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खेल उजागर हुआ तो दुकानों की पत्रावलियों की तलाश में जुटे निगम अधिकारी
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सिकमी किराएदारी में खेल के बाद पत्रावलियों की तलाश शुरू
- पालिका बाजार अकेला नहीं, अन्य बाजारों में भी हैं ऐसे ही मामले
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम के पालिका बाजार में शौचालय को दुकान दर्शाकर किराए पर देने, पूरा प्रकरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज न होने और कई सिकमी किराएदारों की फाइल विभाग में न होने का मामला तूल पकड़ रहा है। इसमें किराया विभाग के लिपिक समेत दो लोग संदेह के घेरे में हैं। सहायक नगरायुक्त एवं किराया प्रभारी ने तत्कालीन लिपिक को पत्र लिखकर सभी दुकानों की पत्रावली मांग ली है।
मूल रजिस्टर में लाल पेन से की गई कटिंग और दर्ज सिकमी किराएदारी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा खेल पालिका बाजार में ही नहीं है, भगत सिंह मार्केट, शारदा रोड कबाड़ी बाजार चौराहा मार्केट समेत सभी में बताया जा रहा है। कुल मिलाकर 200 रुपये प्रतिमाह किराए पर ली गई निगम की दुकानों को एक से डेढ़ करोड़ तक में अवैध रूप से बेचा जा रहा है।
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नगरायुक्त के तबादले के बाद ही चलता है पता
नगर निगम की दुकानों के नामांतरण हो या अन्य गंभीर मामले, सभी नगरायुक्तों के स्थानांतरण के बाद ही सामने आते हैं। नगर निगम में किराया विभाग का रिकॉर्ड भी इसकी गवाही दे रहा है। लिपिकों ने पूरे फर्जीवाड़े को रजिस्टरों में काटछांट कर यही प्रयास किया है। सवाल है कि क्या पूर्व के नगरायुक्त दुकानों के किराएदार और दुकानों का स्वरूप बदलने की स्वीकृति दे गए। अगर नगरायुक्तों ने इसकी लिखित स्वीकृति नहीं दी तो फिर किस आधार पर सिकमी किराएदार रजिस्टर में दर्ज किए गए?
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अधिकारी ने रजिस्टर का क्यों नहीं किया अवलोकन
कोई भी सरकारी रजिस्टर, जिसमें आय-व्यय का ब्योरा अंकित होता हो। ऐसे रजिस्टर भले ही लिपिक तैयार करें, समय-समय पर विभागीय अधिकारी भी अवलोकन करते हैं लेकिन किराया विभाग में सब कुछ उलटा है। महानगर में निगम की करोड़ों की संपत्ति हैं। पालिका मार्केट, भगत सिंह मार्केट, सूरजकुंड, शारदा रोड, मेट्रो प्लाजा, बच्चा पार्क, नगर निगम मार्ग, पाल होटल, सिटी होटल आदि से किराया वसूली होती है। रजिस्टर पर लिपिक के अलावा किसी अधिकारी के हस्ताक्षर या मोहर नहीं है।
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निगम के रिकॉर्ड में दर्ज लेखा-जोखा
दुकान नंबर 10: मूल आवंटी महेंद्र पाल और 31 मार्च, 21से सिकमी किराएदार समीर पुत्र मोहम्मद हनीफ हैं।
दुकान नंबर 117: मूल आवंटी सुशील कुमार शर्मा पुत्र शशिकांत शर्मा और अब सिकमी किराएदार साजिद अली, शहजाद पुत्र शाहबुददीन हैं।
दुकान नंबर पांच: मूल आवंटी मुकेश कुमार सोम और 20 फरवरी, 21 से दुकान के मालिक महबूब पुत्र हरीमुददीन हैं।
दुकान नंबर 134: मूल किराएदार राहुल मित्तल पुत्र ओम प्रकाश और अब निगम के किराएदार इरशाद मलिक हैं।
दुकान नंबर 172: मूल किराएदार सुशील कुमार पुत्र शशिकांत शर्मा और अब हुसन बाना पत्नी रियाज सिकमी किराएदार हैं।
दुकान नंबर 27: मूल किराएदार दीपका मनोचा पत्नी श्याम सुंदर मनोचा और अब सिकमी किराएदार के रूप में मेहराज अहमद हैं।
दुकान नंबर आठ: मूल किराएदार अब्दुल अजीज पुत्र अब्दुल रहमान थे। अब अकरम पुत्र यासीन सिकमी किराएदार हैं।
दुकान नंबर 16: मूल किराएदार श्याम सुंदर पुत्र रोपन थे और अब इंतखाब अहमद सिकमी किराएदार हैं।
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नहीं मिली थी आठ दुकानों की पत्रावली
मुझे एक माह पहले ही किराया विभाग में लिपिक सुरेंद्र से चार्ज मिला है। उन्हें चार्ज के दौरान पालिका बाजार के शौचालय में दुकान और अन्य लगभग आठ सिकमी किराएदारी की फाइल नहीं दी गईं। पूरी रिपोर्ट से किराया प्रभारी एवं सहायक नगरायुक्त ब्रजपाल सिंह को अवगत करा दिया गया है।
- राजेश कुमार, किराया लिपिक
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तत्कालीन लिपिक से मांगी है जानकारी
हमने तत्कालीन लिपिक सुरेंद्र से सभी पत्रावली मांगी हैं। अगर पत्रावली नहीं मिलती हैं तो नगरायुक्त के आदेशानुसार संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रजपाल सिंह, सहायक नगरायुक्त एवं किराया प्रभारी
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- पालिका बाजार अकेला नहीं, अन्य बाजारों में भी हैं ऐसे ही मामले
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम के पालिका बाजार में शौचालय को दुकान दर्शाकर किराए पर देने, पूरा प्रकरण सरकारी अभिलेखों में दर्ज न होने और कई सिकमी किराएदारों की फाइल विभाग में न होने का मामला तूल पकड़ रहा है। इसमें किराया विभाग के लिपिक समेत दो लोग संदेह के घेरे में हैं। सहायक नगरायुक्त एवं किराया प्रभारी ने तत्कालीन लिपिक को पत्र लिखकर सभी दुकानों की पत्रावली मांग ली है।
मूल रजिस्टर में लाल पेन से की गई कटिंग और दर्ज सिकमी किराएदारी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा खेल पालिका बाजार में ही नहीं है, भगत सिंह मार्केट, शारदा रोड कबाड़ी बाजार चौराहा मार्केट समेत सभी में बताया जा रहा है। कुल मिलाकर 200 रुपये प्रतिमाह किराए पर ली गई निगम की दुकानों को एक से डेढ़ करोड़ तक में अवैध रूप से बेचा जा रहा है।
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नगरायुक्त के तबादले के बाद ही चलता है पता
नगर निगम की दुकानों के नामांतरण हो या अन्य गंभीर मामले, सभी नगरायुक्तों के स्थानांतरण के बाद ही सामने आते हैं। नगर निगम में किराया विभाग का रिकॉर्ड भी इसकी गवाही दे रहा है। लिपिकों ने पूरे फर्जीवाड़े को रजिस्टरों में काटछांट कर यही प्रयास किया है। सवाल है कि क्या पूर्व के नगरायुक्त दुकानों के किराएदार और दुकानों का स्वरूप बदलने की स्वीकृति दे गए। अगर नगरायुक्तों ने इसकी लिखित स्वीकृति नहीं दी तो फिर किस आधार पर सिकमी किराएदार रजिस्टर में दर्ज किए गए?
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अधिकारी ने रजिस्टर का क्यों नहीं किया अवलोकन
कोई भी सरकारी रजिस्टर, जिसमें आय-व्यय का ब्योरा अंकित होता हो। ऐसे रजिस्टर भले ही लिपिक तैयार करें, समय-समय पर विभागीय अधिकारी भी अवलोकन करते हैं लेकिन किराया विभाग में सब कुछ उलटा है। महानगर में निगम की करोड़ों की संपत्ति हैं। पालिका मार्केट, भगत सिंह मार्केट, सूरजकुंड, शारदा रोड, मेट्रो प्लाजा, बच्चा पार्क, नगर निगम मार्ग, पाल होटल, सिटी होटल आदि से किराया वसूली होती है। रजिस्टर पर लिपिक के अलावा किसी अधिकारी के हस्ताक्षर या मोहर नहीं है।
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निगम के रिकॉर्ड में दर्ज लेखा-जोखा
दुकान नंबर 10: मूल आवंटी महेंद्र पाल और 31 मार्च, 21से सिकमी किराएदार समीर पुत्र मोहम्मद हनीफ हैं।
दुकान नंबर 117: मूल आवंटी सुशील कुमार शर्मा पुत्र शशिकांत शर्मा और अब सिकमी किराएदार साजिद अली, शहजाद पुत्र शाहबुददीन हैं।
दुकान नंबर पांच: मूल आवंटी मुकेश कुमार सोम और 20 फरवरी, 21 से दुकान के मालिक महबूब पुत्र हरीमुददीन हैं।
दुकान नंबर 134: मूल किराएदार राहुल मित्तल पुत्र ओम प्रकाश और अब निगम के किराएदार इरशाद मलिक हैं।
दुकान नंबर 172: मूल किराएदार सुशील कुमार पुत्र शशिकांत शर्मा और अब हुसन बाना पत्नी रियाज सिकमी किराएदार हैं।
दुकान नंबर 27: मूल किराएदार दीपका मनोचा पत्नी श्याम सुंदर मनोचा और अब सिकमी किराएदार के रूप में मेहराज अहमद हैं।
दुकान नंबर आठ: मूल किराएदार अब्दुल अजीज पुत्र अब्दुल रहमान थे। अब अकरम पुत्र यासीन सिकमी किराएदार हैं।
दुकान नंबर 16: मूल किराएदार श्याम सुंदर पुत्र रोपन थे और अब इंतखाब अहमद सिकमी किराएदार हैं।
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नहीं मिली थी आठ दुकानों की पत्रावली
मुझे एक माह पहले ही किराया विभाग में लिपिक सुरेंद्र से चार्ज मिला है। उन्हें चार्ज के दौरान पालिका बाजार के शौचालय में दुकान और अन्य लगभग आठ सिकमी किराएदारी की फाइल नहीं दी गईं। पूरी रिपोर्ट से किराया प्रभारी एवं सहायक नगरायुक्त ब्रजपाल सिंह को अवगत करा दिया गया है।
- राजेश कुमार, किराया लिपिक
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तत्कालीन लिपिक से मांगी है जानकारी
हमने तत्कालीन लिपिक सुरेंद्र से सभी पत्रावली मांगी हैं। अगर पत्रावली नहीं मिलती हैं तो नगरायुक्त के आदेशानुसार संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रजपाल सिंह, सहायक नगरायुक्त एवं किराया प्रभारी