मुकीम काला गैंग के साबिर का वेस्ट यूपी में था खौफ, मुठभेड़ में ढेर
शामली में एनकाउंटर में पुलिस द्वारा मारे गए साबिर जंधेड़ी का सहारनपुर में पूरा खौफ व्याप्त था। मुकीम काला के साथ साबिर ने सहारनपुर में तनिष्क डकैती, राहुल ढाका की हत्या कर कार्बाइन लूट, नानौली चेक पोस्ट पर सिपाही की हत्या कर रायफल लूट एवं कई अन्य हत्या जैसी बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया था।
सहारनपुर में मुकीम काला गैंग के साबिर ने गैंग के साथ कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। सहारनपुर में 2015 में हुई तनिष्क शोरूम में डकैती की घटना को साबिर ने मुकीम काला गैंग के साथ मिलकर अंजाम दिया। जिसके बाद से इस गैंग का खौफ पूरे पश्चिमी यूपी में छाने लगा। एक के बाद एक घटनाओं को मुकीम काला और साबिर ने अंजाम दिया। सर्किट हाउस रोड पर सीओ उमेश कुमार यादव के गनर बागपत निवासी राहुल ढाका की गोली मारकर हत्या कर उसकी कार्बाइन लूटने की घटना को मुकीम काला के साथ मिलकर साबिर ने अंजाम दिया। नानौली चेकपोस्ट पर सिपाही को गोली मारकर उसकी रायफल लूटी। उससे पूर्व मुकीम काला और साबिर ने गैंग के साथ मिलकर 22 सितंबर 2014 को देवबंद में डकैती डाली थी, बिहारीगढ़ के मोहंड चौकी के निकट लूट की घटना को अंजाम दिया। गंगोह में घोड़ा वालों के यहां डकैती, देवबंद के गुर्जरवाड़ा में डकैती, बेहट में लूट समेत एक के बाद एक 14 घटनाओं को अंजाम दे डाला। सहारनपुर में ही साबिर पर हत्या, लूट, डकैती के 14 मामले दर्ज हैं। लेकिन 2015 में हुई तनिष्क डकैती के बाद से ही यह गैंग पुलिस के निशाने पर आ गया था। पुलिस ने एक के बाद एक करके इस गैंग को नेस्तनाबूत करना शुरू कर दिया था।
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मुकीम काला गैंग की कमान संभाली थी साबिर ने
मुकीम काला के साथ अक्तूबर 2015 में जेल जाने के बाद गैंग लगभग निष्क्रिय हो चुका था, लेकिन 1 मई 2017 को बाराबंकी में पेशी पर जाते समय पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद मुकीम काला गैंग की कमान साबिर ने संभाल ली थी।
साबिर के ठिकाने पर खड़े होते थे लूट के वाहन
पुलिस के अनुसार मुकीम काला गैंग द्वारा लूटे गए वाहनों को मुकीम काला गैंग के अयूब जंग, फिरोज पव्वा के साथ साबिर के ठिकाने पर खड़ा किया जाता था। साबिर के गांव जंधेड़ी में भी कई बार लूटे गए वाहनों को रखा गया। जिन्हें बाद में लूट की घटनाओं में प्रयोग किया जाता था।
साबिर के रिश्तेदारों के यहां ठहराता था गैंग को
पुलिस के अनुसार साबिर अपने गैंग के सदस्यों को घटना करने के बाद अपने खेतों में एवं अपने रिश्तेदारों के यहां ठहराता था। गैंग ने दिल्ली के सीमापुरी में फ्लैट ले रखा था, देहरादून में किराए पर मकान ले रखा था, सहारनपुर के चिलकाना में रुकने का ठिकाना था। साबिर ने कई बार खेतों में पॉपुलर के पेड़ों पर पन्नी एवं तिरपाल बांधकर एवं ईख में पन्नी बांधकर गैंग के सदस्यों को ठहराया था। फतेहपुर में साबिर की फूफी के यहां भी गैंग कई दिन रुका। देवबंद में भी साबिर का रिश्तेदार है, वहां भी कई बार अपने गैंग के सदस्यों को रुकवाया गया।
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