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Kargil Vijay Diwas: तोलोलिंग पर बागपत के बेटे ने दिखाया था अदम्य साहस, मरणोपरांत मिला  वीर चक्र

Sun, 26 Jul 2020 09:41 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 26 Jul 2020 09:41 AM IST
सार

  • सिरसली के सीने पर यशवीर सिंह का वीर चक्र 

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Kargil Vijay Diwas: veer chakr yashveer singh from Bagolpat showed indomitable courageat Tololing
kargil vijay diwas - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कारगिल की सबसे ऊंची चोटियों में शामिल तोलोलिंग पर बागपत जिले के सिरसली गांव के यशवीर तोमर की वीरता की कहानी लिखी थी। दुश्मन को मार भगाने वाले तोमर ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। फतेह के बाद दुश्मन के हमले में वह गंभीर घायल हुआ और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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सिरसली गांव के किसान गिरवर सिंह का बेटा यशवीर तोमर साल 1979 में सेना में भर्ती हुआ था। हवलदार मेजर यशवीर सिंह ने कारगिल की लड़ाई तोलोलिंग की चोटी पर लड़ी। पहाड़ी पर फतह कर तिरंगा लहराने वाले यशवीर सिंह उस वक्त घायल हुए थे, जब मोर्चे पर जीतकर वह लौट रहे थे। ग्रेनेड से हमले में गंभीर घायल हुए और उनकी मौत हो गई।
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शहादत पर सरकार ने उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया। उनकी पत्नी मुनेश देवी कहती हैं कि जो घोषणाएं सरकार ने की थी, वह पूरी हुई। पति खोने का गम भी है, लेकिन देश के लिए बलिदान पर गर्व भी होता है। ग्राम प्रधान राजू तोमर सिरसली का कहना है कि पूरे क्षेत्र के लिए यशवीर सिंह का बलिदान गौरवान्वित करने वाला है।
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 यह भी पढ़ें : Kargil Vijay Diwas: बेटों ने खून से लिखी बलिदान की अमर गाथा, मातृभूमि के लिए न्यौछावर की थी जान 

बेटे ने शहादत दी, सरकार ने नहीं दी जमीन
कारगिल की पिंपल पहाड़ी पर खेकड़ा कस्बे के राजेंद्र धामा ने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए थे। राजेंद्र की शहादत युवाओं को जोश से लबरेज कर देती हैं। पट्टी रामपुर निवासी मास्टर जय सिंह के बेटे राजेंद्र धामा जाट रेजीमेंट में साल 1988 में भर्ती हुए थे।

कारगिल में उनकी ड्यूटी पिंपल पहाड़ी पर थी। देश के लिए कुर्बानी दे दी। पिता जय सिंह कहते हैं कि सरकार ने सारी घोषणाएं पूरी की, लेकिन अभी तक जमीन देने का जो वायदा किया था, वह पूरा नहीं हुआ। शहीद का परिवार गाजियाबाद में रह रहा है। सरकार को जमीन का वायदा पूरा करना चाहिए।

इनका बलिदान भी अमर
ऑपरेशन रक्षक के दौरान जिले के बूढपुर गांव निवासी सुबोध तोमर, सूप निवासी देवेंद्र सिंह, ढिकाना निवासी नवाब सिंह, फखरपुर निवासी सेवेंद्र सिंह और काठा निवासी अनिल कुमार ने भी देश के लिए प्राण न्योछावर किए थे।

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