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वृद्धाश्रम लिया गोद अपनों ने छोड़ा साथ, तो बेगानों ने थामा हाथ

Sun, 05 Apr 2020 01:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2020 01:03 AM IST
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If the loved ones left, then the villagers held hands
अपनों ने छोड़ा साथ तो बेगानों ने थामा हाथ
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मेरठ। उम्र के अंतिम पड़ाव पर लॉकडाउन में कैद होती जिंदगी को जब अपनों ने ही बेसहारा छोड़ दिया तो बेगानों ने हाथ बढ़ाकर इन्हें अपनाया और गले लगाया। कोरोना संक्रमण के कारण पूरा देश लॉकडाउन के गंभीर काल से गुजर रहा है। दो वक्त की रोटी और राशन का संकट छोटे वर्ग से लेकर मजदूरों और निराश्रितों की भी चिंता बन गया है। ऐसे में अपनी ही संतान के दुर्व्यवहार से दुखी बुजुर्ग माता-पिता भी चिंतित हैं कि उनका गुजारा कैसे होगा। वृद्ध आश्रम में आने के बाद भी इन बुजुर्गों के सामने भरण पोषण का संकट था।
गंगा नगर स्थित श्री साईं सेवा संस्थान, वृद्ध जनआश्रम दादा-दादी निवास में रहने वाले बेसहारा बुजुर्गों के भरण पोषण की जिम्मेदारी भाजपा युवा मोर्चा के सदस्यों ने ली है। युवा मोर्चा के अध्यक्ष वीनस शर्मा के नेतृत्व में युवाओं की टोली ने संपूर्ण लॉकडाउन पीरियड के लिए इस वृद्धाश्रम को गोद ले लिया है। वृद्धाश्रम में रहने वाले 20 से अधिक बुजुर्गों का भोजन, दवाओं सहित सभी आवश्यक खर्च का भार युवाओं की टोली ही उठाएगी।
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आश्रम संचालिका नम्रता शर्मा ने बताया कि समय-समय पर समाज के विभिन्न लोग आश्रम के संचालन में आर्थिक मदद देते हैं। युवा मोर्चा ने हमारा काफी भार कम किया है। जिस भी चीज की आवश्यकता होती है उसे युवा मोर्चा के सदस्य अपनी प्रमुख जिम्मेदारी समझकर पूरा करते हैं।
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- लॉकडाउन में पालकों का हाथ हुआ तंग
दादा-दादी आश्रम में 20 से अधिक बेसहारा बुजुर्गों को आश्रय मिला हुआ है। सभी 60 साल से अधिक आयु के हैं। अधिकांश वह हैं जिन्हें उनके बच्चों ने घर से निकाल दिया या ठुकरा दिया। कुछ बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके बच्चे विदेश चले गए। धन-संपत्ति कुछ भी पास ना होने के कारण यह बुजुर्ग अपना अंतिम समय कहां काटे, इसलिए उन्होंने आश्रम में शरण ले ली। 2 अप्रैल 2017 को नम्रता शर्मा ने इस आश्रम को शुरू किया था। वह कहती हैं आश्रम के भवन का मासिक किराया, रसोइया का वेतन, भोजन, दवा, कपड़े सहित साफ सफाई व अन्य पर कुल मिलाकर 70 हजार तक मासिक खर्च होता है। कोई सरकारी अनुदान भी नहीं मिलता। समाज सेवा से आश्रम संचालित है। लॉकडाउन में लोग दान पुण्य करने भी नहीं आ रहे। ऐसे में युवा मोर्चा के सदस्य ही मदद कर रहे हैं।
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