष चंद्र आदि मौजूद रहे।
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