लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut ›   Jamiat Ulama-I-Hind Two-day convention: Madani says If you do not like our food and clothes, then go somewhere else

Deoband: जमीयत के अधिवेशन में बोले मदनी- यदि हमारा खाना-पहनना पसंद नहीं तो कहीं और चले जाओ

अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 29 May 2022 01:41 PM IST
सार

देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अधिवेशन के दूसरे दिन मौलाना असद मदनी ने कहा कि कितना कुछ सहने के बावजूद हम चुप हैं। यदि हमारा मजहब नहीं पसंद तो कहीं और चले जाओ। बता दें कि अधिवेशन का आज अंतिम दिन है। जहां कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगेगी।

मौलाना महमूद असद मदनी
मौलाना महमूद असद मदनी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

देवबंद में जमीयत के अधिवेशन के तीसरे चरण में कई प्रस्ताव पेश किए गए, साथ ही कुछ अहम सुझाव दिए गए। अधिवेशन के दूसरे दिन मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कितना कुछ सहने के बावजूद हम चुप हैं। यह हमारे सब्र का इम्तिहान है, कहा कि यदि हमारा खाना, पहनना नहीं पसंद तो हमारे साथ मत रहो, कहीं और चले जाओ। जमीयत उलमा-ए-हिंद के दो दिवसीय अधिवेशन में उलमा देश के मौजूदा हालात समेत अनेक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। बता दें कि अंतिम दिन आज कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी, कई अहम निर्णय भी लिए गए।



मदनी के बयान ने बढ़ाई गर्मी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में सांप्रदायिक माहौल खराब करने वालों की जमकर आलोचना की गई। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने मुस्लिमों को देश छोड़कर पाकिस्तान चले जाने की सलाह देने वालों पर जमकर निशाना साधा।


मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हमारा मजहब अलग है, हमारा लिबास अलग है, हमारे खाने-पीने, पहनने का तरीका भी अलग है। यदि तुमको हमारा मजहब बर्दाश्त नहीं है तो तुम कहीं ओर चले जाओ। मौलाना मदनी ने कहा कि वे जरा-जरा सी बात पर हमें कहते हैं कि पाकिस्तान चले जाओ। अरे तुम्हें मौका नहीं मिला था पाकिस्तान जाने का। हमें मौका मिला लेकिन हमने रिजेक्ट कर दिया था।
 

अधिवेशन में आज दूसरे दिन ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा शाही ईदगाह और कॉमन सिविल कोड को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। जिसका अधिवेशन में मौजूद उलमा ने खुले दिल से समर्थन किया। कहा कि कॉमन सिविल कोड को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।  जाहिर है अधिवेशन के मंच से अंतिम दिन मौलाना महमूद मदनी का बयान गर्मी के मौसम में और तपिश बढ़ाने वाला साबित होगा।

सरकार जबरन लाई सिविल कोड तो करेंगे विरोध
शाहजहांपुर के प्रोफेसर मौलाना नौमानी ने कॉमन सिविल कोड का प्रस्ताव रखते हुए इसके पीछे सरकार की मंशा को जाहिर करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को समाप्त करने के लिए सरकार इसको ला रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुल्क का कानून सबको बराबर का हक देता है। यदि सरकार कॉमन सिविल कोड को जबरन लाती हर तरह इसका विरोध किया जाएगा।

महत्वपूर्ण फैसलों पर लगी मुहर
वहीं अधिवेशन के पहले दिन देश में नफरत के बढ़ते हुए दुष्प्रचार को रोकने के उपायों पर विचार किए जाने और इस्लामोफोबिया की रोकथाम के विषय में प्रस्ताव व सुझाव प्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। सद्भावना मंच को मजबूत करने पर विचार संबंधी प्रस्ताव रखा गया। जिसके तहत विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के लोगों की संयुक्त बैठक करना, आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करना, मजदूर भाइयों, किसानों और पिछड़े लोगों की सेवा करना, अनाथ, विधवाओं और मजबूर लोगों की मदद करना, नवयुवकों को नशे की आदत और यौन भटकाव से बचाने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना, संवेदनशील धार्मिक मुद्दों (जैसे गोरक्षा, धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर का उपयोग, त्योहारों के मौके पर सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल) आदि की समस्या कहीं हो तो उसका शांतिपूर्ण समाधान खोजना आदि सुझाव पेश किए गए। इस सभी सुझावों पर प्रस्ताव पारित किए गए। जिस पर आज अंतिम चरण के अधिवेशन में मुहर लगी।
 
हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाएगा विश्व इस्लामोफोबिया दिवस 
अधिवेशन में जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वक्ताओं ने वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कुछ उपाय सुझाए। जिसमें वर्ष 2017 में प्रकाशित विधि आयोग की 267 वीं रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा भड़काने वालों और सभी अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए। इस अधिवेशन में हर साल 15 मार्च को विश्व इस्लामोफोबिया दिवस मनाने की भी घोषणा की गई।

शादियों में फिजूलखर्ची पर लगे प्रतिबंध
जमीयत के मंच से समाज सुधार को लेकर भी विचार रखे गए। मौलाना मोअज्जम ने इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) को लेकर रिपोर्ट पेश की, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही समाज में फैल रही कुरीतियों जैसे नशाखोरी, बाल मजदूरी सहित अन्य मुद्दों पर ध्यान दिलाया और इन्हें समाप्त करने पर जोर दिया। 

अधिवेशन में 25 राज्यों से आए पदाधिकारी  
जमीयत के अधिवेशन में 25 राज्यों से दो हजार से अधिक पदाधिकारियों ने शिरकत की है। इसमें असम, त्रिपुरा, मणिपुर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से जमीयत से जुड़े पदाधिकारी व सदस्य अधिवेशन में शामिल हुए। इनमें प्रमुख रुप से एआईयूडीएफ के प्रमुख व सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी, मौलाना जावेद देहलवी, मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी, मो. अनवर, प्रोफेसर अब्दुल माजिद, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मुफ्ती इफ्तेखार केरलवी, मौलाना हकीमुद्दीन, मौलाना साबिर कासमी, मौलाना मोअज्जम आरिफी आदि शामिल हैं। 

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम 
अधिवेशन को लेकर पुलिस और प्रशासन स्तर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े अधिकारी अधिवेशन स्थल पर मौजूद हैं पीएसी बल के साथ पुलिस अधिकारी गश्त कर रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जगह जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। 
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00