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अंग्रेजों से बचने के लिए क्रांतिकारियों ने मेरठ के इस मंदिर में ली थी शरण, हुआ था ये चमत्कार

Tue, 09 Oct 2018 05:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 09 Oct 2018 05:24 PM IST
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Indian Revolutionary took shelter in this temple of Meerut to avoid british army
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला

घंटाघर के निकट नगर निगम परिसर में झाड़खंडी महादेव मंदिर में भक्तों की मनोकामना ही पूर्ण नहीं होती हैं, बल्कि यह 1857 क्रांति की धरोहर भी है। सिद्ध पीठ धर्मस्थल महादेव मंदिर की धार्मिक और क्रांति से जुड़ी गाथाएं हैं। इनको मंदिर की चारदीवारी संजोये हुए है। मंदिर में शिवरात्रि, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और नवरात्र सभी विशेष त्योहारों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। 

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मंदिर का इतिहास 
मंदिर समिति के महामंत्री अनिल कुमार गुप्ता बताते हैं कि प्राचीन काल में यहां झाड़ियां हुआ करती थीं। 1857 की क्रांति के दौरान हिंदुस्तानी क्रांतिकारी अंग्रेजों के अत्याचार से बचने के लिए झाड़खंडी महादेव मंदिर को ही शरणस्थली बनाते थे। कहा जाता है कि क्रांतिकारी जिस वक्त  को कंटीली झाड़ियों के बीच शिवलिंग के दर्शन हुए। तभी से सिद्धपीठ बाबा झाड़खंडी शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। 
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मां दुर्गा, हनुमान, शिवजी का है मंदिर 
झाड़खंडी महादेव मंदिर परिसर में शिव मंदिर के साथ हनुमान मंदिर, मां दुर्गा मंदिर, विष्णु, माता लक्ष्मी, सरस्वती, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण के अतिरिक्त बाबा भैरवनाथ के प्राचीन मंदिर हैं। मंदिर में जहां समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष श्रीराम और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है। वहीं प्रतिदिन संकीर्तन भी होता है। 

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Indian Revolutionary took shelter in this temple of Meerut to avoid british army
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
मंदिर का शुरू हुआ जीर्णोद्धार 
बाबा झाड़खंडी महादेव मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि मंदिर का 17 नवंबर से जीर्णोद्धार चल रहा है। लगातार दो साल तक काम चलने के आसार हैं। इस दौरान मंदिर परिसर को ऊंचा उठाया जाएगा और मंदिर में चढ़ाए जाने वाले जल और दूध आदि को सीधे जमीन में उतारा जाएगा। मंदिरों के परिक्रमा मार्ग को ठीक करने के साथ बरांडे के ऊपर भंडारे का स्थान बनाया जाएगा। मंदिर परिसर में बरसात का पानी भर जाने की वजह से इसे ऊंचा उठाया जा रहा है।   
 
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