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कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से महंगे हुए उत्पाद
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सहारनपुर। गर्मी से राहत पाने के लिए लगाए जाने वाले कूलरों को भी महंगाई का करंट लग गया है। 700 रुपये तक कूलर के दामों में वृद्धि हुई है। दाम बढ़ने का कारण कूलर बनाने में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों वृद्धि को बताया जा रहा है। असर लकड़ी नक्काशी और हस्तशिल्प, पैकिं ग उद्योग, कूलर और तिरपाल आदि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों वृद्धि हुई है।
सहारनपुर में कूलर बनाकर बेचने वाली कई फर्म हैं। यह लोग कूलर की प्लास्टिक बॉडी दिल्ली से मंगाते हैं, जबकि मोटर बाइंडिंग के लिए कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा लोहे के कूलर की बॉडी के लिए लोहे की शीट का इस्तेमाल होता है। लोहे की शीट का दाम भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गया है। इन्हीं कारणों से इस बार कूलर के दाम में बढ़ोतरी बताई जा रही है। कॉपर के दाम में 45 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, तो प्लास्टिक दाना भी 25 से 30 प्रतिशत महंगा हो गया है। प्लास्टिक दाने का प्रयोग कूलर की प्लास्टिक बॉडी बनाने में किया जाता है। यहां करीब दस मैन्युफैक्चरिंग इकाई और करीब 200 व्यापारी हैं जो असेम्बल करके बेचते हैं। बेदी ट्रेडिंग के संचालक गुनीत सिंह बेदी का कहना है कि लागत बढ़ गई है। दिल्ली से कच्चा माल महंगा आ रहा है। जो कूलर पिछले साल 3000 रुपये का था, वह इस बार 3700 रुपये तक हो गया है। अग्रवाल इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री के संचालक वरुण अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में तांबा वायर 850 रुपये प्रति किलोग्राम आ रही है, जबकि बीते साल इसका दाम 550 रुपये प्रति किलोग्राम था। इसी तरह लोहे की शीट इस समय 85 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि बीते साल 65 रुपये था। इनके डीलर से दाम बढ़ने का कारण पूछा जाता है तो वह यही कहते हैं कि कंपनियों की तरफ से ही दाम बढ़ाए गए हैं।
होजरी यार्न का दाम भी बढ़ा
प्लास्टिक तिरपाल बनाने वाली वर्धमान इंडस्ट्री के संचालक अक्षय जैन का कहना है कि प्लास्टिक दाना इस समय 107 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि तीन महीना पहले दीपावली के आसपास 80 रुपये प्रति किलोग्राम रेट था। इसी कारण प्लास्टिक से बनने वाले उत्पादों पर महंगाई का असर है। दिल्ली और गाजियाबाद से प्लास्टिक दाना मंगाया जाता है।
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होजरी कारोबार को दिक्कत
यहां छोटी-बड़ी 350 इकाइयां संचालित हैं। जिनमें बनियान, कच्छा, जुराब, टॉप, लोअर आदि बनाए जाते हैं। यहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक होजरी उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। होजरी के यार्न का दाम भी 20 से 30 प्रतिशत बढ़ा है।
वेस्ट पेपर हुआ महंगा
कार्टन बनाने में प्रयुक्त वेस्ट पेपर का दाम 50 फीसदी तक बढ़ा है। सहारनपुर में कार्टन बनाने की 40 से ज्यादा फर्म हैं। कारोबारियों का कहना है कि वेस्ट पेपर की महंगाई ने दिक्कत बढ़ा दी हैं।
वुड कार्विंग उद्योग संकट में
वुडकार्विंग उद्योग से 200 से अधिक निर्यातक जुड़े हैं। करीब 1300 उत्पाद और एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हैं। वुडन हैंडीक्राफ्ट में प्रयोग होने वाले एमडीएफ (मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड) के दाम में 20 फीसदी तक बढे़ हैं। पहले एमडीएफ 35 रुपये फीट मिलती थी। अब 42 रुपये फीट मिल रही है।
सरकार को उठाना चाहिए सकारात्मक कदम
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के सहारनपुर चैप्टर चेयरमैन रविंद्र मिगलानी का कहना है कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) सेक्टर में कार्य करने वाले उद्यमियों के सामने कच्चे माल की महंगाई बहुत परेशान कर रही है। कार्टन, होजरी के यार्न, वुडन हैंडीक्राफ्ट में प्रयोग होने वाले एमडीएफ के दाम में वृद्धि हुई है। प्रदेश और केंद्र सरकार को इस संबंध में कदम उठाने चाहिए, ताकि रॉ मैटीरियल के दाम ज्यादा ना बढ़ने पाएं। इस संबंध में आईआईए की तरफ से भी पत्र भेजे गए हैं।
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सहारनपुर में कूलर बनाकर बेचने वाली कई फर्म हैं। यह लोग कूलर की प्लास्टिक बॉडी दिल्ली से मंगाते हैं, जबकि मोटर बाइंडिंग के लिए कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा लोहे के कूलर की बॉडी के लिए लोहे की शीट का इस्तेमाल होता है। लोहे की शीट का दाम भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गया है। इन्हीं कारणों से इस बार कूलर के दाम में बढ़ोतरी बताई जा रही है। कॉपर के दाम में 45 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, तो प्लास्टिक दाना भी 25 से 30 प्रतिशत महंगा हो गया है। प्लास्टिक दाने का प्रयोग कूलर की प्लास्टिक बॉडी बनाने में किया जाता है। यहां करीब दस मैन्युफैक्चरिंग इकाई और करीब 200 व्यापारी हैं जो असेम्बल करके बेचते हैं। बेदी ट्रेडिंग के संचालक गुनीत सिंह बेदी का कहना है कि लागत बढ़ गई है। दिल्ली से कच्चा माल महंगा आ रहा है। जो कूलर पिछले साल 3000 रुपये का था, वह इस बार 3700 रुपये तक हो गया है। अग्रवाल इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री के संचालक वरुण अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में तांबा वायर 850 रुपये प्रति किलोग्राम आ रही है, जबकि बीते साल इसका दाम 550 रुपये प्रति किलोग्राम था। इसी तरह लोहे की शीट इस समय 85 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि बीते साल 65 रुपये था। इनके डीलर से दाम बढ़ने का कारण पूछा जाता है तो वह यही कहते हैं कि कंपनियों की तरफ से ही दाम बढ़ाए गए हैं।
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होजरी यार्न का दाम भी बढ़ा
प्लास्टिक तिरपाल बनाने वाली वर्धमान इंडस्ट्री के संचालक अक्षय जैन का कहना है कि प्लास्टिक दाना इस समय 107 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि तीन महीना पहले दीपावली के आसपास 80 रुपये प्रति किलोग्राम रेट था। इसी कारण प्लास्टिक से बनने वाले उत्पादों पर महंगाई का असर है। दिल्ली और गाजियाबाद से प्लास्टिक दाना मंगाया जाता है।
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होजरी कारोबार को दिक्कत
यहां छोटी-बड़ी 350 इकाइयां संचालित हैं। जिनमें बनियान, कच्छा, जुराब, टॉप, लोअर आदि बनाए जाते हैं। यहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक होजरी उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। होजरी के यार्न का दाम भी 20 से 30 प्रतिशत बढ़ा है।
वेस्ट पेपर हुआ महंगा
कार्टन बनाने में प्रयुक्त वेस्ट पेपर का दाम 50 फीसदी तक बढ़ा है। सहारनपुर में कार्टन बनाने की 40 से ज्यादा फर्म हैं। कारोबारियों का कहना है कि वेस्ट पेपर की महंगाई ने दिक्कत बढ़ा दी हैं।
वुड कार्विंग उद्योग संकट में
वुडकार्विंग उद्योग से 200 से अधिक निर्यातक जुड़े हैं। करीब 1300 उत्पाद और एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हैं। वुडन हैंडीक्राफ्ट में प्रयोग होने वाले एमडीएफ (मीडियम डेंसिटी फाइबरबोर्ड) के दाम में 20 फीसदी तक बढे़ हैं। पहले एमडीएफ 35 रुपये फीट मिलती थी। अब 42 रुपये फीट मिल रही है।
सरकार को उठाना चाहिए सकारात्मक कदम
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के सहारनपुर चैप्टर चेयरमैन रविंद्र मिगलानी का कहना है कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) सेक्टर में कार्य करने वाले उद्यमियों के सामने कच्चे माल की महंगाई बहुत परेशान कर रही है। कार्टन, होजरी के यार्न, वुडन हैंडीक्राफ्ट में प्रयोग होने वाले एमडीएफ के दाम में वृद्धि हुई है। प्रदेश और केंद्र सरकार को इस संबंध में कदम उठाने चाहिए, ताकि रॉ मैटीरियल के दाम ज्यादा ना बढ़ने पाएं। इस संबंध में आईआईए की तरफ से भी पत्र भेजे गए हैं।