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उत्तम क्षमा से मिटता है मन का द्वेष, मिलता है आत्मिक आनंद: सौरभ सागर
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.. दशलक्षण पर्व के पहले दिन आचार्य सौरभ सागर ने क्रोध त्यागने और क्षमा भाव अपनाने का दिया संदेश
.. तीरगरान मंदिर से 500 इंद्र-इंद्राणी कलश लेकर पहुंचीं महावीर जयंती भवन, अक्टूबर में होगा वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
आचार्य सौरभ सागर वर्षायोग में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म का संदेश दिया गया। श्री महावीर जयंती भवन शारदा रोड में प्रवचन करते हुए आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि उत्तम क्षमा जैन धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। यह क्रोध त्यागकर जीवन में सहनशीलता और शांति अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि किसी के प्रति प्रतिशोध, घृणा या द्वेष का भाव नहीं रखना ही उत्तम क्षमा है। क्रोध करने से सबसे पहले मन की शांति समाप्त होती है और दुखों का मार्ग खुलता है। किसी के बुरे व्यवहार या अपमान के बावजूद मन की शांति बनाए रखना ही उत्तम क्षमा धर्म है। बदले की भावना मन को अशांत करती है। दूसरों की गलतियों को माफ करने से आत्मिक आनंद और शीतलता मिलती है। क्षमा कमजोरी नहीं बल्कि आंतरिक आत्मबल और संयम का प्रतीक है।
सुबह 6:30 बजे दिगंबर जैन पंचायती मंदिर तीरगरान से 500 इंद्र इंद्राणियां तांबे के कलश और नारियल में शुद्धि का जल लेकर बैंड की मंगल धुनों के बीच महावीर जयंती भवन पहुंचीं। मंदिर में 10 से 12 अक्टूबर तक होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के इंद्र-इंद्राणी विधान के कूपन का उद्घाटन भोजन प्रदाता अरिहंत जैन, सामग्री प्रदाता डॉ. विनोद जैन, सौधर्म इंद्र सनत जैन, कुबेर इंद्र आनंद जैन तथा साड़ी, धोती-दुपट्टा प्रदाता धन कुमार जैन ने किया। दोपहर तीन बजे शंका समाधान और शाम 6:30 बजे गुरु भक्ति में श्रद्धालुओं ने आचार्य की चरण वंदना की।
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पुष्प वर्षा योग समिति के चेयरमैन सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि तीरगरान के ऐतिहासिक मंदिर में 10 से 12 अक्टूबर तक आचार्य सौरभ सागर के सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिंब स्थापना महोत्सव और श्री मंशापूर्ण महावीर विधान होगा।
वहीं, फूलबाग कॉलोनी स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भी दशलक्षण पर्व शुरू हुआ। मंगल कलश और अखंड दीप की स्थापना के बाद अभिषेक, शांतिधारा और विधान हुआ। मंत्री नवीन जैन ने उत्तम क्षमा का महत्व बताया। शाम को आरती, शास्त्र सभा और धार्मिक तंबोला हुआ।
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.. तीरगरान मंदिर से 500 इंद्र-इंद्राणी कलश लेकर पहुंचीं महावीर जयंती भवन, अक्टूबर में होगा वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
आचार्य सौरभ सागर वर्षायोग में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म का संदेश दिया गया। श्री महावीर जयंती भवन शारदा रोड में प्रवचन करते हुए आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि उत्तम क्षमा जैन धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। यह क्रोध त्यागकर जीवन में सहनशीलता और शांति अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि किसी के प्रति प्रतिशोध, घृणा या द्वेष का भाव नहीं रखना ही उत्तम क्षमा है। क्रोध करने से सबसे पहले मन की शांति समाप्त होती है और दुखों का मार्ग खुलता है। किसी के बुरे व्यवहार या अपमान के बावजूद मन की शांति बनाए रखना ही उत्तम क्षमा धर्म है। बदले की भावना मन को अशांत करती है। दूसरों की गलतियों को माफ करने से आत्मिक आनंद और शीतलता मिलती है। क्षमा कमजोरी नहीं बल्कि आंतरिक आत्मबल और संयम का प्रतीक है।
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सुबह 6:30 बजे दिगंबर जैन पंचायती मंदिर तीरगरान से 500 इंद्र इंद्राणियां तांबे के कलश और नारियल में शुद्धि का जल लेकर बैंड की मंगल धुनों के बीच महावीर जयंती भवन पहुंचीं। मंदिर में 10 से 12 अक्टूबर तक होने वाले वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के इंद्र-इंद्राणी विधान के कूपन का उद्घाटन भोजन प्रदाता अरिहंत जैन, सामग्री प्रदाता डॉ. विनोद जैन, सौधर्म इंद्र सनत जैन, कुबेर इंद्र आनंद जैन तथा साड़ी, धोती-दुपट्टा प्रदाता धन कुमार जैन ने किया। दोपहर तीन बजे शंका समाधान और शाम 6:30 बजे गुरु भक्ति में श्रद्धालुओं ने आचार्य की चरण वंदना की।
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पुष्प वर्षा योग समिति के चेयरमैन सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि तीरगरान के ऐतिहासिक मंदिर में 10 से 12 अक्टूबर तक आचार्य सौरभ सागर के सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिंब स्थापना महोत्सव और श्री मंशापूर्ण महावीर विधान होगा।
वहीं, फूलबाग कॉलोनी स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में भी दशलक्षण पर्व शुरू हुआ। मंगल कलश और अखंड दीप की स्थापना के बाद अभिषेक, शांतिधारा और विधान हुआ। मंत्री नवीन जैन ने उत्तम क्षमा का महत्व बताया। शाम को आरती, शास्त्र सभा और धार्मिक तंबोला हुआ।