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एसआईटी में सिमट रही राशन घोटाले की जांच

Fri, 05 Feb 2021 01:35 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Feb 2021 01:35 AM IST
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Investigation of ration scam in SIT
एसआईटी में सिमट रही राशन घोटाले की जांच
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मेरठ। करोड़ों रुपये के राशन घोटाले की जांच स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) में ही सिमट गई है। पूर्व में एसपी क्राइम का जिले से तबादला हुआ तो बाद में विवेचना करने वाले एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर भी बदलते रहे। 2018 में दर्ज हुए मुकदमों के बाद सिर्फ आठ लोगों की ही गिरफ्तारी हुई है। घोटाले के मुख्य आरोपियों को हर स्तर पर बचाया जा रहा।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कई जिलों में अपात्रों को फर्जी तरह से राशन के नाम पर घोटाले की शिकायत मख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से की थी। इसके बाद जुलाई, 18 में जिले में अलग-अलग थानों में 84 मुकदमे दर्ज कर जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। एसआईटी की जांच में सामने आया कि जिन 222 लोगों के आधार कार्ड की आईडी व पासवर्ड का प्रयोग कर 27 हजार से अधिक अपात्र लोगों का राशन निकाला गया है।
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इन मुकदमों में आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर वादी थे। एसआईटी की जांच में आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टरों की मिलीभगत सामने आई। इन इंस्पेक्टरों के लखनऊ में बयान होने थे लेकिन कोराना कॉल में विभागीय जांच की बात कहकर कार्रवाई नहीं हुई। मुकदमा दर्ज होने के समय एसपी क्राइम बीपी अशोक थे। बाद में एसपी क्राइम रामअर्ज हैं। इंस्पेक्टर भी बदलते रहे। इस समय विवेचना में चार इंस्पेक्टर शामिल हैं। एसपी क्राइम रामअर्ज ने बताया कि अन्य जो भी लोग घोटाले में शामिल हैं, उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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अफसर नहीं चाहते भ्रष्टाचारी जेल जाएं
पहले एसआईटी लखनऊ ने जांच की। मेरठ में अलग जांच की गई। जांच के बाद एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई। एक साथ आरोपियों पर एफआईआर होनी चाहिए थी। अफसर नहीं चाहते कि भ्रष्टाचारी जेल में जाएं।
- डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
फर्जी यूनिटों से अब भी हो रही राशन की कालाबाजारी
मेरठ। गरीबों के अन्न की कालाबाजारी पर आपूर्ति विभाग पूरी तरह से रोक नहीं लगा पा रहा है। हालांकि दो साल में 11 हजार राशन कार्ड रद्द करने के अलावा करीब 52 हजार फर्जी यूनिट काटी गई हैं लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों से फर्जी यूनिटों से कालाबाजारी हो रही है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन लागू होने के बाद राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन द्वारा दुकानों को पॉस मशीन दी गई थी। इसका लाभ यह था कि कोटेदार कार्डधारक को बिना राशन लिए नहीं लौटा सकता था। मशीन में चढ़े राशन कार्ड का कोटा बाटने के बाद मशीन शून्य हो जाती है। बावजूद इसके फर्जी यूनिट से कालाबाजारी हो रही है। जिला आपूर्ति अधिकारी नीरज सिंह का कहना है कि अभी भी जिस क्षेत्र से शिकायत मिलती है, जांच कराकर यूनिटें खत्म की जा रही हैं। रिकवरी पर भी काम शुरू कराया गया है।

देहात में फर्जी यूनिटों की भरमार
सात क्षेत्रों में विभाजित जनपद में फर्जी यूनिटों के सहारे कोटेदार कालाबाजारी कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र की तुलना में देहात क्षेत्र में यह खेल जोरों पर है। विभाग में लगातार इसकी शिकायत की जा रही है, जिसे जांच के नाम पर दबा दिया जाता है। जांच के बाद विभाग कहने के लिए कार्रवाई तो करता हैे लेकिन रिकवरी पर कोई काम नहीं होता है। नतीजतन, विभाग को नुकसान भी हो रहा है।
काटी गई फर्जी यूनिट
क्षेत्र संख्या
एक 7213
दो 8027
तीन 6603
चार 8337
मवाना 7507
सदर 8020
सरधना 6283
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