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Meerut News: महिला किसानों को गन्ने-सरसों में जैविक फसल सुरक्षा की जानकारी
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दौराला - मंडौरा गांव में महिला किसान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया स्रोत :स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआरआईआईपीएम) ने बृहस्पतिवार को गांव मंडौरा में महिला किसान दिवस पर क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें 59 महिला किसानों को फसलों को कीटों और रोगों से बचाने की वैज्ञानिक तकनीक बताई गईं। वैज्ञानिकों ने रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर जैविक उपाय अपनाने पर जोर दिया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसएम हलधर ने गन्ने के प्रमुख कीटों की रोकथाम के उपाय बताए। उन्होंने ट्राइकोग्रामा, नीम तेल, नीम साबुन, नीम खली और फेरोमोन ट्रैप के इस्तेमाल की जानकारी दी। डॉ. मीनाक्षी आर्य ने सरसों के कीटों और रोगों के समेकित प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. पीएन मीणा ने गन्ने के रोगों की रोकथाम में ट्राइकोडर्मा, बैसिलस और स्यूडोमोनास जैसे लाभकारी सूक्ष्म जीवों की भूमिका समझाई। प्रगतिशील किसान वेदव्रत आर्य ने समेकित नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों के अपने अनुभव साझा किए।
महिला किसानों को ट्राइकोडर्मा और बैसिलस आधारित जैविक उत्पाद, नीम साबुन, नीम खली और नीम के पौधे वितरित किए गए। वैज्ञानिकों ने इनके उपयोग की विधि भी समझाई। महिला किसानों ने अपनी फसलों से जुड़ी समस्याएं साझा कीं, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान बताया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन, फसल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में महिला किसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
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दौराला। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआरआईआईपीएम) ने बृहस्पतिवार को गांव मंडौरा में महिला किसान दिवस पर क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें 59 महिला किसानों को फसलों को कीटों और रोगों से बचाने की वैज्ञानिक तकनीक बताई गईं। वैज्ञानिकों ने रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर जैविक उपाय अपनाने पर जोर दिया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसएम हलधर ने गन्ने के प्रमुख कीटों की रोकथाम के उपाय बताए। उन्होंने ट्राइकोग्रामा, नीम तेल, नीम साबुन, नीम खली और फेरोमोन ट्रैप के इस्तेमाल की जानकारी दी। डॉ. मीनाक्षी आर्य ने सरसों के कीटों और रोगों के समेकित प्रबंधन पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. पीएन मीणा ने गन्ने के रोगों की रोकथाम में ट्राइकोडर्मा, बैसिलस और स्यूडोमोनास जैसे लाभकारी सूक्ष्म जीवों की भूमिका समझाई। प्रगतिशील किसान वेदव्रत आर्य ने समेकित नाशीजीव प्रबंधन तकनीकों के अपने अनुभव साझा किए।
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महिला किसानों को ट्राइकोडर्मा और बैसिलस आधारित जैविक उत्पाद, नीम साबुन, नीम खली और नीम के पौधे वितरित किए गए। वैज्ञानिकों ने इनके उपयोग की विधि भी समझाई। महिला किसानों ने अपनी फसलों से जुड़ी समस्याएं साझा कीं, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान बताया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन, फसल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में महिला किसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
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