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Meerut News: गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए 401 लीटर जल लाया जतिन भोला
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गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए कांवड ला रहा है परीक्षितगढ निवासी जतिन। (मवाना)
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना (मेरठ)। मवाना से हरिद्वार तक दंडवत यात्रा (जमीन पर लेटकर) पूरी करने वाले परीक्षितगढ़ निवासी जतिन शनिवार को 401 लीटर गंगाजल के साथ मवाना पहुंचे। जतिन ने गोमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की मनोकामना के साथ यह कठिन भक्ति यात्रा पूरी की है।
जतिन ने अटूट श्रद्धा, कठिन साधना और एक विशेष राष्ट्रीय संदेश के साथ अपनी अनूठी कांवड़ यात्रा पूरी की है। जतिन ने 11 जुलाई को मवाना से लेटकर यात्रा शुरू की और 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंच गया। फिर हरिद्वार से 29 जुलाई को 401 लीटर गंगाजल लेकर चला और रविवार 8 अगस्त को मवाना पहुंचा, जहां स्थानीय लोगों ने उसका जोरदार स्वागत किया। भीषण गर्मी, शारीरिक थकावट और पथरीली राहों के बावजूद जतिन का मनोबल अंत तक नहीं डगमगाया।
जतिन की इस कठिन भक्ति यात्रा के पीछे एक बड़ा और पवित्र उद्देश्य छिपा है। उसका कहना है कि वह इतनी भारी कांवड़ और यह कठिन दंडवत यात्रा केवल इसलिए कर रहा है ताकि भगवान भोलेनाथ उसकी प्रार्थना स्वीकार करें और देश में गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा प्राप्त हो। गोमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वह पूरे भारतीय समाज और संस्कृति की जीवनदायिनी धारा हैं। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से उसने इस अत्यंत कठिन भक्ति मार्ग को चुना।
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मवाना (मेरठ)। मवाना से हरिद्वार तक दंडवत यात्रा (जमीन पर लेटकर) पूरी करने वाले परीक्षितगढ़ निवासी जतिन शनिवार को 401 लीटर गंगाजल के साथ मवाना पहुंचे। जतिन ने गोमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की मनोकामना के साथ यह कठिन भक्ति यात्रा पूरी की है।
जतिन ने अटूट श्रद्धा, कठिन साधना और एक विशेष राष्ट्रीय संदेश के साथ अपनी अनूठी कांवड़ यात्रा पूरी की है। जतिन ने 11 जुलाई को मवाना से लेटकर यात्रा शुरू की और 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंच गया। फिर हरिद्वार से 29 जुलाई को 401 लीटर गंगाजल लेकर चला और रविवार 8 अगस्त को मवाना पहुंचा, जहां स्थानीय लोगों ने उसका जोरदार स्वागत किया। भीषण गर्मी, शारीरिक थकावट और पथरीली राहों के बावजूद जतिन का मनोबल अंत तक नहीं डगमगाया।
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जतिन की इस कठिन भक्ति यात्रा के पीछे एक बड़ा और पवित्र उद्देश्य छिपा है। उसका कहना है कि वह इतनी भारी कांवड़ और यह कठिन दंडवत यात्रा केवल इसलिए कर रहा है ताकि भगवान भोलेनाथ उसकी प्रार्थना स्वीकार करें और देश में गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा प्राप्त हो। गोमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वह पूरे भारतीय समाज और संस्कृति की जीवनदायिनी धारा हैं। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से उसने इस अत्यंत कठिन भक्ति मार्ग को चुना।
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