सड़क मार्ग से करीब 110 किलोमीटर का फेर बचाने के चक्कर में नाव में सवार हुए तो कल्पना भी नहीं की थी कि मौत से सामना हो जाएगा। पुल के पिलर से टकराकर नाव ताश के पत्तों की मानिंद बिखर गई तो लगा अब जिंदगी नहीं बचेगी। तभी कुछ लोग फरिश्ते बन आ गए और बचा लिया। ये बातें भीकुंड नाव हादसे के बाद सकशुल बचे लोगों ने कहीं।
हस्तिनापुर नाव हादसा: हेड कांस्टेबल बनने निकले थे, मौत से हो गया सामना, लोगों की आपबीती सुन कांप उठी रूह
घुटने लगा था दम, तभी किसी ने खींच लिया
मनीष ने कहा कि मुझे तैरना आता है, लेकिन गंगा में बहाव तेज था। कुछ दूरी चलते ही दम घुटने लगा। तभी स्टीमर वाले एक युवक ने मुझे गंगा से खींचकर बाहर निकाल लिया। नाव में सवार लोगों की आपबीती सुनने वालों की भी रूह कांप गई। लोगों ने कहा कि इस हादसे को जिंदगी में कभी नहीं भूलेंगे।
तेज धार में फंस गई थी जान
नाव में सवार अमरीश ने बताया कि मंगलवार को भी हर रोज की तरह अपनी ड्यूटी पर जा रहा था जब वह भीमकुंड गंगा घाट से नाव में सवार हुआ और ना कुछ दूर चली और तेज धारा में फंस गई जहां पर पिलर से जा टकराई जिसके बाद वह अनियंत्रित हो गई। उसके बाद नाव डूबने लगी जहां पर पानी की गहराई कम से कम 50 फीट थी। एक के बाद एक सभी गंगा में डूबते चले गए। मदद के लिए चीख-पुकार मची गंगा किनारे कुछ लोग नाव में बैठने से रह गए थे जिन्होंने मददगार उन्हें जैसे-तैसे बाहर निकाला।
महेश का छूट गया हाथ
हस्तिनापुर निवासी शिक्षक देवेंद्र ने बताया कि जब नाव गंगा में डूबी तो उसे उम्मीद नहीं थी कि वह सकुशल बाहर निकल जाएंगे उनके साथ ही दूसरे शिक्षक महेश को भी उन्होंने निकालने की काफी कोशिश की परंतु तीव्र धारा के कारण उनके मंसूबों पर पानी फिर गया और महेश का हाथ छूट गया। इसके बाद वह जैसे-तैसे बाहर निकले।
बेटे ने गंगा में छलांग लगा मां को दी नई जिंदगी
रविता (50) भी नाव में सवार थीं। भीमकुंड गंगा पुल के पास खड़े उनके बेटे सरदार सिंह ने नाव पलटते देखी तो मां की जिंदगी बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। गंगा की लहरों से टकराते रहे। तभी स्टीमर में आए लोगों ने दोनों को बचाकर बैठा लिया। बाहर आकर मां ने बेटे सरदार से कहा कि आज दूने दूध का कर्ज अदा कर दिया है। रविता ने कहा कि उन्हें बचने की उम्मीद नहीं थी। उन्हें दूसरी जिंदगी बेटे ने ही दी है। सरदार सिंह ने अन्य कई लोगों को भी बचाने में मदद की। जिसने भी मां बेटे की इस कहानी को सुना, सरदार की तारीफ की।