फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   International Literacy Day today: Hundreds of children deprived of education, no one is asking Right to educat

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस आज: अफसरों के दावे हवाई, शिक्षा से वंचित सैकड़ों नौनिहाल, कोई नहीं पूछ रहा हाल

Thu, 08 Sep 2022 02:32 PM IST
Dimple Sirohi पूजा राणा अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
पूजा राणा अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 08 Sep 2022 02:32 PM IST
सार

मेरठ में नौनिहालों को स्कूलों से जोड़ने के अफसरों के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। शहर में कई बस्तियां ऐसी हैं, जहां बच्चों ने कलम और किताब की सूरत तक नहीं देखी है। पढ़ाई करने की उम्र में सैकड़ों बच्चे मजदूरी में लगे हैं। 

विज्ञापन
International Literacy Day today: Hundreds of children deprived of education, no one is asking Right to educat
एक एनजीओ की ओर से चल रही कक्षा में शामिल बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में नौनिहालों को स्कूलों से जोड़ने के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाओं के बाद भी जनपद के सैकड़ों बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। शहर में कई बस्तियां ऐसी हैं, जहां बच्चों ने कलम और किताब की सूरत तक नहीं देखी है। ये बस्तियां अफसरों को आईना दिखा रही हैं कि उनके प्रयास अभी तक नाकाफी है। पढ़ाई करने की उम्र में सैकड़ों बच्चे मजदूरी में लगे हैं। 

विज्ञापन


जिले में कुल 1072 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 910 प्राथमिक और 434उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इसके अलावा छह कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं। परिषदीय स्कूलों में इस सत्र में कुल 31,093 नामांकन हुए। फिलहाल परिषदीय विद्यालयों में 1,63,282 बच्चे पंजीकृत हैं। 
विज्ञापन


यह भी पढ़े: UP: पीड़ित ने मकान की दीवार पर लिखा- पुलिस व दबंगों के कारण गांव से पलायन, धारदार हथियार से किया घायल

विज्ञापन
विज्ञापन

केस -1
लालकुर्ती क्षेत्र में बसी झुग्गी-झोपड़ियों में करीब 200 बच्चे रहते हैं। यहां पर सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी। अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। निजी संस्थाएं बच्चों को पढ़ाने का प्रयास करती हैं। लेकिन बच्चों का प्रवेश किसी स्कूल में नहीं कराया गया।

केस -2
दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम बस्ती में तीन सौ से ज्यादा बच्चे रहते हैं। इनका भी किसी स्कूल में प्रवेश नहीं है। यहां निजी संस्थाओं ने बच्चों को कलम थमाकर साक्षरता की ओर कदम रखा है। यहां भी सरकारी योजनाओं का असर नहीं दिखाई दिया।

केस -3
शास्त्रीनगर स्थित मलिन बस्तियों में परिजन बच्चों को कूड़ा बीनने भेज देते हैं। शिक्षा के लिए जागरूक करने वाले जिम्मेदार लोग आंख मूंदे बैठे हैं। साक्षरता का नामोनिशान यहां भी देखने को नहीं मिला। कुछ निजी संस्थाएं जरूर काम कर रही हैं।

यह भी पढ़े: भूख हड़ताल पर बैठे 52 गांवों के किसान, 9 करोड़ का चेक लेकर उठे 

वर्ष 2011 में साक्षरता दर
कुल - 21,41,488 
साक्षर महिलाएं - 8,86,968 
साक्षर पुरुष - 12,54,520


इसलिए मनाते हैं साक्षरता दिवस 
यूनेस्को ने पहली बार 1965 में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा इटली में की। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना है।

यह भी पढ़े: UP: स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम को सील कर चस्पा किया नोटिस, महिला की मौत पर जमकर हुआ था हंगामा  

हमारी टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ रही है। स्कूल चलो अभियान लगातार चलाया जा रहा है। तमाम बच्चों का दाखिला भी कराया गया है। - योगेंद्र सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed