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Meerut News: आखिरकार आठ साल बाद मिला न्याय, मां-बेटे के हत्यारों को मिली उम्रकैद

Sat, 25 Jul 2026 10:50 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 10:50 PM IST
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Justice finally served after eight years; mother-son duo's killers sentenced to life imprisonment.
सावित्री देवी हत्याकांड
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। आखिरकार पीड़ित परिवार को आठ साल बाद न्याय मिला। मृतका सावित्री देवी का बेटे मितन ने शनिवार को न्यायालय का फैसले सुनने के बाद नम आंखों से आसमान की ओर देखा। बेटे चेतन उर्फ भूरा के हत्यारों को सजा दिलाने की जिद मां सावित्री देवी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। पहले बेटे की हत्या हुई, फिर मुकदमे की पैरवी कर रही मां और उसके परिवार पर लगातार समझौते और गवाही बदलने का दबाव बनाया गया। जान से मारने की धमकियां मिली, कई बार पुलिस से सुरक्षा मांगी गई। लेकिन गवाही से ठीक तीन दिन पहले 3 फरवरी 2018 को सावित्री पर दिनदहाड़े गोलियां बरसा दी गई थी। तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया था। लगभग आठ साल तक चले मुकदमे के बाद शनिवार को अदालत ने पांच दोषियों अतुल, ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन और कुलदीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव हसनपुर रजापुर निवासी चेतन उर्फ भूरा की 17 जुलाई 2016 को गांव में बच्चों के क्रिकेट खेलने के विवाद के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में गांव के सुमित जाट, सुजीत कुमार समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि 50 हजार रुपये का इनामी सुमित जाट काफी समय तक फरार रहा। चेतन की हत्या में उसकी मां सावित्री देवी और भाई मितन गवाह थे। मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी तो दोनों पर गवाही न देने और समझौता करने का दबाव बनाया जाने लगा। परिवार का आरोप था कि आरोपी लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। लगातार मिल रही धमकियों के चलते मां- बेटे ने तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी से मिलकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। इसके बाद उन्हें एक गनर उपलब्ध कराया गया। मितन के अनुसार घटना से करीब 12 घंटे पहले ही सुरक्षा में तैनात गनर को यह कहकर वापस बुला लिया गया कि उसकी तबीयत खराब है। इसके बाद महिला और उनका परिवार बिना सुरक्षा के रह गया था।
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- गवाही से तीन दिन पहले बरसी थी गोलियां
चेतन हत्याकांड में 6 फरवरी 2018 को अदालत में गवाही होनी थी। इससे तीन दिन पहले 3 फरवरी 2018 की सुबह करीब 10:15 बजे सावित्री देवी अपने बेटों मितन और रवि के साथ गांव के प्रधान बिल्लू के खेत में गन्ना छील रही थी। उसी दौरान विपिन, सुजीत, अतुल, ब्रह्मा, कुलदीप और उनके अन्य साथी वहां पहुंचे और अवैध हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। आरोपियों की गोलाबारी में सावित्री सिर में गोली लगने से घायल हो गई थी। तीन दिन बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई थी।
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-13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने 24 मार्च 2018 को 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी सुजीत की मौत हो गई, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अतुल, ब्रह्मा उर्फ राज आर्यन, जगबीर, विपिन और कुलदीप को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, जगपाल, संजय, अशोक, अंकित, मोंटी, मोहन और सुमित को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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