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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Jaish e Mohammed name was first linked to Saharanpur in the West up

जैश-ए-मोहम्मद का 1994 में पहला अटैक, दहल गया था यूपी का यह जिला, गवाह है ये पुलिस चौकी

Sat, 16 Feb 2019 03:57 PM IST
Dimple Sirohi आनंद प्रकाश, अमर उजाला, सहारनपुर
आनंद प्रकाश, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 16 Feb 2019 03:57 PM IST
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Jaish e Mohammed name was first linked to Saharanpur in the West up
जैश ए मोहम्मद

बात नवंबर 1994 की है। सर्दी का सीजन था, लोग घरों में रजाई में आराम फरमा रहे थे। एकाएक गोलियों की तड़तड़ाहट सुनी, तो नींद खुल गई। डर की वजह से कोई बाहर नहीं निकला, लेकिन फिर शोर मचने लगा और चारों तरफ पुलिस ही पुलिस थी। तब मालूम चला कि आतंकियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है, जिसमें एक इंस्पेक्टर और सिपाही शहीद हो हो गए थे। एक आतंकी भी मारा गया था।  

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यह वाकया उस सनसनीखेज घटना का है, जिससे पश्चिमी यूपी में पहली बार जैश ए मोहम्मद का कनेक्शन जुड़ा था। दरअसल, जैश ए मोहम्मद के आतंकी अजहर मसूद को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1994 में हापुड़ से तीन विदेशी नागरिकों का अपहरण कर लिया था और सहारनपुर के खाताखेड़ी में लाकर एक मकान में बंद करके रखा था।

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जिस कार से विदेशी नागरिकों को सहारनपुर लाया गया था, उसका ड्राइवर गाजियाबाद जनपद में पकड़ा गया था। आतंकियों के बारे में सटीक सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव ने पुलिस टीम के साथ खाताखेड़ी में उस मकान को घेर लिया था, जिसमें आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को बंधक बना रखा था।

रात के अंधेरे में आतंकियों ने पुलिस पर गोलियां बरसा दी थीं, जिसमें इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और एक सिपाही शहीद हो गया था। कई आतंकी वहां से फरार हो गए थे, एक आरोपी को मार गिराने के बाद विदेशी नागरिकों को मुक्त करा लिया गया था। हालांकि इसके बाद मुजफ्फरनगर के गांव जौला से भी जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर मोहम्मद वारस गिरफ्तार किया गया था। बाद में कांधार विमान अपहरण कांड में मौलाना अजहर मसूद को छोड़ा  गया था।

Jaish e Mohammed name was first linked to Saharanpur in the West up
police chauki

अब उस भवन में चल रही पुलिस चौकी  
जिस मकान में आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को कई दिन तक बंधक बनाकर रखा था, उसमें अब पुलिस चौकी खाताखेड़ी चल रही है। इन दिनों वहां पर एक उपनिरीक्षक और पांच सिपाहियों की तैनाती है। उस वक्त मकान में दो कमरे, एक गैलरी और बाहरी बैठक बनी थी।

आतंकियों ने तीनों विदेशी नागरिकों को पीछे की तरफ छोटे से कमरे में जंजीरों से बांधकर रखा था। 1994 में जब यह वारदात हुई थी, तो वहां इक्का दुक्का ही मकान थे, बाकी आसपास बाग था और प्लाटिंग हो चुकी थी। 

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police chauki

दहशत में बीता था वक्त : मुनव्वर   
खाताखेड़ी पुलिस चौकी के बगल में रहने वाले मुनव्वर बताते हैं कि जब यह घटना हुई थी, तब उनके माता पिता और भाई बहन घर में ही थे। आसपास में कुछ ही मकान थे। गोलियों की आवाज सुनकर दहशत पसर गई थी। लोग घरों में दुबक गए थे। बाद में बाहर आए, तो मकान की दीवारों पर गोलियों के निशान थे।

इसके बाद पुलिस ने उनके भाई और बहनोई से भी पूछताछ की थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में इस कालोनी का नाम शहीद ध्रुवलाल यादव की याद में शहीद नगर रखा गया था, लेकिन फिर बदलकर हयातनगर हो गया था।  

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