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स्वर्ण सहित पांच स्थानों पर कलि का वास : आचार्य दुर्गेश
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- लालकुर्ती पंचमुखी हनुमान मंदिर में हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लालकुर्ती स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा हुई। कथा व्यास आचार्य दुर्गेश शास्त्री ने परीक्षित जन्म, राज्याभिषेक सहित अन्य प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित ने कलियुग को पांच स्थानों पर रहने की अनुमति दी। इसमें जुआ, शराब, वासना, हिंसा और स्वर्ण है।
आचार्य दुर्गेश शास्त्री ने बताया कि कलियुग को धन में स्थान दिया गया लेकिन यह वह धन है जो बेईमानी से अर्जित किया गया है। उन्होंने बताया कि कलियुग ने राजा परीक्षित से शरण मांगी क्योंकि युग परिवर्तन को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता है। ऐसे में पाबंदी लगाई गई और सीमित स्थान पर रहने का स्थान दिया। परीक्षित चाहते थे कि कि कलियुग का प्रभाव धरती पर पूरी तरह न फैले और धर्म का विनाश न हो।
कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के बाद हुआ। वह अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। उन्होंने बताया कि गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा ने परीक्षित को खत्म करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। भगवान कृष्ण के वरदान ने परीक्षित का जन्म हुआ। वह हस्तिनापुर के राजा बने और शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया। कथा श्रवण करने वालों में जगजीत सिंह, कविता, राकेश सिंह, ब्रजरानी सिंह, हरिनारायण दीक्षित, ऋषि राज शर्मा आदि रहे।
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मेरठ। लालकुर्ती स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा हुई। कथा व्यास आचार्य दुर्गेश शास्त्री ने परीक्षित जन्म, राज्याभिषेक सहित अन्य प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित ने कलियुग को पांच स्थानों पर रहने की अनुमति दी। इसमें जुआ, शराब, वासना, हिंसा और स्वर्ण है।
आचार्य दुर्गेश शास्त्री ने बताया कि कलियुग को धन में स्थान दिया गया लेकिन यह वह धन है जो बेईमानी से अर्जित किया गया है। उन्होंने बताया कि कलियुग ने राजा परीक्षित से शरण मांगी क्योंकि युग परिवर्तन को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता है। ऐसे में पाबंदी लगाई गई और सीमित स्थान पर रहने का स्थान दिया। परीक्षित चाहते थे कि कि कलियुग का प्रभाव धरती पर पूरी तरह न फैले और धर्म का विनाश न हो।
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कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के बाद हुआ। वह अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। उन्होंने बताया कि गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा ने परीक्षित को खत्म करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। भगवान कृष्ण के वरदान ने परीक्षित का जन्म हुआ। वह हस्तिनापुर के राजा बने और शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोक्ष को प्राप्त किया। कथा श्रवण करने वालों में जगजीत सिंह, कविता, राकेश सिंह, ब्रजरानी सिंह, हरिनारायण दीक्षित, ऋषि राज शर्मा आदि रहे।
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