{"_id":"5fa848998ebc3e5bc527e679","slug":"jal-nigam-withholds-one-million-rupees-from-outsourced-firm-city-news-mrt5101843146","type":"story","status":"publish","title_hn":"जल निगम ने आउटसोर्स फर्म के दस लाख रुपये रोके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जल निगम ने आउटसोर्स फर्म के दस लाख रुपये रोके
विज्ञापन
मेरठ। डीएम के आदेश पर शुरू हुआ प्लांट सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। जल निगम की नागर कार्य इकाई ने आउटसोर्स फर्म के काम बंद कर देने के डर से दस लाख रुपये का भुगतान रोक लिया है। इकाई अधिकारियों का कहना है कि काम पूरा होने के बाद संपूर्ण भुगतान कर दिया जाएगा।
सफाई के लिए बीती 15 अक्तूबर की आधी रात बंद की गई गंगनहर छह दिन बाद 14 नवंबर की आधी रात चालू कर दी जाएगी। हरिद्वार से छोड़ा जाने वाला पानी 16 नवंबर की आधी रात के बाद भोला की झाल तक पहुंच जाएगा। इसके बाद नहर का पानी भोला की झाल स्थित 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सेटलिंग बेसिन में जमा हो जाएगा। ऐसे में इसकी सफाई नहीं हो सकेगी। इससे पहले सिल्ट निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है।
इस बीच नगर निगम से मिले 81.50 लाख रुपये में से जल निगम की नागर कार्य इकाई ने दस लाख रुपये रोककर आउटसोर्स फर्म टीएल इंफ्रा को बाकी भुगतान कर दिया है। दस लाख रुपये रोकने के पीछे टीएल फर्म को बांधकर रखना है। जिससे वह पूरा पैसा मिलने पर प्लांट की सफाई अधूरी छोड़कर न चली जाए। जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा का कहना है कि प्लांट सफाई और मरम्मत तेजी से चल रही है। पूरा काम होने के बाद फर्म के बाकी बचे दस लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सफाई के लिए बीती 15 अक्तूबर की आधी रात बंद की गई गंगनहर छह दिन बाद 14 नवंबर की आधी रात चालू कर दी जाएगी। हरिद्वार से छोड़ा जाने वाला पानी 16 नवंबर की आधी रात के बाद भोला की झाल तक पहुंच जाएगा। इसके बाद नहर का पानी भोला की झाल स्थित 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सेटलिंग बेसिन में जमा हो जाएगा। ऐसे में इसकी सफाई नहीं हो सकेगी। इससे पहले सिल्ट निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है।
विज्ञापन
इस बीच नगर निगम से मिले 81.50 लाख रुपये में से जल निगम की नागर कार्य इकाई ने दस लाख रुपये रोककर आउटसोर्स फर्म टीएल इंफ्रा को बाकी भुगतान कर दिया है। दस लाख रुपये रोकने के पीछे टीएल फर्म को बांधकर रखना है। जिससे वह पूरा पैसा मिलने पर प्लांट की सफाई अधूरी छोड़कर न चली जाए। जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्रा का कहना है कि प्लांट सफाई और मरम्मत तेजी से चल रही है। पूरा काम होने के बाद फर्म के बाकी बचे दस लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया जाएगा।
विज्ञापन