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रालोद छोड़ BJP में शामिल हुए पूर्व विधायक साहब सिंह से जुड़ी कुछ अहम बातें

Fri, 18 May 2018 08:18 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, बागपत Updated Fri, 18 May 2018 08:18 PM IST
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Important things related to RLD leader who joined BJP, first election was fought in 1985
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ साहब सिंह - फोटो : अमर उजाला

रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक साहब सिंह जिले की राजनीति के पुराने धुरंधरों में से एक रहे हैं। चुनाव वह सिर्फ एक जीते, लेकिन अब तक वह सात बार विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। निकाय चुनाव के बाद से ही उनके रालोद छोडने की अटकलें लगाई जाने लगी थी। सियासी गलियों में उनकी सपा में वापसी की संभावनाएं ज्यादा थी, लेकिन एन वक्त पर भाजपा में शामिल होकर उन्होंने सबको चौंका दिया।

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बाघू गांव के रहने वाले साहब सिंह ने सियासत की शुरूआत अस्सी के दशक में की थी। किसानों की राजनीति करने वाले साहब सिंह ने 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की दलित किसान मजदूर पार्टी से पहला चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। सियासत में उन्हें सबसे बड़ी कामयाबी मिली 1989 के चुनाव में, जब वह जनता दल के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। यहीं से उनकी सियासत भी बदलनी शुरू हुई। जनता दल का दौर था, सरकार टूटी और 1991 में दोबारा चुनाव हुए। लेकिन चौधरी अजित सिंह ने इस बार साहब सिंह के बजाए बागपत विधानसभा से महेंद्र जैन को टिकट दिया। साहब सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। तमाम शिकवे शिकायतों के बीच जनता दल ने उन्हें 1993 में टिकट दिया, लेकिन बागपत से इस बार कांग्रेस के टिकट पर नवाब कोकब हमीद को जीत मिली। 1996 में अजित सिंह ने भारतीय किसान कामगार पार्टी बनाई और सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। समझौते के चलते साहब सिंह चुनाव नहीं लड़ सके। 2002 में बसपा, 2007 और 2012 में सपा और 2017 में फिर रालोद से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई। इस बीच 2009 के लोकसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन वह जीत नहीं सके। 
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पत्नी को लड़ाना चाहते थे निकाय चुनाव
रालोद के टिकट पर विधानसभा चुनाव में हार के बाद वह इस साल बड़ौत पालिका से अपनी जिला पंचायत सदस्य पत्नी मिथलेश को चुनाव लड़ाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तीसरी बार जिला पंचायत सदस्य बनीं पत्नी को पद से इस्तीफा तक दिलवा दिया था, एन वक्त पर रालोद ने अश्वनी तोमर को टिकट दे दिया, जिस कारण वह चुनाव मैदान में नहीं उतर सकी। हालांकि इस्तीफा स्वीकार नहीं होने के चलते उनकी पत्नी की जिला पंचायत सदस्यता बरकरार रही।
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पढ़ें : रालोद से निष्कासित विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने की बीजेपी ज्वॉइन

मुलायम सिंह के नजदीकियों में गिनती

Important things related to RLD leader who joined BJP, first election was fought in 1985
मुलायम सिंह यादव

जिले की सियासत में उनकी गिनती पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के नजदीकियों में होती रही है। लेकिन सपा की कमान पूर्व सीएम अखिलेश यादव के हाथ में पहुंच जाने के बाद साहब सिंह अपने वजूद की तलाश में जुटे थे। सपा के बजाए उन्हें इस बार भाजपा का विकल्प बेहतर लगा।

खेमा भाजपा का और खिलाड़ी रालोद के 
सियासत के रंग भी अजीब हैं। जिले में भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। सिर्फ दिग्गजों की बात करें तो भाजपा में शामिल हुए ज्यादातर खिलाड़ी रालोदिए रह चुके हैं। भाजपा के बागपत विधायक योगेश धामा, बड़ौत विधायक केपी मलिक और छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला रालोद में रह चुके हैं। पिछले दिनों रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे। अब पूर्व विधायक और रालोद के प्रवक्ता साहब सिंह भी भाजपाई हो गए हैं।

लोकसभा चुनाव के अभियान में जुटी भाजपा
भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियां तेज कर दी है। यही वजह है कि विपक्षी दलों में सेंधमारी की जा रही है। पूर्व विधायक साहब सिंह के भी रालोद में आ जाने से अब भाजपा को मजबूती मिलेगी। इसकी वजह यह है कि उनकी प्रत्येक बिरादरी में अपनी पैठ है, जिसके दम पर वह अब तक आठ चुनाव लड़ चुके हैं और लखनऊ तक उनका लोहा माना जाता है।

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