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सर्विस सेंटर के नाम पर हो रही वाहनों की अवैध बिक्री
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सर्विस सेंटर के नाम पर हो रही वाहनों की अवैध बिक्री
मेरठ। शहर में नामचीन वाहन कंपनी के डीलरों ने सर्विस सेंटर के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र तक अपना अवैध कारोबार खड़ा कर लिया है। सर्विस सेंटर के माध्यम से बिना वाहन कंपनी अनुमति और आरटीओ के ट्रेड सर्टिफिकेट बगैर वाहनों की बिक्री की जा रही है। इससे जहां लोग डीलरशिप के मुगालते में वाहन खरीद रहे हैं वहीं परिवहन विभाग के राजस्व को भी क्षति पहुंच रही है।
शहर में अमूमन सभी नामचीन कंपनी के दुपहिया और चौपहिया वाहनों की डीलरशिप है। ब्लॉक और नगर पंचायत स्तर पर वाहन कंपनी का नेटवर्क/डीलरशिप विस्तार को रोकने के लिए अधिकतर टू व्हीलर डीलरों ने एक नया फंडा निकाल लिया हैं। वाहन डीलर कंपनी का अधिकृत सर्विस सेंटर बनाकर वाहनों की बिक्री करा रहे हैं। मवाना, हस्तिनापुर, सरधना, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, किला परीक्षितगढ़ आदि क्षेत्रों में सर्विस सेंटरों पर हीरो, होंडा और बजाज आदि कंपनियों के वाहन अवैध रूप से बेचे जा रहे हैं। नियमानुसार कंपनी के अधिकृत डीलर ही आरटीओ से मिलने वाले ट्रेड सर्टिफिकेट लेने के बाद वाहनों की बिक्री कर सकते हैं।
मेन डीलर नहीं चाहते
शहर में बैठे मेन डीलर कस्बों और ब्लॉक स्तर पर कंपनी की डीलरशिप रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। डीलर नहीं चाहते कि कस्बों में डीलरशिप मिलने से उनका कारोबार कम हो। वहां डीलरशिप मिलेगी तो उनके वाहनों की बिक्री का आंकड़ा गिर जाएगा। इसके चलते उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में सर्विस सेंटर खोलकर वहां वाहनों को खड़ा कर दिया है।
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ग्राहक को होती है दिक्कत
अवैध सेंटर से वाहन खरीदने पर ग्राहक को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां से वाहन खरीदने पर गाड़ी की आरसी और नंबर प्लेट आदि महीनों बाद मिलती है। इसके अलावा वाहन में बड़ी खराबी होने पर सर्विस सेंटर वाले हाथ खड़े करते हुए शहर वाले मेन सर्विस सेंटर पर ले जाने को कहते हैं।
आरटीओ के राजस्व को हो रहा नुकसान
सभी वाहन डीलरों को वाहन बिक्री करने के लिए आरटीओ से ट्रेड सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके लिए एक हजार रुपये फीस रखी गई है। गांवों तक वाहन तो बिक रहे हैं लेकिन ट्रेड सर्टिफिकेट नहीं लेने से विभाग को राजस्व की हानि हो रही है।
डीलरों को देंगे नोटिस
सर्विस सेंटर के नाम पर वाहनों की अवैध बिक्री होने की जानकारी मिली है। डीलरों को नोटिस दिया जाएगा। अवैध रूप से डीलरशिप नहीं चलने दी जाएगी।
श्वेता वर्मा, एआरटीओ प्रशासन
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मेरठ। शहर में नामचीन वाहन कंपनी के डीलरों ने सर्विस सेंटर के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र तक अपना अवैध कारोबार खड़ा कर लिया है। सर्विस सेंटर के माध्यम से बिना वाहन कंपनी अनुमति और आरटीओ के ट्रेड सर्टिफिकेट बगैर वाहनों की बिक्री की जा रही है। इससे जहां लोग डीलरशिप के मुगालते में वाहन खरीद रहे हैं वहीं परिवहन विभाग के राजस्व को भी क्षति पहुंच रही है।
शहर में अमूमन सभी नामचीन कंपनी के दुपहिया और चौपहिया वाहनों की डीलरशिप है। ब्लॉक और नगर पंचायत स्तर पर वाहन कंपनी का नेटवर्क/डीलरशिप विस्तार को रोकने के लिए अधिकतर टू व्हीलर डीलरों ने एक नया फंडा निकाल लिया हैं। वाहन डीलर कंपनी का अधिकृत सर्विस सेंटर बनाकर वाहनों की बिक्री करा रहे हैं। मवाना, हस्तिनापुर, सरधना, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, किला परीक्षितगढ़ आदि क्षेत्रों में सर्विस सेंटरों पर हीरो, होंडा और बजाज आदि कंपनियों के वाहन अवैध रूप से बेचे जा रहे हैं। नियमानुसार कंपनी के अधिकृत डीलर ही आरटीओ से मिलने वाले ट्रेड सर्टिफिकेट लेने के बाद वाहनों की बिक्री कर सकते हैं।
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मेन डीलर नहीं चाहते
शहर में बैठे मेन डीलर कस्बों और ब्लॉक स्तर पर कंपनी की डीलरशिप रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। डीलर नहीं चाहते कि कस्बों में डीलरशिप मिलने से उनका कारोबार कम हो। वहां डीलरशिप मिलेगी तो उनके वाहनों की बिक्री का आंकड़ा गिर जाएगा। इसके चलते उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में सर्विस सेंटर खोलकर वहां वाहनों को खड़ा कर दिया है।
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ग्राहक को होती है दिक्कत
अवैध सेंटर से वाहन खरीदने पर ग्राहक को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां से वाहन खरीदने पर गाड़ी की आरसी और नंबर प्लेट आदि महीनों बाद मिलती है। इसके अलावा वाहन में बड़ी खराबी होने पर सर्विस सेंटर वाले हाथ खड़े करते हुए शहर वाले मेन सर्विस सेंटर पर ले जाने को कहते हैं।
आरटीओ के राजस्व को हो रहा नुकसान
सभी वाहन डीलरों को वाहन बिक्री करने के लिए आरटीओ से ट्रेड सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके लिए एक हजार रुपये फीस रखी गई है। गांवों तक वाहन तो बिक रहे हैं लेकिन ट्रेड सर्टिफिकेट नहीं लेने से विभाग को राजस्व की हानि हो रही है।
डीलरों को देंगे नोटिस
सर्विस सेंटर के नाम पर वाहनों की अवैध बिक्री होने की जानकारी मिली है। डीलरों को नोटिस दिया जाएगा। अवैध रूप से डीलरशिप नहीं चलने दी जाएगी।
श्वेता वर्मा, एआरटीओ प्रशासन