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यूपी: बढ़ते पेस्टीसाइड ने बिगाड़ा अरब की बिरयानी का स्वाद, बासमती का निरीक्षण करने मेरठ पहुंचा दल

Sat, 22 Dec 2018 10:39 AM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 22 Dec 2018 10:39 AM IST
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Increase of pesticide spoiled Arabian Biryani taste   a team reach meerut to examine Basmati rice
बिरयानी
बासमती में बढ़ते पेस्टीसाइड से विदेशी लोग चिंतित हैं। यहां के बासमती से बनने वाली बिरयानी के सऊदी अरब के लोग भी दीवाने हैं, लेकिन कुछ समय से वे पेस्टीसाइड के कारण बासमती के स्वाद में आई कमी के कारण परेशान हैं। इस स्वाद को बनाए रखने के लिए सऊदी अरब से 8 दिसंबर को एक दल भारत आया। दल के अधिकारियों ने वैज्ञानिकों और किसानों से बात कर राइस मिलों का निरीक्षण किया। उन्होंने पेस्टीसाइड को कम करने के लिए मंथन किया।
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सऊदी अरब को बासमती निर्यात करने में इंडिया दूसरे नंबर पर है। सऊदी फूड्स एंड ड्रग्स अथॉरिटी के दो अधिकारी भारत दौरे पर आए। दोनों अधिकारी मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम पहुंचे और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा से बढ़ती पेस्टीसाइड की समस्या को लेकर वार्ता की। साथ ही पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली के किसानों से की बात की। वहीं बीईडीएफ के प्रभारी और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि अरब के लोग बासमती से बनने वाली बिरयानी के कायल हैं। 
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पिछले दिनों आई थी यूरोप की टीम
10 नवंबर को यूरोप की टीम भी बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम आई थी। उन्होंने भी बासमती में बढ़ते पेस्टीसाइड पर चिंता जताई थी। टीम के सदस्यों ने कुछ सुझाव भी दिए थे। 

इन देशों में होता   है निर्यात
यूरोप, आस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, गिरीश, नीदरलैंड, स्वीडन, इंग्लैंड, डेनमार्क, इटली, पोलैंड, पुर्तगाल,        स्पेन, अमेरिका, अफगानिस्तान, इराक, ईरान समेत अन्य        देशों में बासमती जाता है।


इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
बासमती की क्वालिटी पर चर्चा।
पेस्टीसाइड के अवशेष निर्यात होने वाले चावल में सामन्य स्तर पर रहे।
देश में टेस्टिंग की क्या व्यवस्था है,   किस स्तर की लैब है।
राइस मिलों की वर्तमान स्थिति क्या  है, क्या सुधार हो सकता है।
पेस्टीसाइड का अधिक प्रयोग से क्या होगा नुकसान।

ये है निर्यात की स्थिति
वर्ष             निर्यात                      
2015-16:    9 लाख 48 हजार मीट्रिक टन
आमदनी :     5 हजार 500 करोड़ रुपये
2016-17:    8 लाख 9 हजार मीट्रिक टन
आमदनी :     4 हजार 500 करोड़ रुपये
2017-18:    7 लाख 92 हजार मीट्रिक टन
आमदनी :     5 हजार 343 करोड़
2018-19:    3 लाख 52 हजार मीट्रिक टन
आमदनी :     2 हजार 600 करोड़ रुपये

रिपोर्ट ले गए
भारत के बासमती की क्वालिटी अच्छी है, पिछले दो सालों से निर्यात हो रहे बासमती में पेस्टीसाइड की समस्या बनी हुई है। इसे लेकर विदेशी दल भी आकर मंथन कर रहे हैं। किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है। सऊदी अरब से आए दो सदस्यीय के साथ बैठक हुई है। दल पूरी रिपोर्ट तैयार करके ले गए हैं। 
-डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक, बीईडीएफ मोदीपुरम

इतने प्रतिशत होता है निर्यात
देश        प्रतिशत
ईरान    21.7
सऊदी अरब     20.0 
यूएई    10.5     
इराक    10.4     
यूरोप    9.0      
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