{"_id":"6735236b19f124b5bf0ef6c6","slug":"kartik-purnima-floods-in-ganga-bathing-fair-kithor-news-c-73-1-smrt1028-103182-2024-11-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में सैलाब उमड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में सैलाब उमड़ा
विज्ञापन
गंगा किनारे कबड्डी खेतते युवा स्रोत संवाद
माछरा। गढ़मुक्तेश्वर में खादर क्षेत्र में लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में जाने वाले स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ रहा है। मेरठ-गढ़ मार्ग के रास्ते ट्रैक्टर ट्राॅली और भैंसा बुग्गी आदि में सवार होकर श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं।
गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला पश्चिम उत्तर प्रदेश का सबसे बड़े मेलों में से एक है। पहले लोग इसे लक्खी मेला के नाम से जानते थे। पहले यह मेला केवल गढ़मुक्तेश्वर मे गंगा किनारे रेती में लगता था, परंतु अब गंगा किनारे कई स्थानों पर यह मेला लगने लगा है।
बुजुर्ग राजेंद्रनाथ शर्मा, बालकिशोर त्यागी आदि बताते है कि गंगा स्नान जाने के लिए लोग महीनों पहले तैयारी शुरू कर देते थे। श्याम सिंह, लाल सिंह त्यागी, मुखिया गुर्जर आदि बताते हैं कि पहले बैलगाड़ी में पूरा परिवार गंगा स्नान के लिए जाता था। घर के सदस्य नौकरी से छुट्टी लेकर गंगा स्नान मेले में जाते थे। गांव के सभी लोग गंगा की रेती में एक जगह डेरा डालकर रहते थे। यहां एक-दूसरे को अपने डेरे में बुलाकर नाश्ता, खाना आदि करते थे।
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर में नक्का कुआं एवं गंगा मंदिर के समीप गंगा की धार बहती थी। अब गंगा यहां से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर बहती है। गंगा स्नान में भारतीय संस्कृति की पुरानी झलक कम दिखाई देती है। बुजर्गों का कहना है कि नवयुवक श्रद्धा के साथ गंगा स्नान नहीं जाते हैं, इसलिए गंगा स्नान पिकनिक का रूप लेता जा रहा है।
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला पश्चिम उत्तर प्रदेश का सबसे बड़े मेलों में से एक है। पहले लोग इसे लक्खी मेला के नाम से जानते थे। पहले यह मेला केवल गढ़मुक्तेश्वर मे गंगा किनारे रेती में लगता था, परंतु अब गंगा किनारे कई स्थानों पर यह मेला लगने लगा है।
विज्ञापन
बुजुर्ग राजेंद्रनाथ शर्मा, बालकिशोर त्यागी आदि बताते है कि गंगा स्नान जाने के लिए लोग महीनों पहले तैयारी शुरू कर देते थे। श्याम सिंह, लाल सिंह त्यागी, मुखिया गुर्जर आदि बताते हैं कि पहले बैलगाड़ी में पूरा परिवार गंगा स्नान के लिए जाता था। घर के सदस्य नौकरी से छुट्टी लेकर गंगा स्नान मेले में जाते थे। गांव के सभी लोग गंगा की रेती में एक जगह डेरा डालकर रहते थे। यहां एक-दूसरे को अपने डेरे में बुलाकर नाश्ता, खाना आदि करते थे।
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर में नक्का कुआं एवं गंगा मंदिर के समीप गंगा की धार बहती थी। अब गंगा यहां से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर बहती है। गंगा स्नान में भारतीय संस्कृति की पुरानी झलक कम दिखाई देती है। बुजर्गों का कहना है कि नवयुवक श्रद्धा के साथ गंगा स्नान नहीं जाते हैं, इसलिए गंगा स्नान पिकनिक का रूप लेता जा रहा है।

गंगा किनारे कबड्डी खेतते युवा स्रोत संवाद