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Meerut News: देरी से बोई जाने वाली गेहूं की फसल की दी जानकारी

Tue, 02 Dec 2025 05:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Dec 2025 05:57 PM IST
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Information given about the delayed wheat crop
बहसूमा। पश्चिम उत्तर प्रदेश गन्ना बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। गन्ने की कटाई करने के बाद देरी से बोई जाने वाली गेहूं की प्रजातियों के बारे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विस्तार से जानकारी दी।
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कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के कृषि वैज्ञानिक राकेश तिवारी ने बताया कि 10 से 25 दिसंबर तक किसान गन्ने की फसल काटने के बाद देरी से बोने के लिए गेहूं की प्रजाति बोई जाती है। एनडब्ल्यू 1076, के 9423, डीबीडब्ल्यू 16, पीबी डब्ल्यू 590, डब्ल्यू एच 1021, डीबी डब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222, डीबीडब्ल्यू 173 आदि प्रजातियों की बुवाई कर सकते हैं। इनमें किसान बीज की मात्रा 90 से 110 किलो प्रति हेक्टेयर रखें। बुवाई के समय संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें। इसमें डीएपी 11 किलो प्रति बीघा, पोटाश 6 किलो प्रति बीघा या एनपी के 12-32-16 के 15 किलोग्राम एनपी के का प्रयोग प्रति बीघा करें।
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इसके अतिरिक्त ऑर्गेनिक कार्बन एवं ऑर्गेनिक नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कार्बनिक खाद न्यूट्री फ्लेक्स एक डेढ़ किलो प्रति बीघा बुआई में प्रयोग करें। पहले पानी के साथ यूरिया 10 किलो प्रति बीघा, विकलैप कार्बनिक खाद एक-डेढ़ किलो प्रति बीघा, सल्फर डब्ल्यू डीजी 55 ग्राम प्रति बीघा का प्रयोग करने से गेहूं की बंपर पैदावार ली जा सकती है।
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