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महिलाओं में बढ़ रहा पीसीओडी का खतरा
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- बढ़ते तनाव और हार्मोन असंतुलन से बढ़ रहे 15 से 20 फीसदी मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। महिलाओं में पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) की समस्या लगातार बढ़ रही है। यह हार्मोन से जुड़ी बीमारी है। इसमें महिलाओं की ओवरी में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। इससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और आगे चलकर गर्भधारण में परेशानी आने लगती है। पांच में से एक महिला शादी से पहले या बाद में पीसीओडी का अनुभव करती है। इसमें पीरियड्स या तो अनियमित होते हैं या फिर कई दिनों तक चलते हैं।
मेडिकल अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शकुन सिंह के अनुसार पीसीओडी का बड़ा कारण गलत खानपान है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ज्यादा तनाव लेने से भी पीसीओडी का खतरा बढ़ता है। हर साल 15 से 20 प्रतिशत मामले बढ़ते जा रहे हैं। आगे चलकर गर्भधारण करने में भी परेशानी होती है। समय पर इलाज न कराने और लापरवाही बरतने पर कैंसर की स्थिति भी बन सकती है।
वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना चौधरी ने बताया कि रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए। संतुलित आहार लेना चाहिए। साथ ही जब भी कोई समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह से दवा और जांच कराना जरूरी है।
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पीसीओडी के मुख्य लक्षण
- पीरियड्स का देर से आना या रुक जाना
- वजन तेजी से बढ़ना, चेहरे और शरीर पर बाल बढ़ना
- मुंहासे आना, बाल झड़ना, गर्भधारण में दिक्कत होना
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पीसीओडी होने के कारण
- हार्मोन असंतुलन, फास्ट फूड और अस्वस्थ खानपान
- मोटापा, तनाव और नींद की कमी, शारीरिक गतिविधियां कम होना
- पारिवारिक या अनुवांशिक हालात भी जिम्मेदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। महिलाओं में पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) की समस्या लगातार बढ़ रही है। यह हार्मोन से जुड़ी बीमारी है। इसमें महिलाओं की ओवरी में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। इससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और आगे चलकर गर्भधारण में परेशानी आने लगती है। पांच में से एक महिला शादी से पहले या बाद में पीसीओडी का अनुभव करती है। इसमें पीरियड्स या तो अनियमित होते हैं या फिर कई दिनों तक चलते हैं।
मेडिकल अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शकुन सिंह के अनुसार पीसीओडी का बड़ा कारण गलत खानपान है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ज्यादा तनाव लेने से भी पीसीओडी का खतरा बढ़ता है। हर साल 15 से 20 प्रतिशत मामले बढ़ते जा रहे हैं। आगे चलकर गर्भधारण करने में भी परेशानी होती है। समय पर इलाज न कराने और लापरवाही बरतने पर कैंसर की स्थिति भी बन सकती है।
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वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना चौधरी ने बताया कि रोजाना कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करना चाहिए। संतुलित आहार लेना चाहिए। साथ ही जब भी कोई समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह से दवा और जांच कराना जरूरी है।
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पीसीओडी के मुख्य लक्षण
- पीरियड्स का देर से आना या रुक जाना
- वजन तेजी से बढ़ना, चेहरे और शरीर पर बाल बढ़ना
- मुंहासे आना, बाल झड़ना, गर्भधारण में दिक्कत होना
पीसीओडी होने के कारण
- हार्मोन असंतुलन, फास्ट फूड और अस्वस्थ खानपान
- मोटापा, तनाव और नींद की कमी, शारीरिक गतिविधियां कम होना
- पारिवारिक या अनुवांशिक हालात भी जिम्मेदार