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तालाब खोदाई घोटाले में जांच बैठाई, ठेकेदार का पेमेंट रोका
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तालाब खोदाई घोटाले में जांच बैठाई, ठेकेदार का पेमेंट रोका
सरधना। पांडुशिला रोड स्थित दो तालाबों की खोदाई में सामने आए लाखों रुपये के घोटाले के मामले ईओ ने जांच बैठा दी। वहीं ठेकेदार द्वारा भेजे गए रिवाइज डिमांड पर रोक लगा दी है।
तालाब की सफाई के नाम पर ठेकेदार ने लाखों रुपये मात्र कुछ स्थान से कूड़ा हटाने के खर्चे में दिखा दिया। उसके बाद रिवाइज डिमांड पालिका को भेज दी। इस मामले को अमर उजाला ने प्र्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद से सरधना नगर पालिका में हड़कंप मचा है। जो इस पूरे प्रकरण में संलिप्त हैं उन पर कार्रवाई तय है। ईओ ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है। पालिका ईओ अमिता वरुण ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को बताया कि दुर्गा एंटरप्राइजेज कंपनी के ठेकेदार ने तालाब की खुदाई के स्वीकृत चाल लाख रुपये का धन कम बताया। अब दस लाख रुपये की डिमांड की है। खोदाई कार्य ठप होने के मामले में ईओ ने यह भी तर्क दिया कि जो तालाब के पास जो मकान बने हैं। उन मकानों को तालाब की खोदाई करने पर खतरा बन सकता है। मकानों की दीवारें गिर सकती हैं। जिसके चलते तालाब की सफाई कार्य पालिका ने रोक दिया है और इसी लिए डिमांड धनराशि स्वीकृत नहीं की। वहीं, मिट्टी खोदाई के नाम पर कितना कार्य ठेकेदार द्वारा कराया गया, उसकी जांच कराई जायेगी ओर तब तक ठेकेदार के पेमेंट पर रोक लगा दी गई हैं। जब तक रिपोर्ट जांच टीम नहीं सौंपती। ईओ अमिता वरूण की माने तो यदि पालिका दस लाख रुपये खर्च करेगी तो वह तालाब को पक्का कराने व उसका सौंदर्यीकरण करने पर करेगी। लेकिन ठेकेदार के रिवाइज पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाएगा। तालाब की खोदाई के कार्य के लिए रिवाइज नहीं बल्कि पूरा टेंडर फिर से छोड़ा जाएगा। हालांकि पूरे मामले में यह सवाल उठता है कि अगर तालाब की खोदाई से वहां बने मकानों को खतरा है। तो चार लाख रुपये के टेंडर छोड़ने से पहले यह बात क्यों नहीं सोची गई। इस मामले में एस्टीमेट बनाने वाले जेई की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आती है। क्या इस मामले में जेई पर भी कार्रवाई होगी।
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सरधना। पांडुशिला रोड स्थित दो तालाबों की खोदाई में सामने आए लाखों रुपये के घोटाले के मामले ईओ ने जांच बैठा दी। वहीं ठेकेदार द्वारा भेजे गए रिवाइज डिमांड पर रोक लगा दी है।
तालाब की सफाई के नाम पर ठेकेदार ने लाखों रुपये मात्र कुछ स्थान से कूड़ा हटाने के खर्चे में दिखा दिया। उसके बाद रिवाइज डिमांड पालिका को भेज दी। इस मामले को अमर उजाला ने प्र्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद से सरधना नगर पालिका में हड़कंप मचा है। जो इस पूरे प्रकरण में संलिप्त हैं उन पर कार्रवाई तय है। ईओ ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है। पालिका ईओ अमिता वरुण ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को बताया कि दुर्गा एंटरप्राइजेज कंपनी के ठेकेदार ने तालाब की खुदाई के स्वीकृत चाल लाख रुपये का धन कम बताया। अब दस लाख रुपये की डिमांड की है। खोदाई कार्य ठप होने के मामले में ईओ ने यह भी तर्क दिया कि जो तालाब के पास जो मकान बने हैं। उन मकानों को तालाब की खोदाई करने पर खतरा बन सकता है। मकानों की दीवारें गिर सकती हैं। जिसके चलते तालाब की सफाई कार्य पालिका ने रोक दिया है और इसी लिए डिमांड धनराशि स्वीकृत नहीं की। वहीं, मिट्टी खोदाई के नाम पर कितना कार्य ठेकेदार द्वारा कराया गया, उसकी जांच कराई जायेगी ओर तब तक ठेकेदार के पेमेंट पर रोक लगा दी गई हैं। जब तक रिपोर्ट जांच टीम नहीं सौंपती। ईओ अमिता वरूण की माने तो यदि पालिका दस लाख रुपये खर्च करेगी तो वह तालाब को पक्का कराने व उसका सौंदर्यीकरण करने पर करेगी। लेकिन ठेकेदार के रिवाइज पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाएगा। तालाब की खोदाई के कार्य के लिए रिवाइज नहीं बल्कि पूरा टेंडर फिर से छोड़ा जाएगा। हालांकि पूरे मामले में यह सवाल उठता है कि अगर तालाब की खोदाई से वहां बने मकानों को खतरा है। तो चार लाख रुपये के टेंडर छोड़ने से पहले यह बात क्यों नहीं सोची गई। इस मामले में एस्टीमेट बनाने वाले जेई की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आती है। क्या इस मामले में जेई पर भी कार्रवाई होगी।
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