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जहरीली हो रहीं नदियां: ऑक्सीजन जीरो, उपयोग लायक नहीं पानी, कैंसर से कराह रहा जीवन

Fri, 04 Aug 2023 10:30 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 04 Aug 2023 10:30 AM IST
सार

चीनी मिल, पेपर मिल, केमिकल कारखानों के जहरीले अवशेष नदियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। इन अवशेषों से काली नदी, यमुना और हिंडन इस कदर प्रदूषित हो गई हैं कि इनके जल को प्रयोग करना मौत को दावत देना है। पढ़ें ये रिपोर्ट।

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Industrial units make rivers poisonous in country, Effects life with cancer
नदियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

औद्योगिक इकाइयां, स्लाटर हाउस, चीनी मिल, पेपर मिल, केमिकल कारखानों के जहरीले अवशेषों से काली नदी, यमुना और हिंडन प्रदूषित हो गई हैं। इनका पानी पीना तो दूर सिंचाई के लायक भी नहीं है। आसपास के क्षेत्रों में कैंसर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। नदियों की ऐसी दशा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह मामला गुरुवार को राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर ने सदन में उठाया।

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उन्होंने कहा कि काली नदी में जहां भी सैंपल लिया गया, इसमें ऑक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई, जबकि टीसीओ 2,80,000 और बीओडी की मात्रा 40 पाई गई। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इस नदी के पानी में पारा, कॉपर, जिंक, आर्सेनिक व फ्लोराइड, नाइट्रेट की मात्रा भी बहुत अधिक है।
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स्पष्ट है कि काली नदी का पानी पीने लायक तो है ही नहीं, साथ ही ये सिंचाई या अन्य किसी काम के लायक भी नहीं है। आक्सीजन खत्म होने से जलीय जंतु भी गायब हो गए हैं। एनजीटी के आदेश पर काली नदी के किनारे चिकित्सा कैंप लगाए गए थे, जिसमें पाया गया कि नदी के समीपवर्ती गांवों में कैंसर पीड़ितों की संख्या काफी अधिक है।
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तोमर ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा के 2500 किलोमीटर के सफर में काली नदी सर्वाधिक रासायनिक प्रदूषण बांट रही है। हिंडन नदी व नालों का केमिकल, रासायनिक, युक्त जहरीला पानी यमुना में बहा रही है।
 

 

यमुना का जल भी उपयोग के लायक नहीं

यमुना का जल किसी भी उपयोग लायक नहीं है। इतना ही नहीं, हैंडपंप का पानी भी पीने लायक नहीं रह गया है, क्योंकि स्लाटर हाउस एवं अन्य औद्योगिक इकाइयां प्रदूषित पानी जमीन के अंदर भी डालते रहते हैं। इसके कारण अंडरग्राउंड पानी प्रदूषित हो गया है।
 
प्रदूषित पानी के कारण कैंसर, पीलिया, पेचिस, गैस्ट्रोएन्टराइटिस, यकृत, हैजा, क्षय रोग, खुजली, नेत्र रोग व पेट की विभिन्न प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं। तोमर ने सभापति महोदय के माध्यम से कहा कि केंद्र सरकार से अनुरोध करूंगा कि एनसीआर के जन स्वास्थ्य को देखते हुए इन औद्योगिक इकाइयों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

दर्जनों गांवों में मरीजों की भरमार 
तीन दशक पहले काली नदी का पानी निर्मल था। अब इसके किनारे के गांवों में तेजी से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां बढ़ रही हैं। नदी को साफ करने व जल शुद्ध करने की तमाम कवायद हुई, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ पाई। प्रमुख संस्थाओं ने भी स्वच्छ जल को लेकर अभियान चलाया, लेकिन प्रयास कुछ दिन में ही दम तोड़ गया। 

खतौली के अंतवाडा गांव से निकली काली नदी के किनारे पहले काफी पेड़ थे। इनके फलों से सिंचाई विभाग की आमदनी होती थी। परंतु, औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी के कारण नदी का अस्तित्व ही खत्म होता चला गया। नंगली, देदवा, अझौता, पनवाडी, सैनी, गोकलपुर, जलालपुर, उल्खेपुर, बहचौला समेत दर्जनों गांवों में अब तक कैंसर से सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। 

काली नदी संघर्ष समिति के सदस्य पुरुषोत्तम उपाध्याय, अजयवीर, गुलचंद ने बताया कि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी नदी में साफ पानी छोड़ने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। यदि सरकार एक माइनर खोदकर उसे काली नदी में मिला दे तो भारी बारिश होने के बाद इस माइनर में भी कुछ पानी छोड़ा जा सकता है, जिस कारण नदी को दोबारा जीवन मिल सकता है।

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