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जगतगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वरानन नंद बोले-विषम परिस्थिति में भी सम बना रहना ही शिव है
Mon, 22 Jan 2024 06:12 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 22 Jan 2024 06:12 PM IST
सार
सरस्वती लोक में सोमवार को श्री जागेश्वर धाम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह श्रद्धा भक्ति भाव के साथ हुआ। जगद्गुरु ने कहा कि विष ही विषमता है, विषम परिस्थिति में भी सम बना रहना ही शिव है।
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शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सरस्वती लोक में सोमवार को श्री जागेश्वर धाम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह श्रद्धा भक्ति भाव के साथ हुआ। शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि शिव से ही सृष्टि बनी है। सब देव लेकिन वो महादेव हैं। समुद्र मंथन में निकले विष के पान को विष्णु ने कहा हमें विष पीने की आदत नहीं। भगवान की लीलाओं का अनुकरण नहीं किया जा सकता।
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शिव के परिवार में कितनी भिन्नता। शिव की सवारी बैल और मां पार्वती की शेर, कुबेर की मयूर और गणेश जी की सवारी चूहा। सभी का एक दूसरे से बैर है। तमाम बैर होते हुए भी परिवार एक है। शिव ही सत्य है, जो सत्य है वो ही सुंदर है।
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विजय हमेशा सत्य की होती है, असत्य से कुछ देर के लिए प्रभावित कर सकते हैं। सत्य कभी परास्त या पराजित नहीं किया जा सकता, भगवान राम सत्य हैं, अयोध्या में 500 साल बाद राम मंदिर बना। इसीलिए मरने पर राम नाम सत्य कहते हैं। उन्होंने कहा कि कृष्ण की 16100 रानियां थीं। भगवान का आदेश माना जाता है, लीलाओं का अनुकरण नहीं।
जगद्गुरु ने कहा कि विष ही विषमता है, विषम परिस्थिति में भी सम बना रहना ही शिव है। कंठ में रखो, पिया तो क्रोध बैर बन जाएगा उगला तो परिवार में कलह। याद दिलाया कि मंदिर के लिए पांच छह साल पहले विधायक ने बुलाया था। उन्होंने कहा कि दसवें तक सूक्ष्म शरीर रहता है, जबकि आर्य समाज तीसरे दिन ही कर देते हैं, ऐसे में प्रेत बन जाते हैं।
शिशु जब गर्भ में होता है तो प्रार्थना करता है, राम नाम भजूंगा। मगर जब पैदा हुए तो राम को भूल गए दाम ही याद रखते हैं। कनक प्रभात महाराज ने कहा कि आज का दिन उत्सव का दिन है।
जगद्गुरु ने कहा कि विष ही विषमता है, विषम परिस्थिति में भी सम बना रहना ही शिव है। कंठ में रखो, पिया तो क्रोध बैर बन जाएगा उगला तो परिवार में कलह। याद दिलाया कि मंदिर के लिए पांच छह साल पहले विधायक ने बुलाया था। उन्होंने कहा कि दसवें तक सूक्ष्म शरीर रहता है, जबकि आर्य समाज तीसरे दिन ही कर देते हैं, ऐसे में प्रेत बन जाते हैं।
शिशु जब गर्भ में होता है तो प्रार्थना करता है, राम नाम भजूंगा। मगर जब पैदा हुए तो राम को भूल गए दाम ही याद रखते हैं। कनक प्रभात महाराज ने कहा कि आज का दिन उत्सव का दिन है।