फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   inquiary carry for pond dig correption and stop the payment of thekedar

तालाब खोदाई घोटाले में जांच बैठाई, ठेकेदार का पेमेंट रोका

Fri, 18 Oct 2019 01:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2019 01:12 AM IST
विज्ञापन
inquiary carry for pond dig correption and stop the payment of thekedar
तालाब खोदाई घोटाले में जांच बैठाई, ठेकेदार का पेमेंट रोका
विज्ञापन

सरधना। पांडुशिला रोड स्थित दो तालाबों की खोदाई में सामने आए लाखों रुपये के घोटाले के मामले ईओ ने जांच बैठा दी। वहीं ठेकेदार द्वारा भेजे गए रिवाइज डिमांड पर रोक लगा दी है।

तालाब की सफाई के नाम पर ठेकेदार ने लाखों रुपये मात्र कुछ स्थान से कूड़ा हटाने के खर्चे में दिखा दिया। उसके बाद रिवाइज डिमांड पालिका को भेज दी। इस मामले को अमर उजाला ने प्र्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद से सरधना नगर पालिका में हड़कंप मचा है। जो इस पूरे प्रकरण में संलिप्त हैं उन पर कार्रवाई तय है। ईओ ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी है। पालिका ईओ अमिता वरुण ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को बताया कि दुर्गा एंटरप्राइजेज कंपनी के ठेकेदार ने तालाब की खुदाई के स्वीकृत चाल लाख रुपये का धन कम बताया। अब दस लाख रुपये की डिमांड की है। खोदाई कार्य ठप होने के मामले में ईओ ने यह भी तर्क दिया कि जो तालाब के पास जो मकान बने हैं। उन मकानों को तालाब की खोदाई करने पर खतरा बन सकता है। मकानों की दीवारें गिर सकती हैं। जिसके चलते तालाब की सफाई कार्य पालिका ने रोक दिया है और इसी लिए डिमांड धनराशि स्वीकृत नहीं की। वहीं, मिट्टी खोदाई के नाम पर कितना कार्य ठेकेदार द्वारा कराया गया, उसकी जांच कराई जायेगी ओर तब तक ठेकेदार के पेमेंट पर रोक लगा दी गई हैं। जब तक रिपोर्ट जांच टीम नहीं सौंपती। ईओ अमिता वरूण की माने तो यदि पालिका दस लाख रुपये खर्च करेगी तो वह तालाब को पक्का कराने व उसका सौंदर्यीकरण करने पर करेगी। लेकिन ठेकेदार के रिवाइज पत्र पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाएगा। तालाब की खोदाई के कार्य के लिए रिवाइज नहीं बल्कि पूरा टेंडर फिर से छोड़ा जाएगा। हालांकि पूरे मामले में यह सवाल उठता है कि अगर तालाब की खोदाई से वहां बने मकानों को खतरा है। तो चार लाख रुपये के टेंडर छोड़ने से पहले यह बात क्यों नहीं सोची गई। इस मामले में एस्टीमेट बनाने वाले जेई की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आती है। क्या इस मामले में जेई पर भी कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed