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कपसाड़ कांड : आज मेडिकल परीक्षण के आदेश को जिला न्यायालय में चुनौती देगा प्रतिवादी पक्ष
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- कहा मार्कशीट के आधार पर होना चाहिए आयु का निर्णय
- किशोर न्याय बोर्ड के आदेश पर हो चुका है आरोपी के एक्सरे
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना (मेरठ)। कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी की आयु का असमंजस अब तक समाप्त नहीं हुआ है। किशोर न्याय बोर्ड ने आयु निर्धारण के लिए उसका मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसके बाद आरोपी के एक्सरे कराकर मेडिकल परीक्षण की भी शुरू कर दी गई है। अब प्रतिवादी पक्ष ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के खिलाफ शनिवार को जिला न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल करने का दावा किया है।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम का कहना है कि मेडिकल परीक्षण के आदेश को कानूनी आधारों पर चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 94 के तहत यदि स्कूल से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। उनका तर्क है कि मेडिकल परीक्षण के जरिए जन्मतिथि या वास्तविक आयु का सटीक निर्धारण करना भी हमेशा संभव नहीं माना जाता। आरोपी की कक्षा पांच और कक्षा दस के शैक्षणिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक समान दर्ज है। उसके आधार पर वह नाबालिग है। ऐसे में मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। हाल ही में आए प्रदीप कोहली बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्णय का भी हवाला न्यायालय में दिया जाएगा। उस मामले में कक्षा पांच और कक्षा दस के दस्तावेजों में उम्र अलग-अलग होने के बावजूद अदालत ने कक्षा दस के रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी थी।
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- किशोर न्याय बोर्ड के आदेश पर हो चुका है आरोपी के एक्सरे
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना (मेरठ)। कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी की आयु का असमंजस अब तक समाप्त नहीं हुआ है। किशोर न्याय बोर्ड ने आयु निर्धारण के लिए उसका मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसके बाद आरोपी के एक्सरे कराकर मेडिकल परीक्षण की भी शुरू कर दी गई है। अब प्रतिवादी पक्ष ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के खिलाफ शनिवार को जिला न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल करने का दावा किया है।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम का कहना है कि मेडिकल परीक्षण के आदेश को कानूनी आधारों पर चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 94 के तहत यदि स्कूल से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। उनका तर्क है कि मेडिकल परीक्षण के जरिए जन्मतिथि या वास्तविक आयु का सटीक निर्धारण करना भी हमेशा संभव नहीं माना जाता। आरोपी की कक्षा पांच और कक्षा दस के शैक्षणिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक समान दर्ज है। उसके आधार पर वह नाबालिग है। ऐसे में मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता नहीं है। हाल ही में आए प्रदीप कोहली बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्णय का भी हवाला न्यायालय में दिया जाएगा। उस मामले में कक्षा पांच और कक्षा दस के दस्तावेजों में उम्र अलग-अलग होने के बावजूद अदालत ने कक्षा दस के रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी थी।
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