चुनावी माहौल के बीच पश्चिमी यूपी में अवैध हथियारों का बढ़ा कारोबार, चुनौती बने मौत के सौदागर
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वेस्ट यूपी अवैध पिस्टल और तमंचे बनाने का गढ़ बन गया है। मुंगेर ब्रांड के हथियार अब महानगर में धड़ल्ले से बन रहे हैं। दिल्ली पुलिस भी यहां दबिश देकर पिस्टल और तमंचे बरामद कर रही है। लेकिन हथियारों के सौदागरों और गैंगों के मास्टरमाइंड को भूलकर छुटभैया को जेल भेजकर चुप्पी साधी जा रही है। पुलिस इस पूरे रैकेट को बेनकाब नहीं कर पा रही है और मौत का सामान बनाने का गोरखधंधा लगातार चल रहा है।
मेरठ समेत पश्चिम के जिलों से पुलिस हथियारों का जखीरा कई बार पकड़ चुकी है। चार-पांच अपराधियों को तमंचे या फिर पिस्टल के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। चुनावी माहौल में अवैध हथियारों की सप्लाई सबसे ज्यादा बढ़ती है। 2019 में लोकसभा चुनाव हैं तो कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। इस साल की ही बात करें तो अब तक करीब 3225 अवैध हथियार पुलिस बरामद कर चुकी है।
यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली पुलिस तो दावा कर चुकी है कि हथियार सबसे ज्यादा वेस्ट यूपी के जिलों से तैयार हो रहे है। लिसाड़ी गेट, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली से वह हजारों हथियार बरामद कर चुकी है। कई अवैध फैक्टरियां चलने के इनपुट मिल रहे हैं।
छोटी-छोटी बातों पर फायरिंग
गली मोहल्ले में छोटी-छोटी बातों पर फायरिंग होना ट्रेंड से बन गया है। मामूली झगड़ा होते ही अवैध तमंचे या पिस्टल से फायरिंग हो जाती है। रोजाना पुलिस को इसकी शिकायत मिलती है। पुलिस लाइन के सामने बुधवार को दरोगा के बेटे ने सरेआम गोलियां बरसाईं। बेगमबाग में व्यापारी पर गोलियां चलीं। साकेत में हवाई फायरिंग करते आरोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद हैं। जिसमें पुलिस ने समझौता करा दिया।
रोजाना 4 से 5 हथियारों की बरामदगी
आंकड़ों के अनुसार पुलिस रोजाना चार से पांच लोगों को तमंचे और पिस्टल के साथ गिरफ्तार करती है। इन हथियारों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। चर्चित हत्या या फिर हाईप्रोफाइल मामलों को छोड़कर आरोपियों के पास अवैध हथियार कहां से आते हैं, इसका जिक्र पुलिस कभी लिखापढ़ी में भी नहीं करती। जिसके चलते आरोपी को कोर्ट पुलिस की कमजोर विवेचना का फायदा मिलता है। वहीं, सही तरह से विवेचना न करने से अवैध हथियार थाने के मालखानों में धूल फांकते रहते हैं।
पूरा नेटवर्क, अधूरी सफलता
मेरठ पुलिस ने सरधना, सरूरपुर, मवाना, किठौर, लिसाड़ीगेट, लावड़ समेत कई जगहों पर अवैध हथियारों का जखीरा पकड़ा। सात-आठ कारीगर जेल भेजे। लेकिन इन हथियारों का सौदागर कौन है, इसका खुलासा नहीं कर सकी। दरअसल अवैध हथियारों को बनाने से लेकर बेचने तक का पूरा नेटवर्क है। हथियार कौन बनवा रहा है, कौन बना रहा है, कौन सौदा कर रहा है, कौन सप्लाई कर रहा है और कौन खरीद रहा है, इसकी पूरी चेन है। लेकिन पुलिस के हत्थे ऐसे अपराधी चढ़ते हैं जो एक तय रकम पर हथियार इधर से उधर पहुंचाने का काम करते हैं। या कहीं हथियार बनाने की फैक्टरी पकड़ी जाती है तो पुलिस कारीगरों को ही पकड़ती है, जबकि असली अपराधी मौके से फरार हो जाते हैं। पुलिस हथियार तो पकड़ लेती है। लेकिन सफलता अधूरी ही हाथ लगती है।
बरामद हथियारों का आंकड़ा
| सन | पिस्टल | तमंचे | बरामद |
| 2015 | 730 | 1350 | 2080 |
| 2016 | 832 | 1890 | 2722 |
| 2017 | 887 | 2220 | 3107 |
| 2018 | 1120 | 2105 | 3225 |
लगातार चल रहा है अभियान
अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री लगातार पकड़ी जा रही हैं। सप्लायरों की तलाश जारी है। वेस्ट यूपी के दो हथियार सप्लायर (सवा-सवा लाख के इनामी) को मुठभेड़ के बाद दबोचा गया। उनकी निशानदेही पर अन्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया जाएगा। -अखिलेश कुमार, एसएसपी
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