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सामाजिक उत्तरदायित्व को समझना भी जरूरी : डॉ. सीमा
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मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय के गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा, वर्तमान चुनौतियों और डिजिटल युग में उसकी भूमिका पर मंथन किया गया।
मुख्य वक्ता एवं भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक हिंदी पत्रकारिता ने जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि युवा पत्रकारों के लिए सत्य, निष्पक्षता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को समझना भी जरूरी है।
वक्ता के रूप में डॉ. आशीष दीपांकर ने कहा कि तकनीक ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदला है लेकिन उसके मूल मूल्य अब भी अपरिवर्तित हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। इसे हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है।
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सहायक आचार्य डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि यह दिवस उन पत्रकारों के संघर्ष और समर्पण की याद दिलाता है, जिन्होंने समाज में जागरूकता और परिवर्तन की अलख जगाई। विद्यार्थियों को पत्रकारिता के नैतिक मानकों को समझते हुए नई तकनीकों का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। संचालन सह-आचार्य डॉ. संतोष कुमार गौतम ने किया। डॉ. आशुतोष वर्मा ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता एवं भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक हिंदी पत्रकारिता ने जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि युवा पत्रकारों के लिए सत्य, निष्पक्षता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को समझना भी जरूरी है।
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वक्ता के रूप में डॉ. आशीष दीपांकर ने कहा कि तकनीक ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदला है लेकिन उसके मूल मूल्य अब भी अपरिवर्तित हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। इसे हर परिस्थिति में बनाए रखना आवश्यक है।
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सहायक आचार्य डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि यह दिवस उन पत्रकारों के संघर्ष और समर्पण की याद दिलाता है, जिन्होंने समाज में जागरूकता और परिवर्तन की अलख जगाई। विद्यार्थियों को पत्रकारिता के नैतिक मानकों को समझते हुए नई तकनीकों का सकारात्मक उपयोग करना चाहिए। संचालन सह-आचार्य डॉ. संतोष कुमार गौतम ने किया। डॉ. आशुतोष वर्मा ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।