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अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स दिवस : मेरठ के एथलीटों ने संघर्ष से छू लिया आसमान

Wed, 07 May 2025 02:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 07 May 2025 02:12 AM IST
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International Athletics Day: Meerut's athletes touched the sky with their struggle
मानसी ऐथलीट
मेरठ। घर-परिवार से लेकर खेल के मैदान तक कड़े संघर्ष के बाद मेरठ के एथलीटों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर नाम रोशन किया है। यहां के एथलीट अब खुद बड़ी पहचान बन चुके हैं। नई प्रतिभाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने को बेताब हैं। अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स दिवस से ठीक पहले यहां की एथलीट रूपल ने वर्ल्ड एथलेटिक्स रिले में चयन पाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
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वर्ल्ड एथलेटिक्स रिले चैंपियनशिप का आयोजन चीन में होगा। इसके लिए एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से भी भारत से इसमें प्रतिभाग करने वालों की सूची जारी कर दी गई है। रूपल चौधरी इस प्रतियोगिता में भाग लेंगी। उनके चयन पर उनके पिता ओमवीर ने भी खुशी जताई है।
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रूपल की तरह ही एशियन गेम्स से लेकर ओलंपिक तक में अन्य खिलाड़ियों ने भी पदक जीतकर खुद को साबित किया है। अन्नू रानी, पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, सीमा पूनिया किसी पहचान की मोहताज नहीं है। देशभर में अन्नू और पारुल को गोल्डन गर्ल के नाम से जाना जाता है। यहां मेरठ में कई युवा एथलीट भी उभरकर आ रही हैं जो भविष्य में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन करेंगी। इन्हीं में मानसी और ख्याति भी लगातार नेशनल में पदक ला रही हैं। खेल विवि का निर्माण होने और स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का कार्य पूरा होने के बाद यहां पदकों की संख्या और भी बढ़ जाएगी। यहां से एथलेटिक्स में खिलाड़ी और निकलकर आएंगे। (संवाद)
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पैरा एथलीट प्रीति पाल ने ओलंपिक में जीते पदक

मेरठ के गंगानगर में रहने वाली पैरा एथलीट प्रीतिपाल मूल रूप से मुजफ्फरनगर के हाशिमपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने अभी हाल ही में पैरा ओलंपिक खेलों में 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ दोनों इवेंट में कांस्य पदक जीता और मेरठ समेत पूरे देश का नाम रोशन किया। महज 5 साल की उम्र में वह कैलिपर्स पहनती थीं। 8 साल तक उनका जीवन ऐसा ही रहा। उनके पिता अनिल कुमार डेयरी चलाते हैं। पैरालंपिक खेलों में टी-35 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिन्हें हाइपरटोनिया, अटैक्सिया, एथेटोसिस और सेरेब्रल पाल्सी जैसे समन्वय संबंधी विकार हैं। 17 साल की उम्र में उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला। वह यह सपना पूरा करने पहले मेरठ और उसके बाद फिर दिल्ली आ गई।
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पिता ने पारुल को आगे बढ़ाया
पारुल चौधरी : इकलौता गांव की निवासी पारुल चौधरी आज दूसरी लड़कियों के लिए भी आदर्श बन गईं हैं। पारुल पिता कृष्णपाल चौधरी और राजेश देवी की चार संतानों में से एक हैं। उनके बड़े भाई राहुल भी एक धावक रहे हैं। बीपी इंटर कॉलेज में पहली बार 800 मीटर की दौड़ हुई। इसमें दौड़ने के लिए उनके पिता ने कहा और वह पहले स्थान पर रहीं। इसके बाद बाद ऑल इंडिया विवि चैंपियनशिप में प्रतिभा दिखाई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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भाई ने पहचानी अन्नू की ताकत
अन्नू रानी(भाला फेंक) : बहादुर पुर निवासी अन्नू रानी ने गन्ने का भाला बनाकर खेलना शुरू किया। शुरूआत में उनके भाई उपेंद्र ने उनकी ताकत को पहचाना और उन्हें इस खेल में जाने के लिए प्रेरित किया। गांव के माहौल के कारण उनका खेल में जाना कुछ लोगों को खटकता भी था, उनके खुद के पिता अमर पाल सिंह ने उन्हें पहले खेलने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने चोरी छिपे प्रयास किया और बाद में अपने पिता को भी बनाया। भाई का इसमें विशेष सहयोग रहा।
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बेटी के लिए मकान तक बेचा
प्रियंका गोस्वामी (पैदल चाल) : प्रियंका गोस्वामी मेरठ के माधवपुरम में रहती हैं। एक वक्त ऐसा भी था जब बेटी की तैयारी के लिए उनके पिता मदन गोस्वामी ने गांव का मकान तक बेच दिया था। बेटी ने भी अपने पिता के सपनों को पूरा किया और देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते।
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नई प्रतिभाएं भी हैं तैयार
ख्याति माथुर : मेरठ के मोदीपुरम निवासी ख्याति माथुर अंडर 20 वर्ग में हैं और इतनी कम उम्र में ही उन्होंने कई नेशनल और जूनियर नेशनल में अपने नाम की तरह ख्याति प्राप्त की है। पदकों की झड़ी लगा दी है। ख्याति माथुर ऊंची कूद की खिलाड़ी हैं।
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मानसी तोमर: गंगानगर निवासी ऊंची कूद की खिलाड़ी मानसी तोमर भी अंडर 20 वर्ग में हैं और उन्होंने भी अपनी प्रतिभा से सबको आश्चर्यचकित किया है। उन्होंने भी इंटर स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1.76 मीटर ऊंची कूद लगाकर कांस्य पदक जीता।
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पैरा खिलाड़ी रिया ने भी कमाया नाम
कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच गौरव त्यागी से प्रशिक्षण पैरा एथलीट रिया ने भी छोटी से उम्र में एक हाथ न होने के बावजूद कमाल करके दिखाया है। शॉटपुट में वह कई स्वर्ण पदक जीतकर मेरठ का नाम रोशन कर चुकी हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी हैं। साकेत निवासी रिया पिछले कई वर्षों से कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैयारी कर रही हैं और कई नेशनल व जूनियर नेशनल में पदक प्राप्त कर चुकी हैं।

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एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शामिल होंगी तीन एथलीट
मेरठ। एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप इसी वर्ष जून माह में भारत में होनी है। एथलेटिक एसोसिएशन की ओर से जारी किए गए क्वाड में मेरठ की तीन एथलीट का नाम शामिल किया गया है। इसमें 400 मीटर दौड़ में महिला वर्ग में रूपल चौधरी, 3000 मीटर स्टेपल चेज में पारुल चौधरी, 5000 मीटर में पारुल चौधरी, भाला फेंक में अन्नू रानी के नाम की घोषणा की गई है।
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