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कारगिल की जंग में मेरठ से भेजी गईं थी सेना की ये दो खास रेजीमेंट, जीतकर ऐसे फहराया था तिरंगा

Sat, 28 Jul 2018 11:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 28 Jul 2018 11:14 AM IST
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Kargil Vijay Diwas: Two regiments of Indian army deployed  to kargil from meerut
कारगिल विजय दिवस

26 जुलाई यानी 'कारगिल विजय दिवस' भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक है ये दिन। आइये हम आज के दिन उन जांबाजों को याद करें जो हंसते-हंसते मातृभूमि की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त हो गए। कारगिल की लड़ाई में 527 वीर जवान शहीद हुए थे। सेना के कई जवानों ने कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराने और दुश्मन का खात्मा करने के बाद ही शहादत पाई।

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इस जंग में मेरठ के रणबांकुरों ने भी अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया। मेरठ से सेना की दो रेजीमेंट खास तौर पर कारगिल हिल पर कब्जा करने के लिए रवाना की गईं। आइए जानते हैं कि आखिर कौन सी  दो रेजीमेंट्स जिन्होंने कारगिल जंग में अहम भूमिका निभाई :-

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  जब दुर्गम इलाके में हुनर दिखाने पहुंची 18 गढ़वाल राइफल्स

Kargil Vijay Diwas: Two regiments of Indian army deployed  to kargil from meerut
गढ़वाल राइफल्स का स्मारक

मई 1999 में पता चला कि पाकिस्तान के कारगिल में घुसपैठ कर ली है। इसके बाद सेना ने 'आपरेशन विजय' की कार्रवाई शुरू कर दी। जंग में भारतीय सेना के जवानों ने शौर्य और साहस का परिचय दिया। मेरठ में तैनात 18 गढ़वाल राइफल्स को कारगिल के द्रास सेक्टर में दुश्मन का खात्मा करने के लिए भेजा गया। 

पांच हजार फीट की ऊंचाई पर रेजीमेंट को करना था कब्जा
बटालियन को 19 जून की रात को प्वाइंट 5140 पर कब्जा करना था। दुर्गम पहाड़ियों की चोटियों पर यह कठिन कार्य था। बर्फीली हवा और दुर्गम इलाके की परवाह न करते हुऐ 18 गढ़वाल राइफल्स के वीर सैनिकों ने वीरता का परिचय देते हुए द्रास सेक्टर की दुर्गम चोटियों पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 22 जून 1999 को बटालियन को प्वाइंट 4700 से जक्षन प्वाइंट तक की चौकियों तक कब्जा करने का आदेश हुआ। प्वाइंट 4700 काफी दुर्गम था। लेकिन 18 गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने मुकाम को पूरा कर लिया। 

18 जवानों ने मातृभूमि के लिए त्याग दिए थे अपने प्राण
ऑपरेशन के दौरान 18 बहादुर जवानों ने अपनी मातृभूमि के लिये प्राणों का बलिदान दिया। इस अद्भुत साहसपूर्ण कार्य के लिए बटालियन को बैटल आनर द्रास और थियेटर ऑनर कारगिल से सम्मानित किया गया। बटालियन को इसके लिए 6 वीर चक्र, 2 सेना मेडल, 7 सेना मेडल, सात मेंशन इन डिस्पैच, 2 थल सेनाध्यक्ष प्रशंसा पत्र भी मिले। 

197 कारगिल रेजीमेंट ने लहराया जीत का परचम

Kargil Vijay Diwas: Two regiments of Indian army deployed  to kargil from meerut
कारगिल रेजीमेंट

मेरठ में तैनात 197 कारगिल रेजीमेंट ने कारगिल की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। माइनस पचास डिग्री तापमान वाले द्रास और कारगिल में ऑपरेशन विजय में रेजीमेंट के रणबांकुरों ने शौर्य, पराक्रम और वीरता का उदाहरण दिया। कारगिल जंग में 24 हजार दो सौ 39 गोले दागकर दुश्मन को नेस्तनाबूद कर दिया। तोलोलिंग, टाइगर हिल और प्वाइंट 5140 पर दुश्मन को तबाह कर दिया। 

जवानों के अदम्य साहस के लिए रेजीमेंट को मिले कई सम्मान
इस पराक्रम के लिए रेजीमेंट को 5 सेना मेडल, 1 मैन्सन इन डिस्पेच, 2 सेनाध्यक्ष प्रशंसा पत्र और 14 जीओसी इन सी प्रशंसा पत्र दिए गए। रेजीमेंट के सराहनीय कार्य के के लिए तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल पीवी मलिक ने 15 जनवरी 2000 को प्रशंसा पत्र भेंट किया तथा कारगिल युद्ध में किए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए रेजीमेंट को 17 जुलाई 2005 को ऑनर टाइटल कारगिल से नवाजा गया।  

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मेरठ के पांच जांबाज हुए थे शहीद 

Kargil Vijay Diwas: Two regiments of Indian army deployed  to kargil from meerut
मेडलों के साथ गढ़वाल राइफल्स

13 जून 1999 को कारगिल में तिरंगा लहराने के बाद शहीद हुए डिफेंस कालोनी निवासी वीर चक्र विजेता मेजर मनोज तलवार। कंकरखेड़ा के तेज विहार निवासी वीर चक्र विजेता सेकेंड राजपूत राइफल के हवलदार यशवीर सिंह कारगिल युद्ध में तोलोलिंग की चोटी पर शहीद हुए। जैदी कालोनी गली नंबर दो निवासी 22 ग्रेनेडियर में सिपाही जुबैर अहमद कारगिल में शहीद हुए। टाइगर हिल पर 17 दुश्मनों को मारकर शहीद हुए थे हस्तिनापुर निवासी सेना मेडल विजेता 18 ग्रेनेडियर के योगेंद्र सिंह यादव। तोलोलिंग में कंकरखेड़ा डिफेंस एन्क्लेव निवासी लांस नायक सत्यपाल सिंह शहीद हुए । 

दो महीने चली थी लड़ाई 
1999 में कारगिल की लड़ाई मई और जून दो महीने चली। इस जंग में भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाली जगहों पर हमला करके अपनी पोस्टों पर दोबारा से कब्जा किया। इस लड़ाई में 527 जवान शहीद हुए। 1,363 जवान घायल हुए थे।

 

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